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बिहार में सड़क हादसा ; 6 बारातियों की मौत,3 घायल

बिहार : भागलपुर-कहलगांव मुख्य मार्ग एनएच-80 पर घोघा के आमापुर के पास सोमवार की देर रात भीषण दुर्घटना हो गई। एक बारात गाड़ी पर गिट्टी लदा हाईवा पलट गया, जिसमें दबकर स्कॉर्पियो में सवार छह बाराती की मौके पर मौत हो गई।तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना रात करीब 11.30 बजे की है। सभी घायलों को मायागंज अस्पताल, भागलपुर भेजा गया है।पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।घटना की सूचना मिलने के बाद घोघा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और एनएच-80 का निर्माण कर रही एजेंसी की जेसीबी और अन्य संसाधनों से मलबा हटाने का काम शुरू कराया।
मलबे में से निकाले गए लोगों में तीन घायल थे, शेष छह लोगों की मौत हो चुकी थी।मौके पर आसपास के लोगों की काफी भीड़ जमा हो गयी।घायलों ने स्थानीय लोगों को जो सूचना दी, उसके अनुसार बारात मुंगेर के हवेली खड़गपुर के गोवड्डा से पीरपैंती के खिदमतपुर जा रही थी।तीन स्कॉर्पियो से बाराती एनएच-80 पर भागलपुर से कहलगांव की ओर जा रहे थे। विपरीत दिशा से यानी कहलगांव की ओर गिट्टी लदा हाईवा आ रहा था। इसी दौरान हाईवा अनियंत्रित हो गया और स्कॉर्पियो पर पलट गया।
बीच में चल रही स्कॉर्पियो पूरी तरह से हाईवा की जद में आ गई। हाईवा में जितनी गिट्टी भरी थी, वह स्कॉर्पियो पर आ गई और उसमें दबकर बारातियों की मौत हो गई। मृतक में दो बच्चे भी शामिल हैं। दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो के आगे-पीछे चल रही दो अन्य स्कॉर्पियों किसी तरह हाईवा से बच निकली। वरना और भी ज्यादा लोगों की मौत हो सकती थी। बताया गया कि घटनास्थल पर सड़क निर्माण कार्यचल रहा था। सड़क एक ओर से करीब तीन से चार फीट तक ऊंची थी, जिस पर ट्रक गुजरने के कारण वह अनियंत्रित होकर बाराती वाहन पर पलट गया।घोघा में बारात गाड़ी की दुर्घटना में घायल 60 वर्षीय कैलाश दास सहित अन्य घायलों को सोमवार रात लगभग 1.30 बजे मायागंज अस्पताल लाया गया।सबकी स्थिति गंभीर बतायी जा रही है। घायल कैलाश ने बताया कि लगभग एक घंटे तक वे लोग मलबे में दबे रहे।सांसें अटकी रहीं।गाड़ी में बैठे अन्य लोगों के साथ वह भी अपना होश खो बैठे थे, लेकिन कुछ देर के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि कोई हमें निकाले। अंदर दम घुट रहा था। साथी बाराती की क्या स्थिति थी, कौन जिंदा रहा और कौन नहीं, यह भी पता नहीं चल पा रहा था।

गति और तकनीकी विकास में सूचनाओं का महत्व

कल्पना मनोरमा

सावधान! सूचनाओं में शांति, धर्म, अहिंसा, सन्मार्ग, आनंद और ऐश्वर्य तलाशती दुनिया को मालूम होना चाहिए कि सूचना मात्र जानकारी, इत्तिला, नोटिस, विज्ञापन, प्रतिवेदन भर है। स्थाई समाधान नहीं। स्थायित्व की चाहना रखने वालों को सूचनाओं के इतर सोचना, देखना और समझना होगा।
‘रोटी कपड़ा और मकान’ आदमी की मूलभूत ज़रूरतें हैं। इन्हीं तीन के फेर में चकरघिन्नी बने आदमी को हमेशा दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती रही हैं। इस में कोई दो राय नहीं। कम से कम भारतीय नागरिकों के सामने रोटी के जुटान में पेंचीदगी का आलम हमेशा बना ही रहा है। आज भी आय के न्यूनतम साधनों में जीवन यापन करने वालों की भारत में कोई कमी नहीं। जिन्हें अपने और अपनों का जीवन उगने और फलने-फूलने लायक बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। बावजूद इसके आधुनिक विकसित काल में इन तीन ज़रूरी तथ्यात्मक साधनों को जुटाने में जटिलता कम नहीं हुई बल्कि अब कठिनाइयों का ग्राफ इंसान के कद से ऊँचा उठ गया है।
आज इंसान के सामने सूचनाओं के अंबार में से अपने लायक उपयुक्त सूचना तलाश लेने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति गलत सूचनाओं के फेर में पड़ जाए तो वह अपने जीवन की यात्रा वैसे ही बना लेता है, जैसे- फ्लाई ऑवर पर एक गलत टर्न लेने से मिनटों की यात्रा घंटों में परिवर्तित कर मुसाफ़िर सही मुकाम पर पहुँचने से चूककर चुक जाता है।
‘सूचना’ शब्द तब भी शायद इतना महत्वपूर्ण न बन पड़ा होगा जब इसे खोजा गया होगा। कहा जाता है कि यह आकस्मिक व सामान्य ‘सूचना’ शब्द 20वीं सदी की शुरुआत में लैटिन मूल इन्फोर्मेम “रूपरेखा या विचार” से गढ़ा गया था और आज मायाजाल की तरह नहीं, अमरबेल की तरह इंसानों के ऊपर पसर चुका है।
समाजशास्त्री कहते हैं कि सामाजीकरण (Socialization) के लिए सूचना का महत्व उतना ही जरूरी है जितना अन्य क्रियान्वयन…। क्योंकि सुन्दर समाज बनाने की प्रक्रिया जटिल है। इसके गठन में किसी एक प्रकार की भूमिका या विधि से काम नहीं चल सकता। सामाजीकरण की प्रक्रिया में मनुष्य के व्यवहार व्यवस्था में स्थिरता और पूर्वानुमेयता पैदा करने के लिए सामाजिक नियंत्रण शामिल है, और इन प्रक्रियाओं में सूचनाओं का महत्व अपनी तरह काम करता है। समाज अपनी सुगंध और संस्कृति को बनाये और बचाए रखने के लिए सूचनाओं को तरजीह देता है। सामाजिक प्रविधियों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी विशेष भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों के अपेक्षित व्यवहार, मूल्यों, मानदंडों और सामाजिक कौशल को सीखने की चल रही प्रक्रिया को सीखा जा सकता है। सूचनाओं के माध्यम से मनुष्य समाज के विभिन्न व्यवहार, रीति-रिवाज़, गतिविधियाँ इत्यादि को एक से दूसरे तक पहुँचाता रहा है। जैविक अस्तित्व से सामाजिक अस्तित्व में मनुष्य का रूपांतरण भी सामाजीकरण के माध्यम से ही होता है। और सूचना सामाजीकरण में सहयोगी साबित होती आ रही है।
धर्म के चार स्तंभ सत्य, तप, पवित्रता एवं दान बताए गए हैं। इन्हीं पर इंसानी जीवन की छत टिकी होती है लेकिन आज सूचना का महत्व जीवन से ज्यादा दिख रहा है। दिन-रात इंसान के कान से लग कर कोई न कोई बोलता जा रहा है। पहले भी लोग हाथों में अखबार और कान से रेडियो लगाए फिरते रहते थे लेकिन तब सूचनाओं में सत्य की प्रामाणिकता कौतुहल से ज्यादा होती थी। दाल में नमक भर कौतुहल मिलाकर उसे रोचक बनाया जाता था।ताकि पाठक को आनंद आये और वह मुद्दे की बात तक पहुँच सके। लेकिन अब सूचनाओं में सब उलट चुका है। अब दाल में नमक भर सत्यता मिल जाए तो बहुत बड़ी बात होगी। जबकि सूचना ज्ञान, संचार और मूल्य व गुणवत्ता निर्धारण का महत्वपूर्ण स्रोत है। इस माध्यम से व्यक्तियों और समाज के प्रति अवगत कराकर निर्णय लेने में मदद करता है। वर्तमान समय में सूचनाओं में सत्य की कसौटी बिना जाँचे अगर फेर में पड़ गए तो हालत क्या होती है….सब जानते और समझते हैं। बताने की आवश्यकता नहीं।  
सूचना के समानधर्मी शब्द डेटा, तथ्य, बुद्धिमत्ता, सलाह को माना जाता है। क्या आज की सूचनाओं में इन सभी का समावेश दिखता है? कभी-कभी लगता है कि इंसान को सूचना की जरूरत पड़ी ही क्यों? लेकिन फिर लगता है कि सूचना जनता का अधिकार है और यह इंसान को सूचित कर आगाह करने, जानकारी देने की एक कामयाब विधि है। कहा जाता है कि सूचना के मद्देनज़र भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया, जिसे सूचना का अधिकार यानी आरटीआई कहा गया। इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कभी भी और कोई भी जानकारी ले सकता है। शर्त बस इतनी कि आरटीआई के तहत पूछी जाने वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। क्या इस बात को माना जा रहा है?
आज धरती से लेकर आसमान तक बस खबरें ही ख़बरें सुनाई-दिखाई पड़ रही हैं। प्रचारित खबरों में न गुणवत्ता की परवाह है, न तथ्यों की कसौटियाँ, न गोपनीयता और न अखंडता के प्रति प्रतिबद्धताएँ । न ही जनमानस के आगे परोसी जा रही सूचनाओं में किसी भी प्रकार के सिद्धान्ताकी की कोई गुंजाइश समझ आती। जबकि सूचना सुरक्षा के मूल सिद्धांत गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता है। गोपनीयता के सिद्धांत का उद्देश्य व्यक्तिगत जानकारी को उजागर न करते हुए किसी की निजता को निजी रखना होता है। यह सिद्धांत ये सुनिश्चित करना है कि दी जा रही सूचना केवल उन व्यक्तियों के लिए दृश्यमान होगी  जिन्हें संगठनात्मक कार्यों को करने के लिए इसकी आवश्यकता होगी।
वर्तमान समय में सूचना सुरक्षा खतरों की सैकड़ों श्रेणियाँ और लाखों ज्ञात खतरे हैं। आज सिर्फ राजनीति ही नहीं, उद्यम, सुरक्षा, स्वास्थ्य, धर्म, मनोरंजन, शादी-ब्याह आदि के प्रति आधी-अधूरी सूचनाएँ खतरे के निशान के ऊपर उपलब्ध हैं। गति और तकनीकी विकास के महान दौर में सुरक्षा उपायों में हर व्यक्ति यानी शहरी, ग्रामीण, व्यवसायी, नौकरीपेशा, किसान, मेहनतकश यहाँ तक भिक्षा के माध्यम से जीवन-यापन करने वालों को भी कम-ज्यादा समझौते करने पड़ रहे हैं। कौन कब ठगी के जाल में फँस जाए,किसी को नहीं पता।
तुलसीदास ने मन की तुलना पीपल के पत्तों से की है। मन को इसी तरह से होना भी चाहिए। मन का स्थूल होना जीवन को कीचड़ के समान बना देता है। जिस तरह पुरवा, पछुआ, दक्खिनी, उत्तरायणी माने तनिक सी भी हवा के सिहरन से पीपल के पत्ते डोल उठते हैं, हमारे मन को भी इसी तरह संवेदनशील होना चाहिए। लेकिन पीपल के सादगी भरे लेन-देन उच्छृंखल नहीं, सुगठित होते हैं। सूचनाओं के इस महान समय में क्या हम इस बात को ठीक से समझ पा रहे हैं?
क्या हम अपने आस-पास दुष्प्रचार फैलाने से कम से कम अपने को रोक पा रहे हैं? या दुष्प्रचार के इस अमानवीय समय में अपनों को समझा पा रहे हैं कि हर एक सूचना को सत्य, तप, पवित्रता एवं दान की कसौटी पर देखने के बाद, सबसे बड़ा धर्म मानवता पर कस कर देखने के वे पक्षधर बने रहें ? आख़िर हम चाहते क्या हैं? क्या कभी इस प्रश्न को सोचते हैं?
अंत में बस इतना ही कि सूचनाओं का यह महान दौर जो भड़भूजे की तरह हमें भून देने पर आमादा है, हमारी तैयारी क्या होनी चाहिए? और कितनी होनी चाहिए? क्योंकि सही सूचनाओं से ही कुछ उपयोगी विमश हो सकता है, अन्यथा समय की बर्बादी पर लगाम लगानी होगी। इंसान को समझना होगा कि वर्तमान में परोसी जा रहीं सूचनाएँ, उसके लिए कितनी उपयोगी और कितनी अनुपयोगी हैं। किन-किन सूचनाओं का स्वागत करना चाहिए और किन का बहिष्कार। विकास के मोह में फँसा जीवन अब हंस-विवेक की माँग कर रहा है।

(लेखिका साहित्यकार, विचारक एवं सेवानिवृत्त अध्यापिका हैं।)

कांग्रेस को तगड़ा झटका, भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति

मध्यप्रदेश : गुजरात की तरह मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस को एक और झटका लगा है।इंदौर लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।यही नहीं, कांग्रेस छोड़कर अक्षय बम ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसकी जानकारी दी है।
कैलाश विजयवर्गीय ने अक्षय बम के साथ सेल्फी शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, इंदौर से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी अक्षय कांति बम का माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेतृत्व में भाजपा में स्वागत है।
बता दें कि इंदौर लोकसभा सीट पर चुनाव के लिए 25 अप्रैल तक नामांकन भरे गए थे।नाम वापसी के लिए 29 अप्रैल दिन आखिरी दिन था। इससे पहले कांग्रेस को कुछ खबर लग पाती तब तक कैलाश विजयवर्गीय ने इस ‘ऑपरेशन’ को अंजाम दे दिया। इंदौर में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान 13 मई को होगा और मतगणना 4 जून को संपन्न होगी।
मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई यानी इंदौर से कांग्रेस के लोकसभा चुनाव उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने बीते 24 अप्रैल को ही अपना नामांकन दाखिल किया था। हलफनामे में बम ने अपनी कुल प्रॉपर्टी 57 करोड़ रुपए बताई। खास बात यह है कि कांग्रेस उम्मीदवार के कोई कार नहीं है। वह 14 लाख रुपए की घड़ी पहनते हैं। पिछले दिनों गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से बीजेपी के मुकेश दलाल को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया था। इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार निलेश कुम्भानी का नामांकन एक दिन पहले ही रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द कर दिया था।उनके प्रस्तावकों के हस्ताक्षर में गड़बड़ियों का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया था।कांग्रेस के उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होने के बाद बाकी बचे 8 उम्मीदवारों ने भी अपनी उम्मीदवारी वापिस ले ली थी।ऐसे में बीजेपी उम्मीदवार मुकेश दलाल निर्विरोध चुन लिए गए थे।चुनाव आयोग ने उन्हें जीत का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया।

पिकअप ने हाइवे पर खड़ी वाहन में मारी टक्कर;10 लोगों की मौत,23 लोग घायल

छत्तीसगढ़ : बेमेतरा में एक पिकअप ने हाईवे पर खड़ी कार को टक्कर मार दी। जिससे 3 बच्चों समेत 10 लोगों की मौत हो गई है। इस हादसे में 23 लोग घायल हो गए हैं। हादसे में 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें रायपुर एम्स रेफर कर दिया गया है। दुर्घटना उस वक्त हुई जब पीड़ित एक पारिवारिक समारोह से लौट रहे थे। यात्रियों को ले जा रही पिकअप ने हाईवे पर खड़ी एक कार को टक्कर मार दी। बाकी लोगों का इलाज बेमेतरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। मृतकों में 5 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल हैं।घटना करीब 2 से 3 बजे रात का बताया जा रहा है।
यह हादसा बेमेतरा थाना क्षेत्र के ग्राम कठिया पेट्रोल पंप के पास हुआ। सड़क के किनारे माजदा कार खड़ी थी। जिसमें लोगों से भरी पिकअप ने टक्कर मार दी। सभी लोग परिवारिक कार्यक्रम में शामिल होकर ग्राम तिरैया से अपने गांव पथर्रा लौट रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंच गए।
कलेक्टर और एसपी के साथ एसडीएम भी घटनास्थल पर पहुंचे और अस्पताल में घायलों का हाल भी जाना। पुलिस ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। घायलों का इलाज चल रहा है। स्थानीय पुलिस ने कहा कि दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है। अभी ऐसा लग रहा है कि तेज रफ्तार की वजह से यह टक्कर हुई है। मृतकों में से 6 की घटना स्थल पर मौत हो गई। मरने वालों की पहचान भूरी निषाद (50), नीरा साहू (55), गीता साहू (60), अग्निया साहू (60), खुशबू साहू (39), मधु साहू (5), रिकेश निषाद (6) और ट्विंकल निषाद (6) के तौर पर हुई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री का एडिटेड वीडियो वायरल करने वाले की खोज में लगी पुलिस

नई दिल्ली:केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो को लेकर रविवार (28 अप्रैल) को दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। इस वीडियो में शाह SC-ST और OBC के आरक्षण को खत्म करने की बात करते दिख रहे हैं। हालांकि, न्यूज एजेंसी PTI के फैक्ट चेक में ये वीडियो फेक साबित हुआ है।

इस एडिटेड वीडियो को फैलाने को लेकर एक शिकायत भाजपा की ओर से की गई थी, जबकि दूसरी शिकायत गृह मंत्रालय की तरफ से की गई थी। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने देशभर में FIR दर्ज करने का फैसला किया है।

VVPAT को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं

नई दिल्ली:लोकसभा चुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है।इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में डाले गए वोटों के साथ वीवीपैट (VVPAT) के 100 फीसदी सत्यापन की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) अपना फैसला सुनाते हुए वीवीपैट से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। 24 अप्रैल की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट प्रशांत भूषण, गोपाल शंकरनारायण और संजय हेगड़े पैरवी कर रहे हैं।वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अब तक एडवोकेट मनिंदर सिंह, अफसरों और केंद्र सरकार की ओर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मोर्चा संभाला था।

इससे पहले जब फैसला आना था तब सुप्रीम कोर्ट में करीब 40 मिनट तक चली सुनवाई में जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था- ‘मेरिट पर दोबारा सुनवाई नहीं कर रहे।हम कुछ निश्चित स्पष्टीकरण चाहते हैं।हमारे कुछ सवाल थे जिनके जवाब मिल गए। हम फैसला सुरक्षित रख रहे हैं।’

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच में ये मामला आगे बढ़ा।कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए कदमों के बारे में चुनाव आयोग के वकील से EVM और VVPAT की पूरी प्रक्रिया समझी थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने विभिन्न याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि हर चीज पर संदेह करना एक समस्या है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि हर चीज पर संदेह नहीं किया जा सकता और चुनाव प्रकिया की अपनी गरिमा होती है।

पत्नी की प्रॉपर्टी पर पति का कोई हक नहीं बनता : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत के अनुसार, पत्नी के ‘स्त्रीधन’ पर पति का कोई अधिकार नहीं बनता। दूसरे शब्दों में, पत्नी की प्रॉपर्टी पर पति को किसी तरह का हक हासिल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मुसीबत के वक्त में पति जरूर पत्नी की संपत्ति (स्त्रीधन) का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन बाद में उसे पत्नी को लौटा देना पति की नैतिक दायित्व बनता है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने कहा कि ‘स्त्रीधन’ प्रॉपर्टी शादी के बाद पति और पत्नी की साझा संपत्ति नहीं बन जाती। पति का उस संपत्ति पर किसी तरह का मालिकाना हक नहीं बनता।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी आपसी विश्वास पर टिकी होती है।सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की।अदालत एक महिला की याचिका सुन रही थी जिसके पति ने उसे मायके से मिला सोना रख लिया था।कोर्ट ने आदेश दिया कि सोने के बदले पति अपनी पत्नी को 25 लाख रुपये अदा करे।

पढ़ें, ‘स्त्रीधन’ पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले की 5 बड़ी बातें।
क्या था मामला: महिला के मुताबिक, शादी के वक्त उसे अपने परिवार से सोने के 89 सिक्के गिफ्ट में मिले थे। शादी की पहली रात को ही पति ने पत्नी की सारी ज्वेलरी ले ली। गहने सुरक्षित रखने के नाम पर अपनी मां को सौंप दिए।महिला का आरोप है कि उसके पति और सास ने गहनों में हेरफेर किया।अपने कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने महिला के गहने बेच दिया. शादी के बाद, महिला के पिता ने उसके पिता को 2 लाख रुपये का चेक भी दिया था।

कोर्ट में पहुंचा मामला: 2011 में फैमिली कोर्ट ने पाया कि पति और उसकी मां ने महिला के सोने का गबन किया था।कोर्ट ने कहा कि महिला को जो नुकसान हुआ, वह उसकी भरपाई की हकदार है।पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ केरल हाई कोर्ट में अपील दायर की।HC ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलट दिया।कहा कि महिला यह साबित नहीं कर पाई कि उसके पति और सास ने गहनों से छेड़छाड़ की थी।इसके बाद महिला सुप्रीम कोर्ट चली गई।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा: जस्टिस खन्ना और जस्टिस दत्ता की बेंच ने साफ कहा कि ‘स्त्रीधन’ पति-पत्नी की साझा संपत्ति नहीं है। पत्नी की संपत्ति पर पति का कोई अधिकार नहीं बनता। अदालत ने कहा, ‘पति का उसकी (पत्नी) स्त्रीधन संपत्ति पर कोई नियंत्रण नहीं है। वह मुसीबत के समय इसका इस्तेमाल कर सकता है लेकिन उसे वापस करना पति का नैतिक दायित्व है।’

‘स्त्रीधन क्या होता है: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘शादी से पहले, शादी के दौरान और विदाई या उसके बाद महिला को उपहार में मिली संपत्तियां उसका ‘स्त्रीधन’ होती हैं।यह उसकी पूर्ण संपत्ति है और वह अपनी इच्छानुसार इसका जो चाहे कर सकती है।’

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: शीर्ष अदालत ने कहा कि महिला ने 89 सोने के सिक्कों के बदले में रुपयों की वसूली के लिए सफलतापूर्वक कार्रवाई शुरू की है। साल 2009 में इनका मूल्य 8.90 लाख रुपये था। बेंच ने कहा, ‘इस दौरान फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखना, बिना किसी अतिरिक्त बात के, उसके साथ अन्याय होगा। समय बीतने, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और समानता तथा न्याय के हित को ध्यान में रखते हुए, हम संविधान के अनुच्छेद 142 द्वारा दी गई शक्ति का प्रयोग करते हुए अपीलकर्ता को 25,00,000 रुपये की राशि प्रदान करना ठीक समझते हैं।’

पटना में लगी आग ; 5 की मौत, 15 झुलस गए

Firefighters douse a fire which broke out in a restaurant and hotel near the Patna Junction railway station, in Patna, Bihar, India, Thursday, April 25, 2024. (AP Photo/Aftab Alam Siddiqui)

बिहार:पटना राजधानी में रेलवे जंक्शन के पास एक होटल में गुरुवार को भीषण आग लग गई है। यहां वीना हॉल के पास बने मार्केटिंग परिसर में आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठ रही हैं।इस अग्निकांड में पांच लोगों की जलकर मौत हो गई है। पन्द्रह लोग झुलस गए हैं। जबकि 35 लोगों को रेस्क्यू कर बचाया गया है।आग पर काबू पाने के लिए दमकल की गाड़ियां मौके पर जुटी हुई हैं।वहीं अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है।

बताया जा रहा है कि जिस वक्त होटल में आग लगी, उस वक्त कई लोग अंदर मौजूद थे।आनन-फानन में क्रेन की मदद से अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं आग की लपटों की चपेट में आसपास के कई बिल्डिंग भी आ गए हैं।मौके पर फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। इधर, रेस्क्यू में लगे हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संभवतः होटल के अंदर गैस सिलेंडर विस्फोट से आग लगी है।पूरी तरह आग पर काबू पाने के बाद इसकी जांच की जाएगी। पांच लोगों की मौत हो चुकी है ।15 लोग झुलसकर घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।35 लोगों को रेस्क्यू कर बचाया गया है और भी लोगों की बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

अखिलेश यादव ने कन्नौज से दाखिल किया नामांकन

**EDS: HANDOUT IMAGE** Kannauj: Samajwadi Party (SP) chief and former Uttar Pradesh chief minister Akhilesh Yadav files his nomination for Lok Sabha elections, in Kannauj, Thursday, April 25, 2024. Party leader Ram Gopal Yadav is also seen. (PTI Photo)(PTI04_25_2024_000062B)

कन्नौज : समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव नामांकन दाखिल करते समय अखिलेश के साथ थे।अखिलेश यादव 2000-2012 तक लोकसभा सांसद रहे।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2012 में कन्नौज संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया।2017 में उनकी पार्टी यूपी में सरकार नहीं बना पाई और उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।वह 2019 में लोकसभा सांसद चुने गए और 2022 में यूपी विधानसभा के लिए चुने गए। यूपी विधानसभा चुनावों के बाद, यादव ने लोकसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी राज्य विधानसभा सीट बरकरार रखी। कन्नौज सीट पर लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 13 मई को मतदान होगा। वहीं अखिलेश यादव ने अपने जीत का दावा किया है।

बिहार में जेडीयू नेता की गोली मारकर हत्या

पटना: बिहार में राजनीतिक हिंसा का एक और दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है, जहां जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के युवा नेता सौरभ कुमार को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इस घटना के पीछे की जानकारी के अनुसार, देर रात पटना के पुनपुन क्षेत्र में सौरभ कुमार अपने दोस्तों और परिवार के साथ शादी समारोह से लौट रहे थे। उन्हें उनके रास्ते में चार अज्ञात लोगों ने बाइक से घेर कर गोलियां चला दी, जिससे सौरभ कुमार की मौत हो गई।

सौरभ कुमार के साथ ही एक और व्यक्ति मुनमुन कुमार भी घायल हुए हैं और उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों को कंकड़बाग उमा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने पटना-गया मार्ग को जाम कर दिया और जेडीयू के समर्थकों ने मौके पर जमकर प्रशासन से त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने इस मामले में कड़ी जाँच शुरू की है और हत्यारोपियों की तलाश में है। एसपी भरत सोनी ने बताया कि हमलावरों तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, और राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों सहित सभी कोणों की जांच की जा रही है।