माओवादी Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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महाश्वेता का महासमर

कोलकाता के दो रहस्य कभी नहीं खुलेंगे. एक बाॅटनिकल गार्डन के वट वृक्ष का और दूसरा महाश्वेता देवी का. वट वृक्ष का हर एक तना मूल होने का अहसास देता है. लेकिन कहा जाता है कि उसका मूल (जड़) तो बहुत पहले आंधी-तूफान में गिर गया पर खासियत यह है  

आदिवासी हूं, मुश्किलों को चुनौती नहीं मानता और खुद को माओवादी कहे जाने से भी नहीं घबराता : बीजू टोप्पो

आपने बीकॉम की पढ़ाई की है, पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती-किसानी की है. फिर कैमरे से लगाव कैसे हो गया? जब मैं रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ रहा था तभी से राजनीति और सामाजिक सरोकारों में मन रम गया था. रांची आया तो हमारे कुछ साथियों ने मिलकर पलामू छात्रसंघ  

बच्चों को हथियार बनाते माओवादी!

तीन मार्च को झारखंड के गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड के जमदी और कटिया गांवों से एक खबर आती है. भाकपा माओवादी ने दोनों गांवों से बच्चों की मांग की है. इसे न मानने पर जंगल से जलावन के लिए लकड़ी काटने और पशुओं को चराने पर रोक लगा देने  

नर्क बना नेपाल

रात के 11 बजे काठमांडू शहर नींद में डूब चुका था. कुछ गिनी चुनी टैक्सियों को छोड़कर सड़क पर हलचल का कोई निशान नहीं था. हमारे संपर्क सूत्र ने हमें बताया कि यहां इस समय टैक्सी मिलना मुश्किल है इसलिए यह अच्छा होगा कि हम बसअड्डे के पास ही किसी  

बस्तर में दोधारी तलवार पर चलते हैं पत्रकार

सोमारू नाग और संतोष यादव की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग करते हुए पत्रकार आंदोलन कर रहे हैं. इसके जरिये राज्यभर के पत्रकारों को कथित पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ एकजुट होने की अपील की जा रही है. पिछले दिनों राजस्थान पत्रिका समूह के  

‘जेएनयू जैसी सामाजिक बनावट संविधान में भी नहीं’

पांचजन्य ने अपने लेख में जो आरोप लगाया है कि जेएनयू नक्सली, माओवादी या आतंकियों के समर्थकों का केंद्र है, यह झूठ है. वे किस मंशा से ऐसा कह रहे हैं, यह उन्हीं को बेहतर पता होगा. संघ और भाजपा से भी जुड़े कई लोग वहां से पढ़कर निकले हैं.  

माओवादी और काॅरपोरेट ने पिछले 15 सालों में झारखंड को तिजोरी की तरह ही देखा

झारखंड 15 साल का हो गया. आप जैसे लोग झारखंड आंदोलन से जुड़े रहे हैं. इस 15 सालों के सफर में झारखंड की दशा-दिशा पर क्या सोचते हैं? झारखंड बनने के लिए लंबा आंदोलन चला. राज्य बनने के पहले भीतरी-बाहरी की लड़ाई थी. हम लोगों ने समझ लिया कि ऐसा  

‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’

लगभग 90 प्रतिशत विकलांग साईबाबा को नागपुर जेल के बदनाम ‘अंडा सेल’ में रखा गया. इस दौरान उचित देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के बिना साईबाबा की तबीयत कई बार बिगड़ी. साईबाबा ने अपनी गिरफ्तारी और पुलिस प्रताड़ना के बारे में दीप्ति श्रीराम से बात की  

‘माओवादियों को हर तरह के अतिवाद से बचना होगा’

रामशरण जोशी पत्रकार, संपादक, समाजविज्ञानी और मीडिया के अध्यापक रहे हैं. वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल में पांच सालों तक पूर्णकालिक प्रोफेसर रहे. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में विजिटिंग प्रोफेसर रहे. प्रो. जोशी राष्ट्रीय बाल भवन के अध्यक्ष और केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे . इनकी महत्वपूर्ण कृतियां में आदमी, बैल और सपने, आदिवासी समाज और विमर्श, 21वीं सदी के संकट, मीडिया विमर्श आदि हैं. हाल...  

बे-सबक तैयारी का हादसा!

छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों पर हालिया माओवादी हमले के पहले दर्जनों बड़े हमले हो चुके हैं. लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी खुफिया तंत्र की नाकामयाबी से लेकर सुरक्षा में गंभीर लापरवाही तक की बातें फिर सामने आ रही हैं