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पाक की संप्रभुता स्वीकार नहीं कर पाए हैं दक्षिणपंथी

पहली बात तो जिस एकीकरण के विचार की बात की जा रही है मैं उस पर ज्यादा जानकारी नहीं रखती. पहली बार मार्च 2006 में वर्ल्ड सोशल फोरम के आयोजन के दौरान कुछ भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मित्रों ने बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल फोरम (बीबीपीपीएफ) के विचार पर चर्चा की. फोरम में  

अखंड भारत की शुरुआत सांस्कृतिक भारत से होगी

तीनों देशों को मिलाकर अखंड भारत कहने की जगह हम इसको सांस्कृतिक भारत और बृहत्तर भारत कहेंगे. सांस्कृतिक भारत की जब हम बात करते हैं तो तीनों देशों में जो भी सांस्कृतिक प्रतीक हैं, जो कि तीनों देशों में हमें प्राप्त हैं, जैसे- नदियों के नाम हैं, प्रमुख नगरों के  

अखंड भारत का सिद्धांत पूरी तरह से सांस्कृतिक विचार है

एकः शब्दः सम्यक् ज्ञात सुप्रयुक्त, र्स्वगलोके कामधुग्भवति यानी सही समय और सही जगह पर प्रयोग किया गया एक शब्द भी जीवनपर्यंत और उसके बाद भी उपयोगी होता है. पतंजलि का यह सूत्र अखंड भारत पर मेरे दिए गए बयान पर हुए विवाद के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है. एक  

‘लग रहा था कि विदेश नीति में कुछ चमत्कार-सा होने जा रहा है लेकिन सब कुछ मोर का नाच साबित हुआ’

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ​ही अद्भुत कार्य किया था. सारे पड़ोसी देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को निमंत्रण दिया था कि उनके शपथ ​लेने के समय भारत आएं. ऐसा संकेत उनके पहले भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने ​नहीं दिया था. उस अवसर की सबसे बड़ी खूबी यह थी  

दो साल की मोदी सरकार, अच्छे दिनों का इंतजार

तीस साल बाद केंद्र में प्रचंड बहुमत से आई मोदी सरकार अपने दो साल पूरे कर रही है. निजी तौर पर नरेंद्र मोदी ने सत्ता की दौड़ में अपने प्रतिद्वंद्वी गठबंधन यूपीए (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस) को काफी पीछे छोड़ते हुए एनडीए (नेशनल डेेमोक्रेटिक एलायंस) को जबरदस्त बढ़त दिलाई और प्रधानमंत्री  

भगत सिंह वही न जो भारतीय फिल्मों में एक्टिंग करता है !

अगर आप पाकिस्तान में किसी से शहीद भगत सिंह के बारे में पूछेंगे तो बड़े अजीबोगरीब जवाब मिलेंगे. शायद आटे में नमक के बराबर लोग भगत सिंह को जानते हैं या यह कि वे क्यों, कब और कैसे शहीद हुए. भगत सिंह को न जानने की सबसे बड़ी वजह यह  

मै नास्तिक क्यों हूं?

एक नया प्रश्न उठ खड़ा हुआ है. क्या मैं किसी अहंकार के कारण सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी तथा सर्वज्ञानी ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता हूं? मेरे कुछ दोस्त- शायद ऐसा कहकर मैं उन पर बहुत अधिकार नहीं जमा रहा हूं- मेरे साथ अपने थोड़े से संपर्क में इस निष्कर्ष पर  

‘हम चाहते हैं कि दुनिया देखे कि पाकिस्तानी तंगनजर नहीं हैं, वे हीरो का एहतराम करते हैं, चाहे वह किसी भी मजहब से क्यों न हो’

भगत सिंह को निर्दोष साबित करने का विचार कहां से आया? इसकी शुरुआत कैसे हुई? देखिए, भगत सिंह निर्विवाद रूप से आजादी के सबसे बड़े हीरो हैं. मेरे पूर्वजों ने भी आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी. वे आपके हरियाणा के सिरसा में रहते थे. वहां हमारे पूर्वज बाबा गुलाब  

आजादी तो मिल गई है पर हमें पता नहीं कि उसका करना क्या है?

लगभग बीस साल पहले की बात है. कलकत्ता के ‘फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की ओर से ‘दो बीघा जमीन’ फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय और हमें यानी उनके साथियों को सम्मान दिया जा रहा था. ये एक साधारण पर रुचिकर समारोह था. बहुत अच्छे भाषण हुए, पर श्रोता बड़ी उत्सुकता के