Religion Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

Post Tagged with: "Religion"

अखंड भारत की बात संघ की मूर्खता का प्रमाण

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण की तो चर्चा ही नहीं की जानी चाहिए. मेरे ख्याल से ऐसा कुछ बोलने के लिए अपना मुंह ही नहीं खोलना चाहिए. इन देशों का अब तक दो मर्तबा विभाजन हो चुका है. एक 1947 में जब पाकिस्तान बना और एक बार 1971 में  

#गुंडागर्दी ऑनलाइन

जिस वक्त हम यह योजना बना रहे थे कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों के बारे में जनता को बताया जाए, तभी सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ गई कि अभिनेता दिलीप कुमार की मौत हो गई है. कुछ देर बाद पता चला कि वे लीलावती अस्पताल में सकुशल हैं  

‘अगर लिंग परीक्षण पर सजा का प्रावधान है तो ऐसे मां-बाप को क्यों नहीं दंडित किया जाना चाहिए जो अपने किन्नर बच्चों को कहीं छोड़ आते हैं?’

आपका  ‘थर्ड जेंडर’  यानी किन्नरों की जिंदगी पर आधारित  उपन्यास  ‘नालासोपारा पो. बॉक्स नं. 203’  हाल ही में प्रकाशित हुआ है. किन्नरों की जिंदगी पर उपन्यास लिखने का विचार कहां से आया? इस उपन्यास में खास क्या है? इस उपन्यास में मैंने आजाद भारत में किन्नरों की स्थिति पर प्रकाश  

बुत को पूजते हैं पर इंसानियत की कीमत  पता नहीं

ये घटना बीते साल की है. हमारे शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक छोटा पर प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर है, जहां हर महीने की 17 तारीख को मेला लगता है. इस मेले में आसपास के क्षेत्रों के लोग अच्छी-खासी संख्या में जुटते हैं. मंदिर बहुत बड़ा और व्यवस्थित नहीं  

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है. एक पूरब मुंह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर. एक सिर पर कुछ बाल बढ़ाना चाहता है, तो दूसरा दाढ़ी. एक मूंछ कतरने के लिए कहता है, तो दूसरा मूंछ रखने के लिए. एक जानवर का  

‘मित्रो’ को आज अपनी सेक्सुअल डिजायर व्यक्त करने का अधिकार है और इसे उसने अर्जित किया है…

‘मित्रो मरजानी’  के 50 साल पूरे हुए हैं, आज मित्रो को कहां पाती हैं? अब मित्रो सिर्फ एक किताब नहीं रही, समय के साथ-साथ वह एक व्यक्तित्व में बदल गई है. वह अब एक संयुक्त परिवार की स्त्री नहीं है जो हर बात में पीछे रखी जाती है. उसे अपनी  

हम नास्तिक क्यों हैं…

‘देखिए भैया, हम बहुत मेहनत करके शाम की रोटी का जुगाड़ करते हैं. हमें ये पता है कि हम मेहनत नहीं करेंगे तो बच्चों के साथ भूखा ही सोना पड़ेगा. ऐसे में हम अपनी मेहनत का श्रेय भगवान को नहीं दे सकते. या कहिए कि हम भगवान को नहीं मानते