खुला खेल

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साथ-साथ कुछ समय पहले एक आयोजन में संघ के मुरिया मोहन भागवत और भाजपा नेता सुशील मोदी
साथ-साथ कुछ समय पहले एक आयोजन में संघ के मुरिया मोहन भागवत और भाजपा नेता सुशील मोदी

बिहार के कटिहार में संघ के एक पुराने और समर्पित कार्यकर्ता रहते हैं. विश्व हिंदू परिषद के लिए नित्य और निरंतर काम करते हैं. हमारी उनसे बात होती है. हम पूछते हैं कि इस बार चुनाव में तो वे खुल्लमखुल्ला राजनीति के खेल में लगे रहे. वे पक्के संघी होते हुए भी चतुर-चालाक नहीं हो सके हैं, सो सहज और सरल तरीके से बताते हैं. कहते हैं कि इस बार या तो नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं या संघ परिवार लड़ रहा है. भाजपा चुनाव लड़ती तो यह माहौल नहीं बनता. वे कहते हैं, ‘जानते हैं, इतने दिनों से हम लोग चुनाव लड़वा रहे हैं, लेकिन इस बार पहली बार भाजपा ने संघ के स्वयंसेवकों व कार्यकर्ताओं के लिए भी चारचकिया वाहन का इंतजाम करवाया और हमलोग उसी गाड़ी से प्रचार काम करते रहे. नहीं तो पहले तो हम लोगों को वह महत्व ही नहीं मिलता था. एक गाड़ी पर सवार हमलोग का मतलब हुआ- संघ का एक स्वयंसेवक, विश्व हिंदू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का एक-एक कार्यकर्ता और कहीं-कहीं एक भाजपाई भी.’

कटिहार वाले संघ के ये कार्यकर्ता जब पहली बार चुनाव में खुद को और खुद के साथियों को विशेष महत्व देने की बात बताते हैं तो ऐसी ही बातें कई जगहों से और भी बतायी जाती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘अब तक तो चुनावी मौसम में हमलोगों को प्रातः शाखा के बाद घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक करने का दायित्व दिया जाता था और उसमें परोक्ष तौर पर ही भाजपा की चर्चा करने की बात कही जाती थी. लेकिन इस बार पहली बार संघ ने भाजपा का झंडा थमाकर शाखा आने वाले स्वयंसेवकों को घर-घर भेजा और भाजपा के पक्ष में मतदान करवाने की अपील करवाई.’ रांची वाले संघ के स्वयंसेवक कहते हैं, ‘बहुत कुछ पहली बार हुआ इस बार, कितनी छोटी-छोटी बातें बताएं.’ धनबाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक पदाधिकारी कहते हैं, ‘इस बार हमलोगों ने पूरी ऊर्जा ही लगा दी है. छुपछुपाकर खेल खेलने वाला झंझट इस बार नहीं था, इसलिए टेंशन फ्री होकर भाजपा के पक्ष में काम करने का मजा आया.’

फारबिसगंज से लेकर धनबाद तक संघ व उसकी आनुषंगिक इकाइयों के सामान्य कार्यकर्ताओं से बात होती है तो वे खुलकर बताते हैं कि इस बार के चुनाव में उन्होंने खुल्लमखुल्ला मेहनत की और इसके लिए उन्हें विशेष दिशा-निर्देश भी मिलते रहे. लेकिन इसी बात की पुष्टि जब हम संघ और उसके इन संगठनों के पदाधिकारियों से करना चाहते हैं तो वे बस एक लाइन का जवाब देते हैं कि हम तो हर चुनाव में इस मतदाता जागरूकता का काम करते रहे हैं, इस बार भी किया, इसमें खास और नया क्या है? अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बिहार के संगठन मंत्री निखिल कुमार कहते हैं, ‘संघ का अपना सामाजिक दायित्व है, उसके 55 आनुषंगिक संगठन हैं, वे समाज सेवा का अपना काम अपने तरीके से सालों भर करते हैं. राजनीति में सिर्फ मतदाता जागरूकता अभियान तक हमारा फर्ज होता है, जो देश हित में होता है.’

निखिल कुमार का जवाब वैसा ही होता है, जैसा संघ के किसी पदाधिकारी का होता है लेकिन सच यह नहीं है. सच यह है कि इस बार के चुनाव में संघ के साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, भारत विकास परिषद, सहकार भारती, वनवासी कल्याण केंद्र, संस्कार भारती, सेवा भारती, राष्ट्रवादी शैक्षिक संघ, प्रज्ञा प्रवाह, संस्कृत भारती, सीमा जागरण मंच,  क्रीड़ा भारती जैसे उसके करीब 55 आनुषंगिक संगठन इस बार बिहार-झारखंड में सक्रिय रहे. संघ के पदाधिकारी भले ही यह कहें कि हम चुनाव में सिर्फ लोक जागरण मंच के जरिये मतदाता जागरण का काम करते हैं, लेकिन जानने वाले जानते हैं कि इस बार लोक जागरण मंच से ज्यादा हिंदू जागरण मंच जैसी संस्था सक्रिय रही.

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