राजीव गांधी Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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अखंड भारत की बात संघ की मूर्खता का प्रमाण

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण की तो चर्चा ही नहीं की जानी चाहिए. मेरे ख्याल से ऐसा कुछ बोलने के लिए अपना मुंह ही नहीं खोलना चाहिए. इन देशों का अब तक दो मर्तबा विभाजन हो चुका है. एक 1947 में जब पाकिस्तान बना और एक बार 1971 में  

‘गांधी’ जो नाव डुबोए…

कहावत है कि राजनीति में कुछ भी पुराना नहीं होता है. भारतीय राजनीति में तो नारे, जुमले, भाषण आदि में से कुछ भी पुराना नहीं हो रहा है. गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसी बातों पर साठ-सत्तर के दशक में जैसे नारे और भाषण दिए जाते थे वैसे आज भी दिए जा  

‘लोगों की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, बहस इस पर होनी चाहिए राष्ट्रवाद पर नहीं’

किसी से आप पूछेंगे कि वह किसको मानता है राष्ट्रवाद तो वह नहीं बता पाएगा. कुछ धुंधली-सी अवधारणा है लोगों के दिमाग में कि मुल्क हमेशा खतरे में रहता है, सैनिक उसकी रक्षा करते हैं, वे मारे जाते हैं, और इधर बुद्धिजीवी हैं जो तरह-तरह से सवाल उठाते रहते हैं,  

‘गंगा को लेकर रोमांटिक नजरिया छोड़ना होगा, अगर उसे बुखार है तो ब्यूटी पार्लर ले जाने की जरूरत नहीं’

गंगा को लेकर हर कुछ दिन पर कोई न कोई बात होती रहती है. कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा में जल परिवहन को फिर से शुरू करने के लिए योजनाओं का एक खाका पेश करते हुए संसद में बताया था कि उन्होंने पूरी तैयारी कर ली  

भारतीय खुफिया संस्थाएं

अल्पसंख्यकों का प्रवेश वर्जित है?  

प्रहसन एक पूर्व प्रधानमंत्री की मौत का

राजीव गांधी हत्याकांड का मामला 23 साल बाद भी अंतिम न्याय लिखे जाने का इंतजार कर रहा है.  

प्रियंका गांधी: देश में लिंगभेद का सबसे बड़ा प्रतीक?

बात तकरीबन 27 साल पुरानी है. नाइजीरिया के एक स्कूल ने क्लास मॉनीटर बनाने के लिए यह नियम बनाया कि क्लास में फर्स्ट आने वाले बच्चे को ही मॉनीटर चुना जाएगा. खड़े होकर अपने सहपाठियों की निगरानी करना और शोर मचाने वालों के नाम ब्लैक बोर्ड पर लिखना नौ साल  

चंद्रशेखर

बड़ी आशाओं के साथ  जनता पार्टी सरकार 1977 में सत्ता में आई थी. पर जब यह लगने लगा कि यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ रही है तो उस वक्त सरकार चलाने वालोें को कुछ शुभचिंतकों ने सलाह दी कि इन  टकरावों को टालने का रास्ता यह है कि किसी  

श्रेय उस समय को है

अपनी चर्चित कहानी ‘चिठ्ठी’ की रचना प्रक्रिया के बारे में कथाकार अखिलेश की टिप्पणी.