Volume 7 Issue 1 Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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संगीत के साथ जैसे उन्हें जीवन वापस मिल गया था. गाना दोबारा शुरू करते हुए उन्हें यह डर था कि पता नहीं इतने समय बाद वो गा भी पाएंगी या नहीं और लोगों पर उनका जादू वैसे ही चलेगा या नहीं. लेकिन जब उन्होंने गाया तो दोबारा उसी तरह की  

मौत की बांहों में भोपाल

भोपाल गैस कांड के रूप में घटी देश की सबसे भयावह औद्योगिक त्रासदी का यह तीसवां बरस है. दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात में मध्यप्रदेश की राजधानी में यूनियन कार्बाइड के कारखाने में हुए गैस रिसाव से तकरीबन 25,000 लोगों की जान गई. हादसे के मुख्य आरोपित वॉरेन एंडरसन की बीते सितंबर महीने में अमेरिका में मृत्यु हो गई. इस पूरे वाकये में भोपाल के लोगों को कुछ हासिल रहा तो वह थे बस झूठे दिलासे...  

सीपीआई (एम) : आधी सदी, अधूरा सफर

पचास साल बाद जब हम सीपीआई (एम) का आकलन करने बैठते हैं, तो पाते है कि इसने कभी भी खुद को हिंदुस्तान की मौलिक सोच, जमीन, आदमी, जल, जंगल से जोड़ने का यत्न ही नहीं किया. आयातित सपनों को थोपने की जिद उसे ऊंचाई की बजाय हाशिए की तरफ ले आई है  

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : अनवरत विद्रोही

नई कविता के अग्रणी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध के निधन को आधी सदी हो रही है, इसी के साथ उनकी सर्वाधिक चर्चित और महत्वपूर्ण कविता 'अंधेरे में' भी अपनी रचना के 50 साल पूरे कर चुकी है. समय रहते अपना दाय न पा सके इस दिग्गज कवि को उसके निधन के बाद रचना संसार ने सर आंखों पर बिठाया  

बर्लिन की दीवार : 45 वर्ष बाद मिटी दीवार

नौ नवंबर 1989 को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी को बांटनेवाली बर्लिन की चर्चित दीवार गिरा दी गई. इस घटना ने 45 वर्षों के अलगाव के बाद एक बार फिर से जर्मनी के एकीकरण की नींव रखी. इतिहास की यह महत्वपूर्ण घटना औपचारिक रूप से 3 अक्टूबर 1990 को अपने अंजाम तक पहुंची. उसी दिन द न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे इस आलेख ने एकीकरण की घटना की ऐतिहासिकता को हमेशा के लिए अमर कर दिया. द न्यूयॉर्क टाइम्स से साभार  

भागलपुर दंगा : नृशंसता के छह माह

सामयिक भारत के जेहन में दो धार्मिक दंगों की छाप बहुत गहरी है. 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे और 2002 में हुए गुजरात के दंगे. देश के दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने इन दोनों दंगों का इस हद तक एक-दूसरे के काउंटर के तौर पर इस्तेमाल किया कि इसी दौरान हुआ एक और दंगा लोगों की स्मृतियों से लुप्त हो गया. इसे भागलपुर दंगे के नाम से जाना जाता है. देश में सबसे लंबे समय तक चले दंगे...  

प्रथम विश्वयुद्ध : हिंदुस्तान की लड़ाई

2014 पहले विश्वयुद्ध की सौवीं वर्षगांठ है. जब भारत अंग्रेजों से अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब भारत के सैनिक अंग्रेजों के लिए यह महासंग्राम लड़ रहे थे. इस युद्ध में अंग्रेजों को विजय तो मिली, लेकिन भारत और भारतीयों के लिहाज से इस विजय में कुछ भी सम्मानजनक नहीं था  

ख्वाजा अहमद अब्बास – परिवर्तन का पुरोधा

यह ख्वाजा अहमद अब्बास का जन्मशती वर्ष है. वे बड़े लेखक, अफसानानिगार, फिल्म लेखक, पत्रकार और निर्देशक भी थे. वे प्रगतिशील आंदोलन से भी जुड़े थे. उनका स्तंभ लास्ट पेज भारतीय पत्रकारिता के इतिहास का चिरस्थायी हिस्सा रहेगा  

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : सीधे-सादे और जटिल

चिर विद्रोही मुक्तिबोध किसी भी चीज से समझौता नहीं करते थे, अर्थशास्त्र के सिद्धांतों और स्वास्थ्य के नियमों से भी नहीं. वह संबंधों में लचीले थे, मगर विचारों में इस्पात की तरह. पैसे-पैसे के लिए तंग रहते थे, पर पैसे को लात भी मारते थे. एक संस्मरण  

दोस्ती – मर्मस्पर्शी भावनाओं की कामयाबी

यूं तो फिल्मकारों ने दोस्ती के रिश्ते पर एक से बढ़कर एक फिल्में बनाई हैं, लेकिन इस फिल्म में अंधे और अपाहिज दोस्तों की जो मर्मस्पर्शी कहानी दिखाई गई है, वह आज भी दोस्ती के फार्मूले पर बनी दूसरी फिल्मों पर भारी पड़ती है.