मनोरंजन नहीं, ‘साधना’ है संगीत: डॉ. दर्डा, ‘लोकमत सुर ज्योत्सना नेशनल म्यूजिक अवॉर्ड 2026’ में सजी सुरों की महफिल

'Lokmat Sur Jyotsna National Music Award 2026' पद्मश्री सुमित्रा गुहा और पंडित लक्ष्मण कृष्णराव को संगीत जगत में उनके योगदान के लिए दिया गया। इस कार्यक्रम में मशहूर गायक कैलाश खेर ने अपनी मौजूदगी से चार चांद लगा दिए और पूरा माहौल सुरों से सराबोर हो गया...

दीप प्रज्वलित करते लोकमत मीडिया समूह के चेयरमैन डॉ. विजय दर्डा। | Image Source: Naveen Bansal
दीप प्रज्वलित करते लोकमत मीडिया समूह के चेयरमैन डॉ. विजय दर्डा। | Image Source: Naveen Bansal

“संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का आधार है।” उक्त सुंदर संदेश के साथ लोकमत मीडिया समूह के चेयरमैन डॉ. विजय दर्डा ने ’13वें लोकमत सुर ज्योत्सना नेशनल म्यूजिक अवॉर्ड 2026′ की वैचारिक नींव रखी।

नई दिल्ली के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम हॉल में शुक्रवार की शाम आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को आध्यात्मिक शांति का मार्ग बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन संगीत साधिका ज्योत्सना दर्डा की उस पावन स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने अपना जीवन सुरों की साधना और कला के संवर्धन में लगाया।

डॉ. दर्डा के इसी विजन के साथ भीम हॉल में सजी यह शाम न केवल सुरों का एक भव्य संगम बनी, बल्कि इसने भारतीय संगीत की उस अनवरत परंपरा को भी एक नया आयाम दिया, जिसे लोकमत समूह पिछले 13 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ सहेज रहा है।

इस मौके पर दो दिग्गज कलाकारों को सम्मानित किया गया। पद्मश्री सुमित्रा गुहा और पंडित लक्ष्मण कृष्णराव को उनके शानदार योगदान के लिए अवॉर्ड दिया गया। पंडित लक्ष्मण कृष्णराव ने मंच से युवाओं को एक बड़ी सीख दी। उन्होंने कहा कि बिना ‘रियाज’ और कड़ी मेहनत के बिना कोई भी बड़ा कलाकार नहीं बन सकता। उन्होंने अपनी आवाज में एक भक्ति गीत भी सुनाया, जिसने सबका दिल जीत लिया।


कार्यक्रम में मशहूर गायक कैलाश खेर की Live performance ने समा बांध दिया। जैसे ही कैलाश खेर मंच पर आए, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उनके सूफी गानों पर लोग अपनी सीटों से उठकर झूमने लगे। उनकी गायकी ने साबित कर दिया कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती, वह सीधे दिल तक पहुंचता है।


यह समारोह सिर्फ अवॉर्ड बांटने का जरिया नहीं था, बल्कि संगीत की ताकत का उत्सव था। लोकमत समूह पिछले 13 सालों से इस परंपरा को निभा रहा है। डॉ. विजय दर्डा के नेतृत्व में यह मंच नई प्रतिभाओं को मौका देने और पुराने दिग्गजों को नमन करने का बड़ा केंद्र बन गया है। दिल्ली की यह शाम सुरों और तालियों के बीच हमेशा के लिए यादगार बन गई।