महिलाएं और न्यायिक सुधार

सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो को तब एलीमनी यानि भरण पोषण का अधिकार दिया जब 62 वर्ष की उम्र में उनके पति ने उन्हें तलाक दिया. मगर कट्टरपंथियों द्वारा एेतराज जताने पर इस निर्णय को निरस्त कर दिया गया और शाह बानो को केवल इद्दत (विधवा या तलाकशुदा स्त्री का दूसरे विवाह तक प्रतीक्षा का समय) की अवधि के लिए खर्चा मिला.

 

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निर्भया[/symple_box]

16 दिसंबर 2012 में हुए जघन्य निर्भया बलात्कार कांड के बाद क्रिमिनल लॉ बिल (संशोधित) पास किया गया, जिसके अनुसार महिलाओं की स्टॉकिंग यानी पीछा करने और छुप-छुपकर देखने को भी आपराधिक कृत्य माना जाएगा, साथ ही बलात्कार और एसिड अटैक (तेजाब से हमले) के लिए सजा भी बढ़ा दी गई. साथ ही जूवेनाइल जस्टिस एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम) में भी संशोधन किए गए, जिनके अनुसार 16 से 18 आयुवर्ग के किशोर को किसी भी जघन्य अपराध में संलिप्त पाए जाने पर कानून की नजर में वयस्क की ही श्रेणी में रखा जाएगा.

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 भंवरी देवी
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1992 में नारी उत्थान प्रोजेक्ट से जुड़ीं भंवरी देवी को एक बाल-विवाह रोकने की सजा पांच सवर्णों द्वारा बलात्कार के रूप में मिली, हालांकि उन अपराधियों को सजा नहीं मिल पाई पर उनकी सतत न्यायिक लड़ाई ने कई याचिकाकर्ताओं और महिला संगठनों को साथ लाकर खड़ा कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप विशाखा गाइडलाइंस अस्तित्व में आई. विशाखा गाइडलाइंस कार्यस्थल पर हुए यौन शोषण के खिलाफ कानूनी सुरक्षा देती है.

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 लक्ष्मी
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मात्र 16 वर्ष की उम्र में एसिड अटैक का शिकार हुई लक्ष्मी ने 27,000 हस्ताक्षरों के साथ सुप्रीम कोर्ट में तेजाब की खरीद-फरोख्त पर याचिका दायर की. उच्चतम न्यायालय ने इसका समर्थन करते हुए तेजाब की खुदरा खरीद पर रोक लगा दी. साथ ही यह भी कहा कि अब से जो कोई तेजाब खरीदेगा उसे अपने किसी फोटो पहचान पत्र की कॉपी जमा करनी होगी. फिलहाल लक्ष्मी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को लागू करवाने के लिए एक नई लड़ाई लड़ रही हंै.

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