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‘देश के सम्मान के लिए आमिर ऑटोरिक्शा वालों को अच्छा व्यवहार करने की सीख देते हैं, उन्हें वैसी ही सीख पत्नी को भी देनी चाहिए’

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर बिहार चुनाव नतीजों का क्या असर पड़ा? क्या किसी बदलाव के बारे में सोचा जा रहा है? बिहार चुनाव विधानसभा का चुनाव था. भाजपा में एक पूरी प्रक्रिया है जिसके तहत राज्यों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हम चुनाव कार्य संपन्न कराते हैं. वह प्रक्रिया  

बिहार में दलित राजनीति को नेतृत्व की दरकार

रमाशंकर आर्य पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. वे दलित मसलों के जानकार हैं. बिहार के चुनाव परिणाम से खुश दिखते हैं. उनकी खुशी का राज भाजपा की हार में छिपा है. कहते हैं, ‘चलिए यह अच्छा हुआ कि रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी की हार हुई. यह उनके लिए  

‘हमारा दृढ़ विश्वास मंगलराज में है, हमने अपने 15 वर्ष के शासन के दौरान बेजुबान लोगों को जुबान दिया’

क्या विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की इतनी बड़ी जीत की उम्मीद आपको थी? पूरा दो सौ प्रतिशत. जदयू और कांग्रेस के संग महागठबंधन बनने के दिन से ही उम्मीद थी. बिहार में राजग के किसी भी नेता में मुझे हरा देने का दम नहीं है. प्रचार के दौरान ही हमने  

इम्तिहां और भी हैं…

कांग्रेसियों के बारे में कहा जाता है कि जब वे सत्ता में होते हैं, तभी नियंत्रित रहते हैं, एकजुट रहते हैं. सत्ता से हटते ही अनुशासन का आवरण उनसे हटने लगता है आैैर बिखराव शुरू हो जाता है. इसके उलट समाजवादियों के बारे में कहा जाता है कि वे संकट  

तुरुप का इक्का

67 साल की उम्र. 11 सालों तक खुद चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति. पिछले लोकसभा चुनाव में पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती, दोनों की बुरी हार. लोकसभा चुनाव के पहले ही दिल का ऑपरेशन और डॉक्टरों की सख्त हिदायत कि न ज्यादा भागदौड़ करनी है, न ही तनाव  

विकास पर भारी जुबानी बिसात

बिहार में इस बार का चुनाव कई मायने में दिलचस्प है. 2010 से 2015 के बीच जो विधानसभा के सदस्य रहे, उनमें से सारे सत्ता और विपक्ष दोनों का मजा ले चुके हैं. जदयू सत्ता में भी रही है और एक दिन के लिए विपक्ष में भी, जब जीतन राम  

‘दो महानायकों के बीच फंसे नीतीश’

इस बार बिहार का चुनाव दिलचस्प दौर से गुजर रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में जो जनादेश आया था, उसे नीतीश कुमार ने नई कहानी की संज्ञा दी थी. बेशक वह नई कहानी थी भी. जाति की राजनीति पर विकास के एजेंडे की जीत के तौर पर उस जनादेश को  

भाजपा-2 में मंडल और कमंडल दोनों समाहित हैं

एक पखवाड़े पहले तक भाजपा और उसके साथियों का समूह यानी राजग जिस तरह की बढ़त लिए हुए दिख रहा था, अब वैसी स्थिति नहीं है. लालू प्रसाद-नीतीश कुमार और कांग्रेस के योग से बने महागठबंधन की स्थिति बेहतर होती हुई दिखी है. इसके पीछे का आधार रणनीतिक तौर पर  

‘बिहार के लोग लालू और नीतीश से ऊब गए हैं, अब वे बदलाव चाहते हैं’

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे? विधानसभा चुनाव पर मेरे पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. जनता परिवार से जुड़ी खबरें रोजाना मीडिया में आ रही हैं, इसलिए आप वह सब कुछ जान ही रहे होंगे जो इस राज्य की राजनीति में घट रहा है.  

अब की बार, किसका बिहार ?

इंजीनियर संतोष यादव बिहार के एक युवा राजनेता हैं. राजनीति में बेहद सक्रिय. उनके लिए राजनीति ही ओढ़ना-बिछौना जैसा है. वह जदयू से ताल्लुक रखते हैं. सामाजिक न्याय की राजनीति के पक्षधर हैं और उसकी समझ भी रखते हैं. वैचारिक नजरिये और व्यावहारिक रूप से भी. मधुबनी जिले के युवा