UAE से Europe तक पीएम मोदी का बड़ा दौरा, ऊर्जा से लेकर टेक्नोलॉजी तक कई अहम मुद्दों पर होगी बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को छह दिन की विदेश यात्रा पर रवाना हो गए। इस दौरे में वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे। इस यात्रा का फोकस ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, नई टेक्नोलॉजी और वैश्विक हालात के बीच भारत के रिश्तों को मजबूत करना माना जा रहा है।

UAE से Europe तक पीएम मोदी का बड़ा दौरा। | Image Source: The Economic Times Hindi
UAE से Europe तक पीएम मोदी का बड़ा दौरा। | Image Source: The Economic Times Hindi

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा की शुरुआत यूएई से होगी, जहां वह राष्ट्रपति Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, ऊर्जा आपूर्ति और भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को लेकर बातचीत होने की उम्मीद है। साथ ही एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण से जुड़े अहम समझौतों पर भी चर्चा हो सकती है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई पर असर को देखते हुए भारत इस दौरे को काफी अहम मान रहा है। Strait of Hormuz में हालात खराब होने से दुनिया की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।

यूएई के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड जाएंगे। वहां वह राजा Willem-Alexander, रानी Maxima और प्रधानमंत्री Rob Jetten से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी। नीदरलैंड भारत के बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।

इसके बाद प्रधानमंत्री स्वीडन और नॉर्वे का दौरा करेंगे। स्वीडन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। वहीं नॉर्वे में पीएम मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता भी मौजूद रहेंगे।

दौरे के आखिरी चरण में प्रधानमंत्री मोदी इटली पहुंचेंगे, जहां वह प्रधानमंत्री Georgia Meloni और राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।

सरकार का मानना है कि यह दौरा मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।