₹2.78 करोड़ की रिश्वत के मामले में पूर्व सीएम पिनराई विजयन, बेटी और दामाद के खिलाफ एफआईआर

ईडी की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट का सीधे केस दर्ज करने का निर्देश; प्रारंभिक जांच की राज्य सरकार की दलील खारिज की, मामला सीएमआरएल से एक्सालॉजिक को बिना सेवा के भुगतान से जुड़ा

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
केरल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केरल हाईकोर्ट ने कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े कथित रिश्वत मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके दामाद पी.ए. मोहम्मद रियाज़ के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने अधिवक्ता केएम शाहजहां की याचिका स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने उस दलील को स्वीकार नहीं किया कि एफआईआर से पहले राज्य पुलिस को प्रारंभिक जांच करनी जरूरी है।

मामला करीब 2.78 करोड़ रुपये के कथित भुगतान से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि सीएमआरएल ने वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को आईटी परामर्श सेवाओं के नाम पर यह रकम दी, जबकि जांच में इन सेवाओं के वास्तविक रूप से उपलब्ध कराए जाने पर सवाल उठे। आयकर विभाग के बाद कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और ईडी की जांच में भी इन लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।

कोर्ट में असली विवाद- एफआईआर या पहले प्रारंभिक जांच?

इस मामले में हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि ईडी की ओर से राज्य पुलिस को दी गई रिपोर्ट के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकती है या पुलिस को पहले प्रारंभिक जांच करनी होगी? राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि ईडी की रिपोर्ट अपने आप में एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है और पहले प्रारंभिक जांच जरूरी है। दूसरी ओर याचिकाकर्ता केएम शाहजहां का कहना था कि जब जांच एजेंसी ने कथित अपराध से जुड़े तथ्य और सामग्री राज्य पुलिस को उपलब्ध करा दी है तो पुलिस को प्रारंभिक जांच के नाम पर एफआईआर टालनी नहीं चाहिए।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील स्वीकार करते हुए सीधे एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।

ईडी की इस रिपोर्ट में आखिरकार और क्या आरोप हैं?

ईडी ने सितंबर में केरल के पुलिस महानिदेशक को विस्तृत रिपोर्ट भेजकर पिनराई विजयन, वीणा और मोहम्मद रियाज़ समेत अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। एजेंसी की जांच सीएमआरएल-एक्सालॉजिक लेन-देन से जुड़े धनशोधन मामले का हिस्सा है। ईडी का आरोप है कि सीएमआरएल ने एक्सालॉजिक को आईटी कंसल्टेंसी के नाम पर 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि कंपनी की ओर से संबंधित सेवाएं दिए जाने का पर्याप्त रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को नहीं मिला। यही भुगतान बाद में कथित अवैध भुगतान और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का आधार बना। ईडी ने दावा किया कि उसे धन के कथित हवाला मार्ग से स्थानांतरण से संबंधित सामग्री भी मिली है।

सीएमआरएल से एक्सालॉजिक तक कैसे पहुंचा मामला?

इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब आयकर विभाग की जांच में सीएमआरएल और एक्सालॉजिक के बीच हुए वित्तीय लेन-देन सामने आए। बाद की जांच में यह सवाल उठा कि सीएमआरएल ने एक आईटी कंपनी को नियमित भुगतान क्यों किया और उसके बदले वास्तविक सेवाएं क्या मिलीं।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच में भी एक्सालॉजिक और सीएमआरएल के बीच हुए समझौतों तथा भुगतान पर सवाल उठाए गए। जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार एक्सालॉजिक को कंसल्टेंसी के लिए भुगतान किया गया, लेकिन जांचकर्ताओं को उसके काम के अपेक्षित दस्तावेज या परिणाम नहीं मिले। इससे पहले के न्यायिक रिकॉर्ड में भी सीएमआरएल से जुड़ी कंपनियों को भुगतान और सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने के आरोप दर्ज हुए हैं।

इस मामले में केरल सरकार ने पहले क्या किया था?

ईडी की रिपोर्ट मिलने के बाद केरल की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय पुलिस स्तर पर प्रारंभिक जांच का रास्ता चुना था। सरकार की ओर से दलील थी कि ईडी की रिपोर्ट के आधार पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज करने से पहले तथ्यों की प्राथमिक जांच जरूरी है। यही फैसला बाद में हाईकोर्ट में चुनौती बना। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उपलब्ध सामग्री को देखते हुए प्रारंभिक जांच के बजाय सीधे एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य पुलिस के सामने मामले को औपचारिक आपराधिक जांच में आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।

विजयन परिवार ने किया ईडी के आरोपों से इनकार

पिनराई विजयन ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई आधार नहीं है। मोहम्मद रियाज़ ने भी जांच से डरने से इनकार करते हुए कहा था कि निर्दोष व्यक्ति जांच के किसी भी स्तर पर निर्दोष ही रहेगा और मामले का कानूनी तथा राजनीतिक रूप से सामना किया जाएगा। इसलिए हाईकोर्ट का ताजा आदेश एफआईआर और जांच की शुरुआत का निर्देश है, दोष सिद्ध होने का फैसला नहीं। आगे पुलिस की जांच, दर्ज होने वाली एफआईआर में धाराएं, आरोपों की जांच और उसके बाद उपलब्ध साक्ष्य इस मामले की कानूनी दिशा तय करेंगे।

अब इस मामले में आगे आपराधिक जांच शुरू होगी

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम एफआईआर का पंजीकरण और उसके बाद होने वाली आपराधिक जांच होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि सीएमआरएल से एक्सालॉजिक को किए गए भुगतान के पीछे वास्तविक सेवाएं थीं या नहीं, भुगतान की मंजूरी और प्रक्रिया क्या थी, संबंधित लोगों की भूमिका क्या रही और ईडी की ओर से सामने रखी गई सामग्री से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध के आवश्यक तत्व साबित होते हैं या नहीं। मामले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पिनराई विजयन लंबे समय तक केरल के मुख्यमंत्री रहे हैं और अब विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। हाईकोर्ट का आदेश ऐसे समय आया है जब सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले की जांच पहले ही ईडी और अन्य एजेंसियों के स्तर पर आगे बढ़ चुकी है।