Impact of Iran War: पेट्रोल संकट से घबराया पाकिस्तान, सरकार ने कसी लगाम

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता नहीं हो पाने का असर अब पाकिस्तान पर भी साफ दिखने लगा है। तेल सप्लाई और बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने पूरे देश में चल रहे मितव्ययता अभियान को एक महीने और बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार ने ईंधन बचाने और खर्च कम करने के लिए कई कड़े कदम लागू किए हैं।

पेट्रोल संकट से घबराया पाकिस्तान... | Image Source: Hindustan Hindi News
पेट्रोल संकट से घबराया पाकिस्तान... | Image Source: Hindustan Hindi News

नई दिल्ली: Pakistan की शहबाज शरीफ सरकार ने देशभर में लागू मितव्ययता अभियान को 13 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म नहीं हो पा रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया था, जिसके बाद पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा अनिश्चित हो गए।

दरअसल, पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भर है। ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने पहले मार्च में दो महीने के लिए खर्च कम करने वाले कई नियम लागू किए थे, जिन्हें अब आगे बढ़ा दिया गया है।

सरकार की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक सरकारी गाड़ियों के ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत तक कटौती की गई है। हालांकि एम्बुलेंस और सार्वजनिक बसों जैसी जरूरी सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा करीब 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला भी जारी रहेगा।

इतना ही नहीं, सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी सख्त रोक लगा दी गई है। केवल उन्हीं यात्राओं की अनुमति होगी जिन्हें देश के हित में बेहद जरूरी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में ईंधन बचाना और गैरजरूरी खर्च कम करना बेहद जरूरी हो गया है।

पाकिस्तान में पहले से ही महंगाई बड़ी समस्या बनी हुई है। अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान अब उन देशों में शामिल हो गया है जहां पेट्रोलियम उत्पाद काफी महंगे हो चुके हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।