कार्यस्थल पर उत्पीड़न रोकने के लिए सिर्फ कानून नहीं, जवाबदेही भी जरूरी: ओम प्रकाश व्यास

नई दिल्ली | तहलका न्यूज़ | स्नेहलता
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून और नियम बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। जागरूकता की कमी, संस्थागत जवाबदेही का अभाव और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई न होना महिलाओं की सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन ‘पॉश समागम 2026’ में सुरक्षित कार्यस्थल बनाने के लिए मजबूत संस्थानों, जागरूकता और सामूहिक जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से 200 से अधिक पेशेवर शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन पिंक एंड ब्लू–सिम्बायोटिक लिविंग की ओर से किया गया। इसमें गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता भी मौजूद रहीं।

व्यास ने बताया, सुरक्षित कार्यस्थल के लिए क्यों जरूरी है जवाबदेही?

डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने अपने संबोधन में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम यानी पॉश कानून, मानवाधिकार और आपराधिक कानून के बीच संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने सुरक्षित वातावरण के निर्माण में मजबूत संस्थानों और सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका पर जोर दिया। उनका संदेश स्पष्ट था कि उत्पीड़न की रोकथाम से लेकर शिकायतों के प्रभावी समाधान तक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम, 2013 का उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। इसकी प्रभावशीलता केवल नीतियां बनाने या कागजी औपचारिकताएं पूरी करने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए जागरूकता, शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदार संस्थागत व्यवस्था भी जरूरी है।

चुप्पी नहीं, आवाज उठाना जरूरी

सम्मेलन में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने और अपनी क्षमताओं को सामने लाने के लिए भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए पिंक एंड ब्लू के साथ संभावित सहयोग के अवसर तलाशने की बात कही।

पिंक एंड ब्लू के संरक्षक सीएस नेसार अहमद ने भी पॉश कानून के अनुपालन को केवल दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय कॉरपोरेट कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। वहीं, प्रेरक वक्ता सुनील केसवानी ने लोगों से चुप्पी तोड़ने और सकारात्मक बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए जागरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक कार्रवाई का संदेश दिया गया।

सम्मेलन के अंत में आयोजकों ने देशभर में अपनी पहुंच बढ़ाने और सदस्यता को 5,000 तक ले जाने का लक्ष्य रखा। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल बनाने की जिम्मेदारी केवल कानून की नहीं, बल्कि हर संस्थान और वहां काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की है।