केंद्र सरकार ने मंत्री मंडल में फेरबदल का बदला तरीका!

पुराने हटाकर नए बनाने की जगह फिल इन वैकेंसी का फॉर्मूला

सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली।
मोदी मंत्री मंडल फेरबदल की संभावनाओं की चर्चा पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। नए लोगों को मंत्री पद मिलेगा जरूर लेकिन किसी को हटाकर नहीं। बल्कि जो पद खाली हुए हैं उनकी जिम्मेदारी नए लोगों को दी जाएगी। चूंकि फेरबदल होने पर यह संदेश जाता है कि अमुक मंत्री का पॉरफारमेंस ठीक नहीं था या कुछ गड़बड़ी मंत्रालय में थी जिसकी वजह से उन्हे हटाया गया है। सरकार किसी भी स्थिति में ऐसा नहीं चाहेगी कि भाजपा के किसी मौजूदा मंत्री को लेकर इस तरह की कयासबाजी लोगों के बीच हो।

सूत्रों का कहना है कि ऐसे में फेरबदल की संभावना नहीं है। चूंकि सरकार में लगातार मंत्रियों की कामकाज की समीक्षा होती है। कई बार स्थिति और जरूरतों के हिसाब से बदलाव की जरूरत होती है। ऐसे में एक नया फॉर्मूला अपनाने की दिशा में सरकार बढ़ी है।

बीतों दिनों शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था। शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रहलाद जोशी को दी गई। काफी हद तक संभव है कि यह अतिरिक्त जिम्मेदारी पार्टी के किसी अन्य वरिष्ठ नेता को सौंप दी जाए। इसी तरह नवंबर में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। रेल राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया। मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है। पूर्व राज्यमंत्री जार्ज कुरियन का भी राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने से उन्होंने मंत्री पद छोड़ दी। मंगलवार को एल. मुरूगन ने भी मंत्रीपद और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी। उनके राज्यसभा का कार्यकाल अभी बचा हुआ था।

ऐसे में पांच-छह मंत्रियों और राज्यमंत्रियों की वैकेंसी बनेगी जिसमें नए लोगों को जगह मिलेगा। इस तरह से मंत्रीमंडल में भी बदलाव हो जाएगा और फेरबदल की चर्चा नकारात्मक नैरेटिव नहीं बना पाएगा। सूत्रों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में और दो तीन केंद्रीय या राज्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। इन्हे अगले साल होने वाले पांच विधानसभा चुनावों में लगाया जा सकता है। ऐसे में जो वैकेंसी होगी उन पर नए लोगों को जगह दी जाएगी।