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पर्रिकर नाजुक, भाजपा नेता का दावा

यदि गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष माइकल लोबो की बात सही है तो मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर की हालत नाजुक है। लोबो ने सोमवार को कहा – ”सीएम पर्रीकर की हालत बेहद नाजुक है और उनका जीवन भगवान भरोसे है।” लोबो ही वो नेता हैं जिन्होंने खराब सेहत पर पर्रीकर से सीएम पद छोड़ने की मांग की थी।

रिपोर्ट्स  लोबो ने  मीडिया से बातचीत में कही। लोबो के मुताबिक ”पर्रीकर जिस दिन सीएम पद से हटेंगे या फिर उनके साथ कुछ अप्रत्याशित होगा, वैसे ही राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो जाएगा।” गौरतलब है कि  अग्नाशय संबंधी बीमारी से पीड़ित पर्रीकर आजकल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हैं। वैसे अस्पताल के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है।

हालांकि, वरिष्ठ भाजपा नेता लोबो, जो विधानसभा के उपध्यक्ष हैं ने कहा  –  ”पर्रीकर जिस रोग से पीड़ित हैं उसका कोई इलाज नहीं। जब तक वह सीएम  की कुर्सी पर हैं तब तक कोई राजनीतिक संकट नहीं है। हालांकि जिस दिन वह स्वास्थ्य के चलते इस पद से हटेंगे या फिर उनके साथ कुछ अप्रत्याशित होता है तो राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हो जाएगा।”
हालांकि इस दौरान उन्होंने साफ किया कि ”पर्रीकर अभी जीवित हैं और भगवान भरोसे जिंदा हैं।” गौरतलब है कि ३८ सदस्यीय गोवा विधानसभा में हमेशा सत्ता संघर्ष रहा है और दोनों के १४-१४ विधायक हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को गोवा फारवर्ड के एक और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के दो विधायकों के अलावा दो निर्दलीय और एक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विधायक का समर्थन है।

माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी

आखिर भगोड़े घोषित किये विजय माल्या के प्रत्यर्पण की मंजूरी ब्रिटिश सरकार ने दी है।  उसे अपील करने के लिए १४ दिन का वक्त दिया गया है।  माल्या भाजपा सरकार के ही समय बैकों के साथ फर्जीवाड़े के बाद लन्दन भाग गया था।
माल्या कानूनी नियमों का सहारा लेते हुए लन्दन में रहने की कोशिश कर रहा था।  हालाँकि ब्रिटिश सरकार ने उसके प्रत्यार्पण को मजूरी देकर उन्हें झटका दिया है। प्रत्यर्पण को मंजूरी मिलने के बाद माल्या को लंदन की सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए १४ दिन का समय मिला है।
ब्रिटिश सरकार की ओर से माल्या के प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर इसे मोदी सरकार की बड़ी सफलता बताते हुए विपक्ष का हमला किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार माल्या को भारत लाने के रास्ते में एक और कदम आगे बढ़ चुकी है। जबकि दूसरी तरफ शारदा चिटफंड के घोटालेबाजों को बचाने के लिए विपक्ष लामबंदी कर रहा है।
गौरतलब है कि माल्या नौ हजार करोड़ का बैंकों का कर्ज़दार है। उसके खिलाफ १८ अप्रैल, २०१६ को गैर जमानती वारंट जारी किया गया था हालांकि वह इससे पहले मार्च के महीने में ही देश छोड़कर फरार हो गया था। माल्या पर शिकंजा कसने के लिए भारत सरकार की ओर से तमाम कोशिशें की गईं। उनको कोशिशों में ही उसे २०१८ में आर्थिक भगोड़ा घोषित किया गया था।

ईवीएम को लेकर आयोग से मिले विपक्षी दल

ईवीएम पर मचे घमासान के बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता सोमवार को दिल्ली में चुनाव आयोग से मिले। विपक्षी दलों ने साझे रूप से मांग रखी कि ईवीएम मशीनों के मतों का ५० प्रतिशत वीवीपैट मशीनों की पर्ची से मिलान किया जाना ज़रूरी किया जाये।

विपक्षी नेताओं ने आम चुनाव में ईवीएम की विश्वसनीयता का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से कहा कि ईवीएम में हरसंभव पारदर्शिता कायम रखी जाए। चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा –  ”कुछ राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल आज चुनाव आयोग से मिला। आयोग ने प्रतिनिधियों की वीवीपैट संबंधी मांगों को सुना और आश्वस्त किया कि उनके उठाए गए मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

चुनाय आयुक्त से मुलाकात के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद  ने पत्रकारों को बताया – ”आयोग ने हमें भरोसा दिलाया है कि इस मुद्दे पर एक समिति गठित की है और इसकी रिपोर्ट आम चुनाव से पहले आएगी, जिसे प्रकाशित किया जाएगा।” आयोग से मिलने वालों में आज़ाद के अलावा  मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल, टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू, एनसीपी के माजिद मेमन, एसपी के रामगोपाल यादव, बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा, आरजेडी के मनोज झा, माकपा के मोहम्मद सलीम, भाकपा के डी राजा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और आप के संजय सिंह और अन्य दलों के नेता शामिल थे।नेताओं ने अरोड़ा से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का ज्ञापन सौंपा। इस पर लोकसभा और राज्यसभा में २३ विपक्षी दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं।

कांग्रेस नेता आजाद ने बताया कि तमाम दलों ने पहले मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की थी लेकिन अगले लोकसभा चुनाव में कम समय होने के कारण सभी दलों ने आयोग के समक्ष यह मांग पेश नहीं की। ”विपक्षी नेता चाहते हैं कि ईवीएम में हरसंभव पारदर्शिता कायम रखी जाए।”

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि सभी दलों की सहमति से आयोग के समक्ष ईवीएम की विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए हर राज्य में आधे मतदान केंद्रों पर ईवीएम के मतों का वीवीपैट की पर्चियों से मिलान करने का सुझाव पेश किया गया। कांग्रेस के नेता ने कहा कि विपक्ष के सभी नेताओं को पूरा विश्वास है कि चुनाव आयोग लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए मतदाताओं का मत उनकी मर्जी के उम्मीदवार को ही मिले, यह व्यवस्था कायम रखेगा।

महाराष्ट्र के सीएम को जान से मारने की धमकी देने वाला पुलिस अरेस्ट । देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद।

महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर देवेंद्र फडणवीस जान से मारने  की धमकी देनेवाला पंकज कुंभार नामक शख्स पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पंकज ने सीएम समेत कई लोगों को खत्म करने की चेतावनी अपने फेसबुक पेज के ज़रिए दी थी। फेसबक पर पंकज ने खुद को अजमल कसाब बताते हुए पोस्ट किया था,

आई एम अजमल कसाब, कल अजित दादा बच गया। अब सातारा में सीएम मरेगा। 26/11 आतंकवादी हमले जैसा ऑपरेशन अब सातारा में होगा।सीएम और 40000 लोग खल्लास। 4 फरवरी 2019, खंडाला, सतारा।

 सीएम को मिली इस धमकी के बाद पुलिस ने सीएम की सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी और जिस व्यक्ति के फेसबुक से यह पोस्ट किया था, खंगालते हुए पंकज तक पहुंच गई।

सत्ता मिलते ही बीजेपी लोकपाल और लोकायुक्त को भूल गई‌ । सरकार पर विश्वास नहीं अनशन जारी – अन्ना हजारे

भूख हड़ताल पर बैठे वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने आज राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उन पर कोई विश्वास नहीं रहा। पत्रकारों से बातचीत में अन्ना ने कहा,’मुझे सरकार पर कोई भरोसा नहीं है! न ही महाराष्ट्र की सरकार पर और न ही केंद्र की सरकार  पर।राज्य सरकार साफ़ साफ़ झूठ बोल रही है  अगर सरकार ने मेरी 90 % मांगे मान ली होती तो मैं भला क्यों भूख हड़ताल पर बैठता?’

अन्ना ने कहा कि उन्हें सूचना दी जा रही है कि मुख्यमंत्री और केंद्र के मंत्री उनसे मिलने आ रहे हैं लेकिन वह नहीं चाहते कि यह लोग उनसे मिलने आएं और लोगों में भ्रम निर्माण हो।

‘ मैं उनसे गुजारिश करूंगा कि अगर वह मुझसे वाकई मिलना चाहते हैं तो ठोस निर्णय  करके आए लिखित स्वरूप में लाए कि उन्होंने हमारी कौन सी मांगे मानी हैं और कौन सी नहीं। उसके बाद हम तय करेंगे ‘अन्ना ने स्पष्ट किया!

यह पूछने पर कि क्या वह उनसे मिलने आए राज ठाकरे की अनशन रोकने की गुजारिश को मानेंगे? अन्ना ने कहा कि जब तक उनकी मांगे मान ली नहीं जाती तब तक वह अनशन पर टिके रहेंगे ।ईश्वर उनके साथ है और आने वाले 5 दिनों तक वह अन कर सकते हैं और जब तक  उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

अन्ना नहीं मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर जो आंदोलन शुरू हुआ था उसी की वजह से मोदी सरकार सत्ता तक पहुंची लेकिन सत्ता में आने के बाद लोकपाल और लोकायुक्त को मोदी सरकार अपनी सुविधानुसार भूल गए। अन्ना ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी देश को तानाशाही की ओर ले जा रहे हैं ।मोदी सरकार और फडणवीस सरकार जनता के बीच गलतफहमी पैदा कर रही है।  उन्होंने कहा सत्ता परिवर्तन नहीं अब व्यवस्था परिवर्तन होना चाहिए। सीएम फडणवीस के बारे में अन्ना ने कहा, ‘ मुझे लगा था कि वह एक अच्छे मुख्यमंत्री हैं लेकिन वे अपने बोले हुए शब्दों पर कायम नहीं रहते ।अब मुझे उन पर विश्वास नहीं रहा’

पीएम मोदी ममता से बात करें : शिव सेना

भाजपा की सहयोगी शिव सेना ने एक बार फिर उसे चोट दी है। शिव सेना के नेता संजय राउत ने दिल्ली में कहा कि सीबीआई के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है। उनके इस ब्यान को भाजपा के लिए बड़ा झटका कहा जा रहा है।

संसद की कार्यवाही के बाद राज्य सभा सदस्य संजय ने कहा कि ”सीबीआई के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है।” उन्होंने कहा कि यह मामला सीबीआई बनाम बंगाल पुलिस का नहीं है, बल्कि भाजपा बनाम टीएमसी का है।

राउत ने कहा – ”मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीएम ममता बनर्जी से बात करना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री सिर्फ किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं।”

उन्होंने कहा कि अगर एक बड़े राज्य की मुख्यमंत्री धरने पर बैठे तो समझना चाहिए कि मामला गंभीर है। हम खुद भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह मामला सीबीआई बनाम ममता बनर्जी है या ममता बनर्जी बनाम बीजेपी है। ”अगर सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है तो यह मामला देश की गरिमा और एजेंसियों की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा करता है।”

कोलकाता पुलिस आयुक्त हाई कोर्ट गए

कोलकाता में रविवार को सीबीआई-पुलिस विवाद के बाद सर्खियों में आये  कोलकाता के पुलिस आयुक्‍त राजीव कुमार ने सीबीआई पूछताछ के खिलाफ कलकत्‍ता हाई कोर्ट के द्वार खटखटाये हैं। उन्‍होंने हाई कोर्ट से सीबीआई पूछताछ से अंतरिम राहत मांगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कलकत्‍ता हाई कोर्ट राजीव कुमार की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है और इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी। इससे पहले कोलकाता पुलिस के चार अधिकारी कलकत्‍ता हाई कोर्ट पहुंचे थे। इन अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ऐसे समय पर उन्‍हें नोटिस भेज रही है जब सारदा घोटाले में जांच जारी है।

इन पुलिस अधिकारीयों ने कहा कि सीबीआई उन्‍हें प्रताड़‍ित कर सकती है, इसलिए उन्‍हें पूछताछ से राहत दी जाए। इन्‍ही अधिकारियों की तर्ज पर कोलकाता पुलिस के आयुक्‍त राजीव कुमार ने भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सीबीआई भी सोमवार को ममता सरकार और राजीव कुमार को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँची है। कोलकाता में भी कोलकाता पुलिस आयुक्‍त और सीबीआई के बीच जारी जंग हाई कोर्ट में पहुंच गई है।

सीबीआई का एक्शन गलत : सिंघवी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पुलिस कमिश्नर के घर रविवार शाम ३५ अफसरों की सीबीआई टीम के धावे पर राजनीति उफान पर है। वरिष्ठ वकील और कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता उच्च न्यायालय का आदेश बताते हुए सीबीआई के एक्शन को गलत ठहराया है।

सिंघवी के मुताबिक सारदा चित फण्ड घोटाले के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगर प्रदेश की पुलिस को सीबीआई की पूछताछ पर कोई आपत्ति है तो वह कलकत्ता हाई कोर्ट जा सकते हैं। सिंघवी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद ही बंगाल पुलिस के अफसर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें आतंरिक सुरक्षा मिल गई।

वरिष्ठ वकील के मुताबिक कलकत्ता हाई कोर्ट का यह आदेश अभी तक चल रहा है। निजी चैनल आज तक को दिए इंटरव्यू में सिंघवी ने कहा कि अगर सीबीआई टीम को ऐसा करना था तो पहले कलकत्ता हाई कोर्ट से स्पष्टीकरण या संशोधित आदेश लेना था। ”लेकिन सीबीआई ने ऐसा नहीं किया।”

सिंघवी ने दावा किया कि सीबीआई का यह एक्शन न सिर्फ गलत है, बल्कि कोर्ट की अवमानना भी है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि खुद राजीव कुमार इस मसले पर हाई कोर्ट नहीं पहुंचे थे, लेकिन उनके साथ काम करने वाले अफसरों ने हाई कोर्ट में अपील की थी। सिंघवी ने यह भी बताया कि राजीव कुमार कोई आरोपी या अभियुक्त नहीं हैं, उन्हें सिर्फ गवाह के तौर पर नोटिस गया है।

इससे पहले सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने कहा था कि कुमार को कई बार सूचित किया गया था लेकिन वे मामले में सहयोग नहीं कर रहे थे।

राज्यपाल ने भेजी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने राज्य में सीबीआई-पुलिस विवाद से जुडी रिपोर्ट केंद्र को भेज दी है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सुबह उनसे यह रिपोर्ट तलब की थी। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए देश भर के विपक्षी नेताओं का समर्थन बढ़ता जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलकाता में पश्चिम बंगाल पुलिस और सीबीआइ के बीच चल रहे विवाद पर राज्यपाल केसरीनाथ ने रविवार को सीबीआई-पुलिस  विवाद पर पूरा घटनाक्रम भेज दिया है। यह मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पहुँच चूका है। भाजपा के एक वर्ग में यह मांग जोर पकड़ रही है कि ममता सरकार  को बर्खास्त कर दिया जाये।

उधर सीएम ममता बनर्जी के धरने को देश भर के विपक्ष का समर्थन मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्रियों, सीएम और विभिन्न राजनीतिक दलों ने उनको समर्थन का ऐलान कर दिया है। अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चूका है और भाजपा भी इस मामले में सावधानी वरतने की कोशिश कर रही है।

सोमवार को भाजपा ने अपने दो मंत्रियों प्रकाश जावेड़कर और रविशंकर प्रसाद को ममता बनर्जी और कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतारा। दोनों ने प्रेस कांफ्रेंस करके ममता और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला।

तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर संसद में सोमवार को हंगामा किया। अब लोक सभा को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। संसद में  अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आरोपित को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। सीबीआइ अपना काम कर रही थी लेकिन उसको अपना काम करने से रोका गया।

उधर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी पूरी तरह मैदान में उतर  गयी है। टीएमसी के नेताओं ने ममता को ”झांसी की रानी” बताते हुए उनके एक्शन का समर्थन किया है। पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार सीबीआई और अन्य संस्थाओं के राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए इस्तेमाल कर रही है। ममता ने भी कल यही आरोप लगाए थे। उनका धरना सोमवार को भी जारी है।

अन्ना से मिले राज ठाकरे भूख हड़ताल रोकने की गुजारिश। कहा मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए साथ हैं ।

लोकपाल नियुक्ति और किसानों के हित में मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे वरिष्ठ समाज सेवक अन्ना हजारे को मिलने आज एमएनएस चीफ राज ठाकरे पहुंचे । अनशन के छठवें दिन अन्ना की बिगड़ती सेहत को देखते हुए राज ठाकरे ने उन्हें अपनी जिंदगीन खेलने का निवेदन किया और आश्वासन दिया कि इस सरकार को गाढ़ने में वे उनके साथ हैं।

राज ने कहा कि मोदी सरकार निर्दयी है पीएम द्वारा अनशन के लिए शुभकामनाएं भेजना बेशर्मी है। अन्ना मरे या जिए इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।
दिल्ली के चीफ मिनिस्टर और अन्ना के पुराने सहयोगी अरविंद केजरीवाल पर भी तंज कसते हुए राज ने कहा कि केजरीवाल जो भी है आज अन्ना की वजह से है और उन्हें अन्ना को मिलने आना चाहिए था लेकिन वह अभी तक नहीं आए।
इसके पूर्व शिव सेना चीफ और राज ठाकरे के कजिन उद्धव ठाकरे नेवी ने भी अन्ना हजारे से अनशन रोकने की गुजारिश की थी ।उन्होंने कहा था अन्ना को अ्पनी जिंदगी का ख्याल रखना चाहिए और भ्रष्टाचार खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाना चाहिेए।उद्धव ने  मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा था सरकार द्वारा नजरअंदाज किए जाने के चलते ही गंगा को स्वच्छ करने के लिए भूख हड़ताल कर रहे प्रोफेसर अग्रवाल ने अपनी जान गंवा दी थी लेकिन सरकार के कान पर जूं भी नही रेंगी।