
मेरठ के जिलाधिकारी वी.के. सिंह ने सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थित मतगणना केंद्र का दौरा किया। यहां उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए मतों की गिनती जारी है।
तहलका ब्यूरो
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना के बीच वाराणसी का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। बुधवार को स्नातक सीट की गिनती के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी केदार नाथ सिंह के समर्थक मतगणना स्थल पर धरने पर बैठ गए। उनकी मांग है कि मतगणना प्रेक्षक प्रांजल यादव को तुरंत हटाया जाए। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर मतगणना में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए निर्वाचन अधिकारी को पत्र सौंपा है। नतीजा यह कि वाराणसी स्नातक सीट की गिनती फिलहाल विवादों में घिर गई है।
प्रेक्षक पर पक्षपात का आरोप
भाजपा प्रत्याशी केदार नाथ सिंह और पार्टी कार्यकर्ताओं ने मतगणना प्रेक्षक प्रांजल यादव पर पक्षपात का आरोप लगाया है। समर्थकों का कहना है कि प्रेक्षक समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का सहयोग कर रहे हैं, इसलिए उनकी मौजूदगी में निष्पक्ष मतगणना संभव नहीं है। इसी मांग को लेकर कार्यकर्ता मतगणना स्थल पर ही धरने पर बैठ गए और प्रेक्षक को प्रक्रिया से हटाए जाने तक डटे रहने की बात कही।
मतगणना प्रेक्षक का काम पूरी गिनती प्रक्रिया पर नजर रखना और यह सुनिश्चित करना होता है कि सब कुछ निर्वाचन नियमों के अनुसार हो। ऐसे में उन पर लगा पक्षपात का आरोप सीधे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि अब तक प्रांजल यादव या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नारेबाजी से गरमाया माहौल
धरने के दौरान माहौल उस वक्त और गरम हो गया जब केदार नाथ सिंह के समर्थकों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और प्रांजल यादव के खिलाफ “मुर्दाबाद” के नारे लगाए। समर्थकों का आरोप है कि प्रेक्षक की भूमिका निष्पक्ष नहीं है और वे सपा प्रत्याशी के पक्ष में काम कर रहे हैं। मतगणना स्थल पर नारेबाजी और धरने के कारण कुछ देर तक हलचल बनी रही।
सपा का पलटवार: “अभद्रता से रुकी मतगणना”
मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आ गया है। सपा के स्नातक एमएलसी प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्र के मुताबिक, बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को मतगणना सुचारु रूप से चल रही थी। इसी दौरान भाजपा प्रत्याशी केदार नाथ सिंह और उनके मतगणना अभिकर्ताओं ने मतगणना स्थल पर अन्य दलों और प्रत्याशियों के अभिकर्ताओं तथा मतगणना कर्मचारियों के साथ अभद्रता की। आशुतोष सिन्हा का कहना है कि इससे गिनती के काम में व्यवधान पैदा हुआ और बाद में मतगणना का काम रुकवा दिया गया।
बिजली व्यवस्था को लेकर जताई आशंका
सपा प्रत्याशी ने अपने पत्र में एक और आशंका भी जताई है। उन्होंने कहा है कि रात के समय बिजली व्यवस्था को प्रभावित कर मतगणना को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। यह फिलहाल आशंका के रूप में है और इस पर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आशुतोष सिन्हा ने निर्वाचन अधिकारी से अनुरोध किया है कि वे मामले का संज्ञान लें, तत्काल मतगणना दोबारा शुरू कराएं और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।
सपा-भाजपा में कांटे की टक्कर
विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश का सियासी मिजाज भांपने के लिहाज से विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों को अहम माना जा रहा है। इन चुनावों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
अब तक 11 सीटों के लिए जारी मतगणना में भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। वहीं वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने बाजी मारी है। वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना अभी जारी है, और इसी सीट पर मचा यह विवाद दोनों दलों के बीच जारी खींचतान को और तेज करता दिख रहा है।
दोनों पक्षों की मांगें आमने-सामने
फिलहाल तस्वीर यह है कि भाजपा समर्थक प्रेक्षक को हटाने की मांग पर अड़े हैं, जबकि सपा मतगणना जल्द शुरू कराने और व्यवधान डालने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रही है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन इनकी सच्चाई का फैसला निर्वाचन अधिकारी और प्रशासन की जांच-पड़ताल के बाद ही हो सकेगा।
अब निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर नजर
अब सबकी निगाहें निर्वाचन अधिकारी और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यह है कि मतगणना कब तक दोबारा शुरू होती है, प्रेक्षक को लेकर उठी मांग पर क्या फैसला लिया जाता है और धरने का क्या समाधान निकलता है। जब तक यह गतिरोध खत्म नहीं होता, वाराणसी स्नातक सीट का नतीजा भी इंतजार में रहेगा।




