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‘टैलेंट हंट’ में धोखा खाने के बाद गीतकार बनने का सपना धरा रह गया और हम पत्रकार बन गए…

अपने गांव से 2003 में इलाहाबाद पहुंचा तो सोचा कि गाने और लिखने के अपने शौक को ही अपना पेशा बनाऊंगा. मेरे बड़े भाई पहले से वहां रहते थे. उनके सपोर्ट के बाद मैंने प्रयाग संगीत समिति में एडमिशन ले लिया और संगीत सीखने में लग गया. हालांकि, जब मेरे  

‘भूले-भटके’ तिवारी : जिन्होंने कुंभ में बिछड़े लाखों लोगों को उनके अपनों से मिलवाया

कुंभ के मेले में लोगों के मिलने और बिछड़ने की घटनाओं ने बॉलीवुड को बहुत-सी कहानियों से नवाजा है. इन कहानियों पर आधारित तमाम फिल्में जहां एक तरफ सुपरहिट हुईं वहीं दूसरी ओर कई सुपरस्टारों ने जन्म लिया. लेकिन हम आपको किसी फिल्मी कहानी या फिल्मी नायक के बारे में  

शायद वो पुलिसवाला पैसे के लालच में भूल चुका था कि समाज में उसकी भूमिका और जिम्मेदारी क्या है…

बीते जून महीने में रामपुर अपने घर जाने का प्रोग्राम बना था. मैंने पुरानी दिल्ली से रामपुर के लिए रानीखेत एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवाया था. ट्रेन के आने का समय रात में तकरीबन 9:30 बजे था और डिपार्चर 10:30 बजे. जब मैं स्टेशन पहुंचा तो 10 बज रहे थे. स्टेशन  

समान नागरिक संहिता तो छोड़िए हमने तो आपराधिक संहिता को भी समान नहीं रहने दिया: आरिफ मोहम्मद खान

समान नागरिक संहिता लागू किए जाने के बारे में आपकी क्या राय है? हमारा संविधान अपने अनुच्छेद 44 के द्वारा राज्य के ऊपर यह जिम्मेदारी डालता है कि वह भारत के समस्त नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा. हम सब संविधान को मानते हैं और  

प्रकाशन की मंडी में जिसके पास कलम है, लेकिन पैसा नहीं, वह नहीं छपेगा : नीलोत्पल मृणाल

डार्क हॉर्स आपकी पहली किताब है. पुरस्कार की दौड़ में तमाम किताबें रही होंगी, लेकिन साहित्य अकादेमी पुरस्कार आपको मिला. इस बारे में क्या कहेंगे? निश्चित रूप से यह किसी नए लेखक के लिए बड़ी उपलब्धि होगी. पहली किताब वाले सवाल पर तो कहूंगा कि किसी भी रचनाकार को उसकी  

‘वॉट्सऐप या मेल पर तलाक कैसे दे सकते हैं? क्या अल्लाह बैठकर वॉट्सऐप चेक कर रहे हैं कि किसने किसे क्या भेजा है?’

तकरीबन सारी दुनिया में, जिसमें मुस्लिम देश भी शामिल हैं, तीन तलाक का मौजूदा स्वरूप समाप्त हो चुका है. मेरा तो मानना है कि मुल्क में महिलाओं के लिए बराबर का अधिकार होना चाहिए. उनके लिए सक्रिय कानून होने चाहिए, जो एक स्तर पर हैं भी कि अगर आप चाहें  

जब कुरान तीन तलाक की इजाजत नहीं देता तो पर्सनल लॉ बोर्ड कौन होता है इसकी पैरवी करने वाला : ज़किया सोमन

बीएमएमए द्वारा प्रधानमंत्री को तीन तलाक पर बैन लगाने को लेकर पत्र लिखा गया था? हां, पर उस पत्र में सिर्फ तीन तलाक की बात नहीं है बल्कि मुस्लिम फैमिली लॉ को विधिवत करने की बात है, उसमें सुधार लाने की जरूरत है तो ये सुधार क्या होंगे ये हमने  

‘मुस्लिम मर्दों को अगर कोई चिंता है तो यह कि पत्नी पिटाई और महिला उत्पीड़न के नाजायज हक में कहीं कोई कमी न आ जाए’

मुस्लिम महिलाएं सड़क-मुहल्लों से लेकर देश के स्तर तक मर्दों को मारने-पीटने वाले गिरोहों से लंबी लड़ाई लड़ रही हैं, और दूसरी तरफ मुसलमान मुल्ला-मर्द हैं जो घर के अंदर महिलाओं को पीटने और पीड़ित करने के हक को जारी रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं. मुजफ्फरनगर से लेकर गुजरात  

‘मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल नहीं होना चाहिए’

इस्लाम में तलाक का जो तरीका बताया गया है उसमें यह नहीं है कि एक बार में तीन तलाक दिया जाए. ये एक बार में तीन तलाक देने का जो तरीका लोगों ने अपना लिया है वह इस्लाम की शिक्षाओं और कुरान की हिदायतों के बिल्कुल खिलाफ है. इस्लाम ये  

‘मुताह एक तरह की कानूनी वेश्यावृत्ति है, जिस पर मुस्लिम समुदाय को बात करने में भी शर्म आती है…’

तीन तलाक के खिलाफ अभियान से मुस्लिम समुदाय के लोगों या मौलवियों को आहत नहीं होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से आज के दौर में तीन तलाक हो रहा है, वह पूरी तरह इस्लाम के खिलाफ है. इससे इस्लाम के जो पांच सिद्धांत हैं, जो हिदायत है, उसमें कोई तब्दीली