Bihar का विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : PM मोदी

गांधी मैदान में शपथ ग्रहण की गूंज: इस विस्तार में सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की रही जिन्होंने पहली बार मंत्रिपरिषद में जगह बनाई है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी मनोनीत मंत्रियों को शपथ दिलाई। इस नए मंत्रिमंडल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी पांच घटक दलों को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है...

बिहार में NDA का मेगा मंत्रिमंडल: 31 चेहरों के साथ Samrat की नई टीम Pic Credit : BJP/Facebook Page
बिहार में NDA का मेगा मंत्रिमंडल: 31 चेहरों के साथ Samrat की नई टीम Pic Credit : BJP/Facebook Page

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/पटना) ऐतिहासिक गांधी मैदान आज बिहार की बदली हुई राजनीति का गवाह बना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में 31 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली।

बिहार में NDA का मेगा मंत्रिमंडल: 31 चेहरों के साथ Samrat की नई टीम…Pic Credit : BJP/Facebook Page

इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने न केवल इस गठबंधन की मजबूती पर मुहर लगाई, बल्कि बिहार के विकास के लिए अपना स्पष्ट विजन भी साझा किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “बिहार का विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘डबल इंजन’ की यह सरकार राज्य में सुशासन और विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। हमारा लक्ष्य अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है।”

यह विस्तार केवल प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन द्वारा दिलाई गई इस शपथ में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता के नए संतुलन की झलक दिखी। भाजपा ने 15 और जदयू ने 13 मंत्रियों के साथ अपनी हिस्सेदारी तय की, वहीं छोटे सहयोगियों को भी उचित सम्मान दिया गया। नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का मंत्रिमंडल में शामिल होना इस सत्ता परिवर्तन की सबसे चौंकाने वाली और चर्चित घटना रही, जिसे जदयू के भविष्य की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

अनुभवी विजय कुमार सिन्हा, श्रवण कुमार और अशोक चौधरी के साथ-साथ श्रेयसी सिंह जैसे युवा चेहरों को जगह देकर सम्राट चौधरी ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की सफल कोशिश की है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि दिल्ली की नजर अब सीधे बिहार के प्रशासनिक सुधारों पर है। अब चुनौती इन नए चेहरों के सामने है कि वे प्रधानमंत्री के ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को कितनी तेजी से धरातल पर उतार पाते हैं।