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मोदी जी के पीएम बनने के बाद संघ के लोगों को चर्बी चढ़ गई है : जिग्नेश मेवाणी

हमारे समाज में गाय को आधार बनाकर छुआछूत की परंपरा पुरानी है. पर अब इसके बहाने दलितों को पीटा जा रहा है. देखिए, और कोई पशु माता नहीं है तो गाय ही माता क्यों है? यह सबसे अहम सवाल है. गाय को पवित्र बनाकर लंबे अरसे से एक राजनीति चल  

राजनीति का नया कलाम, ‘जय भीम – लाल सलाम’

जेएनयू में कथित देशविरोधी नारे को लेकर बवाल हुआ तो छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी से पहले उनके भाषण में ‘जय भीम, लाल सलाम’ का नारा शामिल था. उन्होंने अपने भाषण में कहा, ‘जब हम महिलाओं के हक की बात करते हैं तो ये (संघ-भाजपा के लोग) कहते हैं  

‘मित्रो’ को आज अपनी सेक्सुअल डिजायर व्यक्त करने का अधिकार है और इसे उसने अर्जित किया है…

‘मित्रो मरजानी’  के 50 साल पूरे हुए हैं, आज मित्रो को कहां पाती हैं? अब मित्रो सिर्फ एक किताब नहीं रही, समय के साथ-साथ वह एक व्यक्तित्व में बदल गई है. वह अब एक संयुक्त परिवार की स्त्री नहीं है जो हर बात में पीछे रखी जाती है. उसे अपनी  

‘नायक नहीं आंदोलन महत्वपूर्ण है’

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाहर और भीतर पिछले दिनों जो कुछ हुआ वह एक राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना और चैनलों से लेकर अखबारों और सोशल मीडिया के साथ-साथ इंटरनेट पर उपलब्ध ई-पत्रिकाओं में भी उसकी भरपूर धमक रही. अंतरिम जमानत पर रिहाई के बाद जेएनयू के छात्रों  

‘हर विश्वविद्यालय जेएनयू जैसा होना चाहिए’

सालों से हम इस बहस में उलझे थे कि क्या जेएनयू की दुनिया नॉर्थ गेट पर जाकर वाकई खत्म हो जाती है? इसका जवाब ‘हां’ भी था और ‘ना’ भी. तमाम बहस-मुबाहिसे जेएनयू की चौहद्दी पर पहुंचते ही दम तोड़ देते थे. हालांकि ‘राष्ट्रवाद’ और ‘राष्ट्रद्रोह’ के मुद्दे पर जेएनयू  

एक था चंदू

दुनिया में वामपंथ का सबसे मजबूत किला ढह चुका था. दुनिया तेजी से पूंजीवाद की ओर बढ़ रही थी. उदारीकरण भारत की दहलीज लांघकर अपने को स्थापित कर चुका था. तमाम धुर वामपंथी आवाजें मार्क्सवाद के खात्मे की बात कह रही थीं. उसी दौर की बात है, जब जेएनयू कैंपस  

संघ और भाजपा का राष्ट्रवादी पाखंड

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकताओं ने हैदराबाद और जेएनयू में ‘मुखबिर’ की तरह सक्रियता दिखाई. देश जानना चाहता है कि हरियाणा में 9 दिनों के उपद्रव के दौरान वे कहां थे? वे वहां जातीय झगड़े की आग को बुझाते हुए नहीं दिखे. क्या वे वहां भीड़ का हिस्सा थे?   

पटियाला हाउस कोर्ट के बाद इलाहाबाद कचहरी में प्रदर्शनकारियों पर वकीलों का हमला

रोहित वेमुला और जेएनयू प्रकरण को लेकर इलाहाबाद कचहरी में धरना दे रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं पर गुरुवार को वकीलों ने हमला कर दिया. धरना दे रहे लोगों को ‘देशद्रोही’ और ‘पाकिस्तान समर्थक’ कहकर उन पर हमला किया गया. इस हमले में कुछ छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं. हमलावरों  

देशद्रोही जेएनयू बनाम राष्ट्रवादी सरकार

जेएनयू में देशविरोधी नारा लगाने का मसला उसी तरह गड्ड-मड्ड हो गया है जैसे आजकल की देशभक्ति. एक टीवी चैनल और फिर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दिखाया गया था कि नौ फरवरी को जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाए जा रहे हैं. उसी आधार पर कुछ छात्रों को  

‘असली निशाना तो जेएनयू की संस्कृति  और लोकतांत्रिकता है’

  देखिए, पहली बात कि मैं यह कन्फर्म नहीं कर सकता कि नौ फरवरी को वह घटना घटी या नहीं, क्योंकि मैं डीयू में एक सेमिनार में था. इसलिए उस घटना के बारे में कोई राय नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मान लिया ऐसी कोई