UPSC रैंक 301 पर मचा घमासान, एक नाम, दो दावेदार… असली आकांक्षा कौन?

UPSC हर उम्मीदवार को एक यूनिक रोल नंबर देता है। आयोग की मेरिट लिस्ट के अनुसार रैंक 301 के लिए रोल नंबर 0856794 दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि दोनों आकांक्षा सिंह अपने-अपने दस्तावेजों में यही रोल नंबर बता रही हैं।

UPSC Rank 301 Controversy: यूपीएससी रैंक 301 का असली दावेदार कौन?
यूपीएससी रैंक 301 का असली दावेदार कौन?

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजे आने के बाद एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक 301 पर ‘आकांक्षा सिंह’ नाम दर्ज है, लेकिन इस एक रैंक पर दो अलग-अलग राज्यों की युवतियों ने दावा कर दिया है। एक आकांक्षा सिंह बिहार से हैं, जबकि दूसरी उत्तर प्रदेश की रहने वाली बताई जा रही हैं। दोनों ही खुद को रैंक 301 का असली हकदार बता रही हैं।

नतीजा घोषित होने के बाद दोनों के घरों में जश्न का माहौल बन गया। परिवार वालों ने मिठाइयां बांटी, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने बधाई देना शुरू कर दिया। मीडिया में भी दोनों के नाम की चर्चा होने लगी। लेकिन जल्द ही सवाल उठने लगे कि आखिर असली उम्मीदवार कौन है।

जब दोनों के एडमिट कार्ड सोशल मीडिया पर सामने आए और उनके QR कोड स्कैन किए गए तो मामला और उलझ गया। स्कैन करने पर दोनों के रोल नंबर अलग-अलग दिखाई दिए। इससे शक पैदा हुआ कि किसी एक दस्तावेज में रोल नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है।

बिहार के भोजपुर की रहने वाली आकांक्षा सिंह के परिवार ने सबसे पहले उनकी सफलता का ऐलान किया था। स्थानीय मीडिया में उनकी खबरें भी चलीं। लेकिन जब उनके एडमिट कार्ड के डेटा का मिलान किया गया तो पता चला कि उनका असली रोल नंबर मेरिट लिस्ट में दर्ज रोल नंबर से मेल नहीं खा रहा है।

Akanksha Singh Bihar Admit Card: बिहार वाली आकांक्षा सिंह के क्यूआर कोड पर अलग रोल नंबर है।

वहीं उत्तर प्रदेश की आकांक्षा सिंह ने भी सोशल मीडिया पर अपने दस्तावेज साझा किए हैं। उनके एडमिट कार्ड पर वही रोल नंबर दिख रहा है जो मेरिट लिस्ट में दर्ज है। बताया जा रहा है कि वे वाराणसी की रहने वाली हैं और फिलहाल एक अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम कर रही हैं।

Akanksha Singh UP Admit Card: यूपी वाली आकांक्षा सिंह के एडमिट कार्ड और क्यूआर कोड पर एक ही रोल नंबर है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि केवल नाम के आधार पर किसी भी रिजल्ट की पुष्टि करना सही नहीं होता। UPSC जैसी बड़ी परीक्षा में असली पहचान हमेशा रोल नंबर और आधिकारिक डेटा से ही तय होती है।

अब इस मामले का अंतिम फैसला केवल UPSC के आधिकारिक सत्यापन के बाद ही हो पाएगा। अगर किसी ने जानबूझकर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की है तो उस पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल सबकी नजर आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई है।