हिमाचल में भाजपा जीती | Tehelka Hindi

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हिमाचल में भाजपा जीती

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हिमाचल में  भाजपा 44 सीटें जीती और कांग्रेस ने 21 सीटें हासिल की। कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियां ने सभी 68 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाई।

चुनाव के समय बनी अनिश्चितता के विपरीत पहाड़ के मतदाताओं ने आखिर 44 सीटों के साथ भाजपा की सत्ता में फिर वापसी करवा दी। भले भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल को हार का स्वाद चखना पड़ा, उन्होंने अपनी हार के वाद बड़ा दिल दिखाते हुए पार्टी की शानदार जीत पर खुशी जताई।  अपनी हार पर कहा कि ज़रूर कुछ कमी रही होगी जो मतदाताओं ने उनका समर्थन नहीं किया। इसकी समीक्षा की जाएगी।  इस बीच कुटलैहड़ से जीते भाजपा विधायक वीरेंद्र कँवर ने धूमल के लिए अपनी सीट खली करने का प्रस्ताव किया है। उनहोंने कहा कि धूमल प्रदेश भाजपा के सर्वमान्य नेता हैं और उनके लिए सीट छोड़ कर उन्हें ख़ुशी होगी।
उधर भाजपा आलाकमान ने सराज से जीते जय राम ठाकुर को मंगलवार को दिल्ली बुलाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सती भी अपना चुनाव हार गए हैं  लिहाजा उन्हें पद से हटाया जा सकता है। अभी यह साफ़ नहीं है की भाजपा किसे मुख्यमंत्री बनाएगी। धूमल को मुख्यमंत्री मनोनीत करने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। बाद में उन्हें किसी विधायक से सीट खाली करवाकर उपचुनाव लड़ाया जा सकता है। वैसे केंद्रीय स्वास्थय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के अलावा जय राम ठाकुर और अजय जम्वाल का नाम भी चर्चा में है। कांग्रेस चुनाव हार गयी लेकिन उसके मुख्यमंत्री पद के दावेदार वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू दोनों जीत गए। जुझारू राजनीति के लिए जाने जाने वाले माकपा के राकेश सिंघा करीब २४ साल के बाद दोबारा विधानसभा की देहरी पार कर गए और ठियोग में उन्होंने जबरदस्त जीत दर्ज की।
यदि नड्डा के लिए मुख्यमंत्री पद के द्वार खुले तो बिलासपुर से जीते भाजपा विधायक को अपनी सीट खाली करनी पड़ेगी। वैसे होगा क्या, इसकी तस्वीर कुछ दिन में साफ़ होगी।
कांग्रेस में राहुल गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में बदलाव होना तय है। ऐसे में हिमाचल में वीरभद्र सिंह का क्या भविष्य होता है इसका पता भी आने वाले दिनों में ही चलेगा। पार्टी में आशा कुमारी, मुकेश अग्निहोत्री जैसे नेता अब अग्रिम पंक्ति में दिखेंगे। वीरभद्र सिंह, जो इस चुनाव में मोर्चे पर अपने बूते लड़े, ने पार्टी की हार अपने ऊपर लेते हुए कि पार्टी के पास संसाधनों की कमी पार्टी की जीत के आड़े आई। उधर धूमल ने जनता का पार्टी की जीत के लिए धन्यवाद किया। अपनी हार पर उन्होंने कहा कि वे इससे दुखी हैं पर भाजपा के फिर सत्ता में आने की उन्हें ख़ुशी है। ‘तहलका’ से बातचीत में धूमल ने कहा कि जनता ने मोदी सरकार की नीतियों पर मुहर लगाई है। उन्होंने कहा ज़रूर कोइ कमी रही जो चुनाव में उन्हें मतदाताओं का समर्थन नहीं मिल पाया। कांग्रेस इस चुनाव में २२ सीटें ही जीत पाई। प्रदेश में जनता का हर चुनाव में सरकार बदल देने का चलन इस बार भी जारी रहा।

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