चार दिन में समाप्त हुआ यूपी विधानसभा का मानसून सत्र, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; सरकार-विपक्ष में तीखी नोक-झोंक

नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को निर्धारित अवधि से पहले ही अनिश्चितकाल (साइन डाई) के लिए स्थगित कर दिया गया। चार दिवसीय सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, लगातार हंगामे और वेल में प्रदर्शन के कारण कई बार कार्यवाही बाधित रही। अंतिम दिन भी विपक्ष के विरोध के बीच सदन की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

सत्र के दौरान विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग, कानून-व्यवस्था, किसानों को खाद की उपलब्धता, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने कई बार नारेबाजी करते हुए वेल में प्रदर्शन किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष ने जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा का अवसर गंवाया और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं किया।

वहीं विपक्ष ने सरकार पर गंभीर मुद्दों से बचने का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्र की अवधि और कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए इसे “चार दिन का सत्र” बताते हुए कहा कि सरकार महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचती रही।

अनुपूरक बजट समेत कई अहम कार्य पूरे

हंगामे के बावजूद सरकार ने सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। इसके अलावा कई विधायी और वित्तीय कार्य भी पूरे किए गए। सरकार ने इसे विकास और जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

सत्र समाप्त होने के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल (साइन डाई) के लिए स्थगित कर दी।