सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली

सामाजिक कार्यकर्ता और सीजेपी आंदोलन का प्रमुख चेहरा, सोनम वांगचुक के अनशन ख़त्म होने के लिए जिन्होंने समझाइश कि उनमे वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा काफ़ी महत्वपूर्ण रहे। विवेक तन्खा ने केंद्र सरकार और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच संवाद कायम करने की दिशा में सक्रिय पहल की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभावनाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाते हुए बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। तन्खा ने संबंधित पक्षों से लगातार संपर्क बनाए रखा और विश्वास बहाली की दिशा में प्रयास किए। सूत्रों का कहना है कि विवेक तन्खा ने आंदोलनकारियों की चिंताओं को उचित मंच तक पहुंचाने और सकारात्मक बातचीत का माहौल तैयार करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उनके प्रयासों के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ी, जिससे गतिरोध कम करने में मदद मिली। इसके बाद सोनम वांगचुक ने विश्वास व्यक्त करते हुए अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की। अनशन समाप्त होने के अवसर पर वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि लद्दाख के भविष्य और वहां के लोगों के हितों के लिए है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार वार्ता के माध्यम से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने अपने समर्थकों का भी आभार व्यक्त किया और शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात कही। विवेक तन्खा का इस पूरे प्रकरण पर अप्रोच यह रहा कि, लोकतंत्र में संवाद से हर समस्या का समाधान निकल सकता है। किसी भी विवाद का समाधान बातचीत, विश्वास और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से हो सकता है। विवेक तन्खा और सोनम के बीच बेहतर समझदारी इस वजह से भी है कि विवेक सोनम के वकील रहे हैं। सोनम पर लगे एनएसए के मामले में विवेक अदालत में उनकी पैरवी करते रहे हैं। वह सोनम को बेहतर जानते हैं और सोनम को उनके सुझाव और सलाह पर पूरा यकीन है।
