ईडी ने आजम खान की ₹1,170 करोड़ कीमत की जौहर यूनिवर्सिटी को कुर्क किया

₹426.46 करोड़ की कमाई को अपराध से अर्जित मानाः सरकारी ठेकों के पैसे और निर्माण सामग्री से यूनिवर्सिटी बनाने का आरोप; 59 इमारतों के निर्माण और जमीन की कुल लागत ₹499.09 करोड़ आंकी गई, ट्रस्ट के रिकॉर्ड में वैध खर्च सिर्फ ₹72.63 करोड़

एम. रियाज़ हाशमी
नई
दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों में ₹426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। ईडी के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्ति का मौजूदा बाजार मूल्य करीब ₹1,170 करोड़ है। यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ चल रही धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) जांच के तहत की गई है।

ईडी के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर की जमीन और 59 इमारतों के निर्माण की कुल लागत ₹499.09 करोड़ आंकी गई। इसके मुकाबले ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में पूंजीगत खर्च ₹78.32 करोड़ दिखाया गया था। जांच में इसमें से ₹12.29 करोड़ का दान गैर-वास्तविक पाया गया। ईडी के आकलन के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण और जमीन की खरीद पर वैध स्रोतों से सिर्फ ₹72.63 करोड़ का खर्च ही समझाया जा सका। शेष ₹426.46 करोड़ को ईडी ने अपराध से अर्जित आय माना है।

ईडी का कहना है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी इस रकम के स्रोत को प्रमाणित नहीं कर सके। इसी आधार पर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों में ₹426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की गई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि कुर्की धनशोधन कानून के तहत की गई अंतरिम कार्रवाई है; इसे अपने आप में किसी आपराधिक आरोप पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता।

सरकारी ठेकों की रकम और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल

ईडी की जांच में सामने आया कि रामपुर में सरकारी निर्माण कार्यों के लिए आवंटित धन और सामग्री का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण में किया गया। एजेंसी के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से रकम ट्रस्ट को दान के रूप में वापस भेजी गई। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के करीब ₹186 करोड़ के ठेके एक कंपनी को मिले थे। कंपनी के प्रबंध निदेशक ने स्वीकार किया कि ठेकों की कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया। ईडी के मुताबिक, एक अन्य फर्म के साझेदारों ने भी आजम खान के प्रभाव में काम करने और ट्रस्ट को ₹40 लाख का दान देने की बात स्वीकार की।

ईडी ने इन निष्कर्षों से संबंधित जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत साझा की थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में एफआईआर संख्या 0224/2026 दर्ज की गई। इसमें आजम खान, ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 61, 316(5) और 318(4), तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7 और 13 के तहत मामला दर्ज किया गया।

सरकारी धन से बने पंडाल विश्वविद्यालय को दे दिया

ईडी की जांच में विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी धन से कराए गए निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, विधायक/ विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से विश्वविद्यालय परिसर में ₹6.60 करोड़ के कार्य कराए गए। ये कार्य उत्तर प्रदेश जल निगम ने किए थे, जिसके तत्कालीन अध्यक्ष आजम खान थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय के निजी परिसर में पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल ₹23.41 करोड़ की मंजूरी दी थी। ईडी के अनुसार, वर्ष 2015 में पंडाल निर्माण के लिए ₹12.16 करोड़ की मंजूरी देते समय सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि उसका स्वामित्व राज्य के संस्कृति विभाग के पास रहेगा, उसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा और राज्य सरकार जरूरत के अनुसार उसका मुफ्त इस्तेमाल कर सकेगी। लेकिन एजेंसी का आरोप है कि 2016 के एक अन्य आदेश के जरिए स्वामित्व जौहर विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया गया और राज्य सरकार के मुफ्त इस्तेमाल की शर्त हटा दी गई। ईडी ने इसे सरकारी धन से बनी संपत्ति को विश्वविद्यालय की निजी संपत्ति में बदलने का मामला बताया है। संबंधित आदेशों के समय आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और शहरी विकास विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे।

किसानों की जमीन और शत्रु संपत्ति पर कब्जे किए गए

ईडी ने बताया कि धनशोधन की जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इन मामलों में आरोप था कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन कब्जे में ली गई। इन एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 384 और अन्य प्रावधानों का उल्लेख किया गया था। रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के हवाले से ईडी ने कहा कि सिंहनखेड़ा गांव में शत्रु संपत्ति की 45 भूखंडों वाली करीब 34 एकड़ जमीन पर भी अवैध कब्जा किया गया था। एजेंसी के अनुसार, इस जमीन को ट्रस्ट को पट्टे पर देने का निर्णय बाद में रद्द कर दिया गया था, फिर भी जमीन विश्वविद्यालय के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने जिला प्रशासन के माध्यम से इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।

मकानों को तोड़ा और नगर पालिका की मशीनें कब्जा ली

ईडी ने रामपुर पुलिस की 28 अन्य एफआईआर को भी जांच के दायरे में लिया है। इनमें से अधिकांश मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जाने की बात एजेंसी ने कही है। इन मामलों में आरोप है कि वर्ष 2016 में रामपुर शहर में कई परिवारों के मकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया था। इनमें से कई परिवार वक्फ संपत्तियों में किरायेदार थे। तत्कालीन सर्किल अधिकारी और अन्य लोगों के नेतृत्व वाली भीड़ ने आजम खान के निर्देश पर कार्रवाई की। प्रभावित लोगों को पीटा गया, झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी गई और नकदी, आभूषण तथा मवेशी लूटे गए। इन मकानों का मलबा विश्वविद्यालय परिसर में ले जाए जाने का भी आरोप है। इन एफआईआर में रामपुर नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनों को विश्वविद्यालय परिसर में इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी शामिल है।

ट्रस्ट के दान और आयकर पंजीकरण पर भी कार्रवाई

ईडी के मुताबिक, विश्वविद्यालय को मेरठ स्थित दो शैक्षणिक संस्थाओं से ₹6.24 करोड़ का दान मिला था। एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह धन राजनीतिक प्रभाव के जरिए ट्रस्ट तक पहुंचा। आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है।  ईडी के अनुसार, जिला मूल्यांकन अधिकारी ने 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर की 59 इमारतों के निर्माण की लागत ₹494.46 करोड़ आंकी थी। विश्वविद्यालय की जमीन, जिसे 114 बिक्री विलेखों के जरिए खरीदा गया था, का मूल्य ₹4.63 करोड़ आंका गया। इस तरह जमीन और भवनों की कुल लागत ₹499.09 करोड़ बनी।

ईडी के आकलन में ट्रस्ट के घोषित पूंजीगत खर्च ₹78.32 करोड़ में से ₹12.29 करोड़ के दान को गैर-वास्तविक माना गया। इसके बाद ट्रस्ट का वास्तविक निर्माण खर्च ₹66.03 करोड़ रह गया। जमीन और भवनों की कुल लागत में से वैध स्रोतों से समझाई गई रकम का कुल आंकड़ा ₹72.63 करोड़ रखा गया। शेष ₹426.46 करोड़ को एजेंसी ने कथित अपराध की आय माना। ईडी ने इससे पहले 19 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली थी। उस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक माने गए दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी दी है।