राफेल सौदा: कांग्रेस ने माँगा श्वेत पत्र; सरकार ने कहा इससे सुरक्षा को खतरा | Tehelka Hindi

ताजा समाचार A- A+

राफेल सौदा: कांग्रेस ने माँगा श्वेत पत्र; सरकार ने कहा इससे सुरक्षा को खतरा

जबकि कांग्रेस ने राफेल लड़ाकू विमान की ख़रीद को मोदी सरकार का “सबसे बड़ा घोटाला” करार दिया और इस पर एक श्वेत पत्र माँगा, रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को “निराधार” बताते हुए कहा कि 36 राफेल जेट विमानों के लिए 58,000 करोड़ रुपये के सौदे का खुलासा करने से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है।
लोकसभा में वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने बुधवार को कहा, “यह सरकार देश की सुरक्षा के साथ खेल रही है और एक उदाहरण राफेल सौदा है … यह सबसे बड़ा घोटाला है।”
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदा को लेकर मंगलवार को एनडीए सरकार पर हमला बोलते हुए इसे ‘‘बड़ा राफेल रहस्य’’ करार दिया था।
साथ ही पार्टी ने इस सौदे में राष्ट्रीय हित एवं सुरक्षा के साथ सौदा करने का आरोप लगाया और कहा कि इसमें घोटाले की बू आ रही है क्योंकि सौदे के लिए बातचीत में कोई पारदर्शिता नहीं है.
वहीं रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह सौदा क्षमता, कीमत, उपकरणों , हथियारों , आपूर्ति, रख रखाव और प्रशिक्षण जैसे सभी मामलों में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा किए गए सौदे से कहीं बेहतर है। मंत्रालय ने कहा कि इसमें रक्षा खरीद प्रक्रिया के सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि सुरक्षा कारणों और फ्रांस के साथ 2008 में हुए एक द्विपक्षीय समझौते के चलते लड़ाकू विमान सौदे की पूरी कीमत का खुलासा नहीं किया जा सकता है।
मंत्रालय ने कहा कि विमान सौदे की अनुमानित कीमत को लेकर पूर्व में संसद में बयान दिया जा चुका है लेकिन विमान सौदे के हर वस्तु की कीमत का बिंदुवार ब्योरा देना संभव नहीं है।
इन विमानों को देश की रक्षा जरूरत के अनुरूप उपकरणों, हथियारों से सुसज्जित किया गया है, जिसकी जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। दूसरे, फ्रांस के साथ 2008 में हुए एक समझौते के तहत भी पूरे सौदे की वस्तुवार जानकारी नहीं दी जा सकती है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिस सौदे को यूपीए सरकार दस सालों में अंजाम नहीं दे पाई उसे एनडीए ने महज एक साल में पूरा किया। दूसरे, राफेल के चयन मे बारे में कहा कि 2012 में यूपीए सरकार में ही प्रक्रिया पूरी कर राफेल को एल-1 घोषित किया गया था। इसलिए इस मामले में किसी दूसरे विक्रेता से बातचीत संभव नहीं थी।
राहुल गाँधी ने इसके जवाब में कहा ‘पहली बार रक्षा मंत्री कह रही हैं कि हम देश को नहीं बतायेंगे. सबसे बड़ा सौदा हुआ है, वायुसेना की रीढ़ की हड्डी (का मामला है) और रक्षा मंत्री कह रही हैं कि हम नहीं बतायेंगे. यह गोपनीय है. पेरिस, फ्रांस में हमने जो सौदा किया है, वह गोपनयीय है, हम देश को नहीं बता पायेंगे.”

Comments are closed