घोषित नतीजों में, ‘आप’ 772 वार्डों के साथ सबसे आगे है, जबकि कांग्रेस 304 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर है। शिरोमणि अकाली दल को 153 वार्ड मिले हैं, वहीं 227 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया है। भाजपा को 91 और बसपा को केवल 6 वार्डों से संतोष करना पड़ा है।
सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने अपने प्रमुख गढ़ों में क्लीन स्वीप किया है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के गृह क्षेत्र धूरी (21 में से 20 वार्ड) और राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के क्षेत्र आनंदपुर साहिब (13 में से 11 वार्ड) शामिल हैं।
हालांकि, पंजाब के निकाय चुनावों का इतिहास हमेशा से सत्ताधारी दल के पक्ष में रहा है, लेकिन इस बार का फैसला विवादों में घिर गया है। विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उनके उम्मीदवारों को कई जगहों पर नामांकन दाखिल करने से रोका गया या पर्चा वापस लेने का दबाव बनाया गया। इसके अलावा, 26 मई को मतदान के दिन भी राज्य के कई हिस्सों में हिंसक झड़पें देखने को मिलीं।
यह विवाद तब और गहरा गया जब पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने ईवीएम (EVM) की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए मतपत्रों (बैलेट पेपर) से चुनाव कराने का फैसला किया। इस मुद्दे को भाजपा ने अपने अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु बनाया। यह मामला राज्य चुनाव आयोग से होते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। लेकिन नतीजों के बाद भी भाजपा नेता बैलेट पेपर के जरिए “वोट चोरी” का आरोप लगा रहे हैं।
साल 2020 में अकाली दल से अलग होने के बाद, भाजपा को उम्मीद थी कि वह पंजाब के शहरी इलाकों में पैठ बना पाएगी। पार्टी हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी शानदार जीत और ‘आप’ के सात राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे/पार्टी छोड़ने से पैदा हुए माहौल का फायदा उठाना चाहती थी, लेकिन नतीजे उसकी उम्मीदों के विपरीत रहे।
वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इन नतीजों को “उम्मीद के मुताबिक” बताया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव आमतौर पर सत्ताधारी दल के पक्ष में ही जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य मुकाबला ‘आप’ और कांग्रेस के बीच ही है और आगामी विधानसभा चुनावों में भी यही स्थिति देखने को मिलेगी। दूसरी ओर, अकाली दल (SAD) के लिए ये नतीजे राजनीतिक राहत लेकर आए हैं। अकाली दल के प्रवक्ता परमबंस सिंह रोमाणा ने कहा कि नतीजों से साफ है कि शहरी पंजाब में अकालियों का जनाधार अभी भी मजबूत है और भाजपा व कांग्रेस ने खुद को बहुत बड़ा आंक लिया था।
अब तक के चुनावी नतीजे:
| पार्टी | जीते गए वार्ड |
| आप | 772 |
| कांग्रेस | 304 |
| निर्दलीय | 227 |
| अकाली दल | 153 |
| भाजपा | 91 |
| बसपा | 6 |




