बिहार विधानसभा चुनाव के केंद्र में कैसे आए चिराग पासवान

बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण नजदीक आ गया है, इसके साथ ही चुनावी वार तेज हो गए हैं। इस बार केंद्र में हैं लोक जनशक्ति पार्टी अध्यक्ष यानी चिराग पासवान। गत 8 अक्टूबर को ज़िंदगी को अलविदा कह चुके पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान के बेटे चिराग के दांव से सारे समीकरण बदल गए हैं।
चिराग कह रहे हैं वो एनडीए के हिस्सा हैं और सीएम नीतीश को रोज़ाना कोस रहे हैं। अपने आपको मोदी का हनुमान बता चुके हैं। नीतीश को किसी भी हाल में अगला सीएम नहीं देखना चाहते। भाजपा कह रही है, जो नीतीश को नेता नहीं मानता वो एनडीए का हिस्सा नहीं। अब इस पर राजद के तेजस्वी यादव भी कूद गए हैं।
चिराग कह चुके हैं कि रामविलास पासवान की पार्थिव देह के साथ पटना लौटे तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें अनदेखा किया और अपमानित किया। इस पर अब तेजस्वी यादव ने सोमवार को कहा कि नीतीश कुमार ने जो भी किया वह अन्याय था।
तेजस्वी बोले, “नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के साथ जो किया वो अच्छा नहीं किया। इस समय राम विलास पासवान जी की ज़रूरत चिरागग पासवान को थी और आज उनके नहीं रहने का हम लोगों को दुख है, लेकिन जिस प्रकार का व्यवहार नीतीश जी का रहा चिराग पासवान के प्रति रहा, वो नाइंसाफी हैं।
इससे पहले, चिराग पासवान ने जब तेजस्वी यादव के विधानसभा राघोपुर सीट से अपना प्रत्याशी यह जानते हुए भी खड़ा किया कि वो सीट भाजपा के खाते में है, तब भाजपा के कई नेताओं ने उनके ऊपर ये आरोप लगाए कि वो तेजस्वी से मिले हुए हैं। सियासत में कुछ भी मुमकिन है। जब अभी चुनाव पूर्व ये हाल है तो परिणाम के बाद क्या समीकरण बनते हैं, कह नहीं सकते। भले चिराग की सीटें ज़्यादा न हों, लेकिन वोट बैंक असर डाल सकता है।