एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
शेयर बाजार में हेरफेर और छोटे निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को छह शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की। मुंबई जोनल ऑफिस-I की टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में कार्रवाई की। जांच के केंद्र में आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आरएंडबी डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में भारी हेरफेर के मामले पकड़ में आए हैं।
ईडी की जांच के मुताबिक, दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप समूहों में इन कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए रोजाना संदेश भेजे गए। इन संदेशों के बाद दोनों शेयरों में खरीदारों की संख्या लगभग 3,400 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई। जांच एजेंसी के अनुसार, इन समूहों के जरिए छोटे निवेशकों को शेयर खरीदने के लिए आकर्षित किया गया।
समूह अचानक बंद, शेयरों में 70% की गिरावट
जांच में सामने आया कि 25 फरवरी 2026 को इन व्हाट्सऐप समूहों को अचानक डिलीट कर दिया गया। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट में चले गए और कुछ ही दिनों में उनकी कीमत करीब 70% गिर गई। इससे एक लाख से अधिक छोटे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। कई निवेशक ऐसे शेयरों के साथ फंस गए, जिन्हें वे बेच नहीं पा रहे थे।
सिम दूसरों के नाम पर, संचालन भावनगर से
ईडी के अनुसार, इन व्हाट्सऐप समूहों के संचालन में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड हरियाणा और मुंबई में दूसरे व्यक्तियों के नाम पर लिए गए थे, जबकि समूहों का संचालन गुजरात के भावनगर से किया जा रहा था। एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और शेयरों में कथित हेरफेर की भूमिका की जांच कर रही है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
3.5 करोड़ से ज्यादा शेयर जारी करने की जांच
ईडी की जांच में अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों की ओर से चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और परिवर्तनीय वारंट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक, इन शेयरों के लिए भुगतान की गई रकम का बड़ा हिस्सा आपस में जुड़े व्यक्तियों, कंपनियों और कर्जदाताओं के सीमित समूह से आया था। इसके बाद के महीनों में शेयरों की कीमतों को लगातार ऊपर ले जाने की कोशिश की गई, जबकि अधिकांश शेयर उन्हीं सीमित हाथों में बने रहे।
दफ्तरों, प्रमोटर्स और ब्रोकर्स फर्मों की तलाशी
ईडी ने कंपनियों के कार्यालयों, उनके प्रमोटरों के आवासों, कम कीमत पर शेयर पाने वाले व्यक्तियों, शेयर ब्रोकिंग और वित्तीय कंपनियों के कार्यालयों तथा कथित प्रचार नेटवर्क से जुड़े लोगों के ठिकानों की तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, शेयर लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं।
हजारों करोड़ के नुकसान की आशंका की पड़ताल
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी यह पता लगा रही है कि दोनों कंपनियों के शेयरों में कृत्रिम तेजी लाकर निवेशकों को किस हद तक नुकसान पहुंचाया गया और इस प्रक्रिया में किन लोगों ने लाभ कमाया? सार्वजनिक बाजार आंकड़ों के आधार पर दोनों शेयरों के उच्चतम भाव से बाद के भाव तक बाजार मूल्य में कुल मिलाकर करीब 3,800 करोड़ रुपये की सांकेतिक कमी का अनुमान निकलता है। हालांकि, इसे धोखाधड़ी की रकम या निवेशकों की प्रमाणित कुल हानि नहीं माना जा सकता। वास्तविक नुकसान का आकलन आवंटित शेयरों की कीमत, संबंधित पक्षों के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, शेयर बेचकर निकाली गई रकम और निवेशकों की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही संभव होगा।
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