पंजाब में AAP को बड़ा झटका : CM मान के चचेरे भाई भाजपा में शामिल

2029 की बिसात और सियासी मायने : पंजाब की राजनीति में आज उस वक्त खलबली मच गई जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई और पार्टी के पूर्व रणनीतिकार ज्ञान सिंह भाजपा में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में हुए इस कार्यक्रम में हरियाणा के CM नायब सैनी और सुनील जाखड़ मौजूद रहे...

भाजपा ने पंजाब में साधा बड़ा निशाना : मुख्यमंत्री के चचेरे भाई ज्ञान सिंह लगातार रहे हैं सरकार के आलोचक… Pic Credit : livehindustan
भाजपा ने पंजाब में साधा बड़ा निशाना : मुख्यमंत्री के चचेरे भाई ज्ञान सिंह लगातार रहे हैं सरकार के आलोचक… Pic Credit : livehindustan

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/ चंडीगढ़। पंजाब की सियासत में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थाम लिया। चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ की मौजूदगी में उन्होंने आधिकारिक तौर पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

ज्ञान सिंह का भाजपा में जाना सत्ताधारी दल AAP के लिए एक कड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के प्रमुख चुनाव रणनीतिकार और कैंपेन प्रभारी रह चुके हैं।

मुख्यमंत्री के साथ पारिवारिक संबंध होने के बावजूद, ज्ञान सिंह पिछले कुछ समय से पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने राज्य में आई बाढ़ के दौरान प्रशासनिक विफलताओं और सरकारी नीतियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुखर होकर आवाज उठाई थी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ज्ञान सिंह के इस कदम से भाजपा को आगामी नगर निगम चुनावों और भविष्य की चुनावी जंग में AAP सरकार को घेरने के लिए नया हथियार मिल गया है। यह घटनाक्रम पंजाब में अंदरूनी कलह और सरकार के प्रति बढ़ते असंतोष को भी उजागर करता है।

पंजाब की राजनीति में आज उस वक्त खलबली मच गई जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई और पार्टी के पूर्व रणनीतिकार ज्ञान सिंह भाजपा में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में हुए इस कार्यक्रम में हरियाणा के CM नायब सैनी और सुनील जाखड़ मौजूद रहे। ज्ञान सिंह, जो कभी AAP के प्रमुख कैंपेन प्रभारी थे, पिछले कुछ समय से बाढ़ प्रबंधन और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर थे। आगामी निकाय चुनावों से पहले इसे AAP के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके और भाजपा के लिए पंजाब में बढ़ते जनाधार के रूप में देखा जा रहा है।