इक्कीसवीं सदी में भारत-अमेरिका की नई साझेदारी

The-Prime-Minister-Narendra

लोकतंत्र, स्वतंत्रता, विविधता और उद्यमशीलता के लिए अपनी प्रतिबद्धता के चलते भारत और अमेरिका को साझे मूल्य और पारस्परिक हित एक-दूसरे से जोड़ते हैं. हम दोनों ने ही मानव इतिहास की सकारात्मक यात्रा को गढ़ा है और अपनी साझा कोशिशों के जरिये हमारी सहज और अनोखी साझीदारी अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति को एक आकार देने में आगामी कई वर्षों तक मददगार हो सकती है.

अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते की जड़ें न्याय और समानता के लिए हमारे नागरिकों की साझी इच्छा में हैं. जब स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को विश्व धर्म के रूप में प्रस्तुत किया था तो ऐसा उन्होंने 1893 में शिकागो में हुई विश्व धर्मसंसद में किया था. जब मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अमेरिका में अश्वेतों के खिलाफ होने वाले भेदभाव और पूर्वग्रह को खत्म करना चाहा था तो उन्हें महात्मा गांधी की अहिंसा की शिक्षाओं से प्रेरणा मिली थी. खुद गांधी जी हेनरी डेविड थोरो के साहित्य से प्रभावित थे.

हम दोनों ही देश अपने नागरिकों की उन्नति के लिए दशकों से साझीदार रहे हैं. भारत के लोग हमारे आपसी सहयोग की मजबूत बुनियाद को याद करते हैं. हरित क्रांति के तहत बढ़ा अन्न उत्पादन और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हमारे पारस्परिक सहयोग के कई नतीजों में से हैं.

आज हमारी साझेदारी मजबूत, विश्वसनीय और टिकाऊ है और इसका विस्तार हो रहा है. हमारे बीच पहले से भी ज्यादा आपसी सहयोग हो रहा है. केवल केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि हमारी सेनाओं, हमारे निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के बीच भी. वास्तव में इतने अधिक सहयोग के चलते ही 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐलान किया था कि हम स्वाभाविक साझीदार हैं.

तब से लेकर अब तक कई वर्षों के दौरान हमारा यह आपसी सहयोग बढ़ता ही गया है. हर दिन हमारे छात्र शोध परियोजनाओं पर साथ-साथ काम करते हैं,  हमारे वैज्ञानिक अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने के काम में लगे हैं और हमारे वरिष्ठ अधिकारी वैश्विक मुद्दों पर करीबी बातचीत करते हैं. हमारी सेनाएं जल, थल और नभ में संयुक्त अभ्यास कर रही हैं. हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम इस सहयोग को अभूतपूर्व क्षेत्रों में ले जाते हुए हमें पृथ्वी से मंगल तक ले जा रहे हैं.

इस साझीदारी में भारतीय अमेरिकी समुदाय हमारे बीच एक जीवंत सेतु की तरह काम करता रहा है.  इसकी सफलता हमारे नागरिकों की चेतना, अमेरिका के उदार समाज और दोनों देशों के मेल की मजबूती का सबसे सजीव प्रतिबिंब रही है.

फिर भी इस संबंध की वास्तविक क्षमताओं का फलीभूत होना अभी बाकी है. भारत में एक नई सरकार का आगमन हमारे रिश्ते को व्यापक और गहरा बनाने का एक स्वाभाविक अवसर है. एक नई ऊर्जा से युक्त महत्वाकांक्षा और पहले से भी ज्यादा विश्वास के साथ हम अपने पारंपरिक लक्ष्यों के परे जा सकते हैं. यह एक नये एजेंडे का समय है जो हमारे नागरिकों को ठोस लाभ पहुंचा सके. यह एजेंडा ऐसे पारस्परिक लाभप्रद रास्ते खोजने में हमारी मदद करेगा जो व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी में हमारे सहयोग का विस्तार कर सकें. ऐसे रास्तेे जो भारत के महत्वाकांक्षी विकास एजेंडे अनुरूप हों और साथ ही प्रगति के एक वैश्विक इंजन के रूप में अमेरिका को भी मजबूती दें. आज जब हम वाशिंगटन में मिलेंगे तो हम उन तरीकों पर चर्चा करेंगे जिनसे हम विनिर्माण को बढ़ावा और सस्ती अक्षय ऊर्जा को विस्तार दे सकें और इसके साथ ही अपने साझे पर्यावरण का भविष्य भी सुरक्षित कर सकें.  हम चर्चा करेंगे कि किस तरह हमारे कारोबार, वैज्ञानिक और सरकारें आपस में साझीदारी कर सकते हैं. भारत खासकर अपने निर्धनतम नागरिकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपलब्धता को सुधारना चाहता है. इस काम में अमेरिका सहयोग के लिए तैयार है. हमारे तत्काल और ठोस समर्थन का एक क्षेत्र स्वच्छ भारत अभियान है जिसमें हम सारे भारत में स्वच्छता और सफाई की स्थिति सुधारने के लिए नए तरीकों, विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाएंगे.

हमारे साझे प्रयासों से हमारे अपने लोगों को फायदा होगा. हम चाहते हैं कि हमारी साझेदारी बड़ी से बड़ी हो. एक राष्ट्र और समाज के रूप में हम सबके लिए बेहतर भविष्य की कामना करते हैं. एक ऐसा भविष्य जिसमें हमारी रणनीतिक साझेदारी बड़े पैमाने पर पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद हो. भारत को अमेरिकी निवेश और तकनीकी साझेदारियों से उपजने वाली प्रगति से लाभ होता है तो अमेरिका भी एक मजबूत और पहले से ज्यादा खुशहाल भारत से लाभान्वित होता है. नतीजतन एक क्षेत्र और पूरी दुनिया को भी उस स्थिरता और सुरक्षा से लाभ होता है जो हमारी मित्रता से उपजती है. हम उन प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे दक्षिण एशिया को संगठित किया जा सके और इसे केंद्रीय और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों और लोगों के साथ जोड़ा जा सके.

वैश्विक साझीदारों के रूप में आतंकवादी विरोधी और कानून का पालन करवाने वाले तंत्र के आपसी सहयोग के जरिये हम अपने देश की सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. साथ ही हम समुद्री रास्तों में परिचालन की स्वतंत्रता और वैध कारोबार की निरंतरता के लिए भी प्रतिबद्ध हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारा आपसी सहयोग मुश्किल से मुश्किल चुनौतियों से निपटने में हमारी मदद करेगा, फिर भले ही वह ईबोला को फैलने से रोकना हो, कैंसर के इलाज पर शोध हो या टीबी, मलेरिया और डेंगू जैसे रोगों पर विजय पाने की कवायद. साथ ही हम चाहते हैं कि महिला सशक्तिकरण, क्षमताओं के संवर्धन और अफगानिस्तान व अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा सुधारने के लिए सहयोग के जो नए क्षेत्र हमने बनाए हैं उनका विस्तार हो.

अंतरिक्ष का अन्वेषण आगे भी हमारी कल्पनाओं को पंख देता रहेगा और हमें अपनी महत्वाकांक्षाएं बढ़ाने के लिए ललकारता रहेगा. मंगल की परिक्रमा करते हम दोनों के उपग्रह अपनी कहानी खुद कहते हैं. एक बेहतर भविष्य का यह वादा सिर्फ भारतीयों और अमेरिकियों के लिए नहीं है. यह हमें

संकेत भी देता है कि एक बेहतर दुनिया के लिए हम साथ-साथ आगे बढ़ें. यह 21वीं सदी के लिए एक नई परिभाषा गढ़ती हमारी साझीदारी का केंद्रीय आधार है. चलें साथ-साथ.

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