नेपाल में शांति होगी तभी भारत में शांति बनी रहेगी’

ऐसा नहीं है. कई मसलों पर उनकी हमसे सैद्घांतिक सहमति है. जैसे हम जिस राजनीतिक व्यवस्था और संविधान की बात करते हैं, वे उससे काफी हद तक सहमत हंै. हम जिस आनुपातिक प्रतिनिधित्व की बात करते हैं उसमें दलित, महिलाएं और अन्य शोषित अस्मिताओं का पूरा स्थान और सम्मान है. यूएमएल और एनसी प्रक्रिया के नाम पर प्रगतिशील और लोकतांत्रिक संविधान के खिलाफ खड़े हैं. मधेसियों समेत सभी नई राजनीतिक शक्तियां संघवाद और सर्व समावोशी लोकतंत्र  के पक्ष में हैं जबकि पुरानी राजनीतिक पार्टिया बदलाव नहीं चाहती हैं. हमारा मधेसियों से कोई बड़ा मतभेद नहीं है. जाति के मसले पर हम खासे संवेदनशील हैं.

अगर गतिरोध बना रहा तो क्या आप वापस जनयुद्घ छेड़ेंगे?

नहीं, आज के हालत के मद्देनजर जनयुद्घ छेड़ने का कोई औचित्य नहीं है. जनता की चेतना आज वर्ष 2००० के स्तर पर नहीं खड़ी है वह आगे आ चुकी है. नई वैचारिक ऊंचाई पर पहुंच चुकी है. अब पहले जैसे जनयुद्घ या रणनीति की बजाय निर्माण की नई योजनाओं व जनसंघर्ष को अंजाम देना होगा. आज प्रतिगामी शक्तियों को शांतिपूर्ण तरीकों से भी हराया जा सकता है. इसके अलावा यह भी समझना होगा कि हमारी राजनीतिक सोच आज वहां नहीं खड़ी जहां वह नब्बे के दशक में थी.

क्या यही वजह है कि आपकी पार्टी में भी भारतीय वाम पार्टियों की तरह टूट हो रही है.

कुछ टूट तो हुई है. बिखराव आया है. पर नेपाली माओवादियों का हर धड़ा शांति प्रक्रिया में हमारे मूलभूत सिद्घांतों से मौटे तौर पर सहमत है. वह भी सर्व समावेशी लोकतंत्र की ही वकालत करते हैं. मुझे उम्मीद है कि हम अपने अन्य मतभेद भी सुलझा लेंगे. असली परेशानी तो एनसी और यूएमएल की ओर से है.

पर एनसी और यूएमएल तो आप लोगों पर शांति प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाते हैं.

देखिए, तथ्य तो यह है कि वो हम ही थे जो राजतंत्र के खिलाफ लड़े और आज भी उसके खिलाफ जन भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. एनसी और यूएमएल तो राजतंत्र को कमोबेश स्वीकारने को पहले से तैयार हैं. इस पृष्ठभूमि में देखेंगे तो साफ नजर आएगा कि शांति प्रक्रिया आज जहां तक और जिस स्तर पर पहुंची है वह माओवादियों के कारण है. रुकावट हमने नहीं उन्होंने खड़ी कर रखी हैं, पूर्व समझौतों का पालन न करके. इसके अतिरिक्त प्रक्रिया और विषयवस्तु में विषयवस्तु ज्यादा अहम है. संविधान सभा, मूलत: इस विषयवस्तु का प्रतिनिधित्व करनेवाले समग्र शांति समझौते को लागू करने का एक प्रभावी तरीका और व्यवस्था है. इसी सोच के साथ इसकी स्थापना की गई थी. पर आज एनसी इस मसले पर वादा खिलाफी कर रही है और यूएमएल उसके साथ है. हम वैकल्पिक राजनीति स्थापित करना चाहते हैं और वो पुरानी पड़ चुकी राजनीति की तरफ जनता को ले जाना चाहते हैं.

भारत में आम आदमी पार्टी भी वैकल्पिक राजनीति की बात करती है. माओवादियों और आम आदमी पार्टी की वैकल्पिक राजनीति में अंतर और समानताएं क्या हैं

अंतर या समानताओं पर कुछ कहना तो जल्दबाजी होगी. हम लोग तो अभी नई राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की कोशिश ही कर रहे हैं. जैसा मैंने कहा कि मेरी यात्रा का मकसद ताजा हालत का अध्ययन करना भी था. नेपाल में हम  वैकल्पिक लोकतंत्र की वकालत कर रहे हैं जो वैकल्पिक राजनीति का एक मॉडल ही माना जाएगा. हां हमारे इस मॉडल में और आम आदमी पार्टी की सोच में कुछ अंतर तो अवश्य है.  लेकिन इतना है कि हम दोनों ही पुरानी व्यवस्था का अपने तरीकों से विरोध कर रहे हैं.

वैकल्पिक राजनीति की आपकी परिभाषा क्या है?

पारंपरिक लोकतांत्रिक राजनीति मूलतः कुछ लोगों के हाथ में है. खासकर अमीर और ताकतवर ही इसका उपभोग करते हैं. इन तत्वों ने राजनीति और लोकतंत्र के अर्थों को सीमित और कमजोर बना दिया है. यह एक प्रकार का औपचारिक लोकतंत्र है. नेपाल की आम जनता की इसमें भागीदारी नहीं के बराबर है. इसीलिए हमने जनयुद्घ छेड़ा था. सच्चा जनवादी लोकतंत्र स्थापित करना हमारा लक्ष्य है. संविधान सभा के जरिए हम इसे संस्थागत स्वरूप देना चाहते हैं. वैकल्पिक राजनीति से हमारा आशय जनवादी लोकतंत्र की स्थापना है. ‘आप’ ने अपने तरीकों से हमारा ध्यान जरूर खींचा है. पर अभी हम इसे ठीक से समझना चाहते हैं. प्रत्यक्ष लोकतंत्र और सीधी भागीदारी के अंतर को स्पष्ट करना आवश्यक है. हम नेपाल में शोषित राष्ट्रीयताओं, दलितों और महिलाओं आदि की भागीदारी सिर्फ सरकार के सहयोग के रूप में नहीं बल्कि व्यवस्था निर्माण और संचालन में उनकी भूमिका सुनिश्चित करना चाहते हैं. इसीलिए हम आनुपातिक प्रतिनिधित्व की वकालत कर रहे हैं.

नेपाल को मौजूदा संकट से निकालने का क्या तरीका होगा?

देखिए, सभी राजनीतिक शक्तियों को समग्र शांति समझौता लागू करने से ही समाधान निकलेगा. अगर ऐसा नहीं होगा तो हम जनता के बीच वापस जाएंगे. जनता ही समाधान निकालेगी.

अंत में चीन और भारत में आपकी प्राथमिकता में कौन है?

हम इस सवाल को प्राथमिकता की नजर से नहीं देखते हैं. हमारे लिए दोनों देश करीबी हंै. भारत एक उभरती विश्व शक्ति है. हम भारत और चीन दोनों से सहयोग करने को तैयार हैं, और यह सुनिश्चित कर देना चाहते हैं कि हमारी सीमाओं का पड़ोसी देशों के खिलाफ इस्तेमाल न हो. खासकर भारत के साथ तो हम हर हाल में शांति और समृद्घि की कामना करते हैं.

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