तहलका डेस्क।
चेन्नई। केरल की तरह ही पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की राजनीति में भी आज का दिन ऐतिहासिक मोड़ ले सकता है। सी जोसफ विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) सरकार बुधवार को विधानसभा के पटल पर अपना बहुमत साबित करने उतरेगी।
राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर हो रहा यह शक्ति परीक्षण न केवल विजय की राजनीतिक स्वीकार्यता तय करेगा, बल्कि राज्य के भविष्य के समीकरणों को भी परिभाषित करेगा।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो सत्ताधारी टीवीके के पास अध्यक्ष समेत 107 विधायकों का संख्याबल है। हालांकि, तकनीकी पेंच के कारण सदन में वोटिंग की राह इतनी सरल नहीं है। अध्यक्ष वोट नहीं डालेंगे और तिरुपत्तूर से विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के चलते मतदान से वंचित रहेंगे।
उनकी एक वोट की जीत फिलहाल कानूनी जांच के दायरे में है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें अपने सहयोगियों पर टिकी हैं। कांग्रेस के पांच विधायकों के साथ-साथ भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल के दो-दो विधायकों का बाहरी समर्थन सरकार के लिए सुरक्षा कवच बना हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा उलटफेर अन्नाद्रमुक के भीतर देखने को मिल रहा है। पार्टी अध्यक्ष के. पलानीसामी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले एसपी वेलुमणि और सी वी षणमुगम के नेतृत्व में करीब 30 विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है।
हालांकि, पलानीसामी गुट ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के खिलाफ खड़े हैं और व्हिप का उल्लंघन करने वालों पर दल-बदल विरोधी कानून का चाबुक चलेगा। आज का यह विश्वास मत केवल एक सरकार के टिकने का सवाल नहीं है, बल्कि द्रविड़ राजनीति में एक नए युग की दस्तक है।




