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पंजाब की राजनीति का ‘गुरु’ फैक्टर

दुनिया भर के गेंदबाजों की नाक में दम करने वाले क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति की पिच पर अपने खेल से सबको चौंका रहे हैं. अपनी कंमेंट्री, अपने हंसने के अंदाज और चुटीले संवाद के लिए मशहूर पूर्व सलामी बल्लेबाज सिद्धू का गेम प्लान विश्लेषकों की समझ  

‘हां, मैं चाहती हूं कि चुनाव प्रचार की कमान कैप्टन अमरिंदर सिंह ही संभाले’

आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत की क्या संभावनाएं देखती हैं? कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने के लिए तैयार है. जीत के लिए अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं. पिछले चुनावों में भी करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों में जीत का मार्जिन बहुत कम था. हम पंजाब चुनावों के इतिहास में  

फर्ज का एनकाउंटर

12 जुलाई, 1991 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश स्थित नानकमत्था गुरुद्वारे (अब उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में) से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र स्थित सिख धर्मस्थलों के दर्शन के लिए चली तीर्थयात्रियों से भरी एक बस अपनी यात्रा पूरी करके वापस लौट रही थी. बस में उस समय 25 लोग  

हुआ यूं था : जब कनाडा से बैरंग लौटे सिखों पर की थी ब्रिटिश सेना ने फायरिंग

हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडू ने कनाडा सरकार के पूर्व में लिए गए एक फैसले के संबंध में सिख परिवारों से माफी मांगने की बात कही तो इतिहास की एक घटना की याद जेहन में ताजा हो उठी. अगले महीने इस घटना काे 102 साल पूरे हो  

‘23 साल का वह क्रांतिकारी इतना बड़ा हो गया है कि उस पर कोई पगड़ी फिट नहीं हो सकती’

भगत सिंह पर दावेदारी कोई नई बात नहीं है. यह काफी समय से जारी है. खास तौर पर जब से भगत सिंह की जन्म शताब्दी आई. जन्म शताब्दी वर्ष यानी 2007 में, पूरे वर्ष भगत सिंह के सिर पर पगड़ी पहनाने का प्रयास हुआ. पहले कभी-कभार हुआ करता था, फिर  

सतलुज-यमुना लिंक नहर सींच रही राजनीति की फसल

पंजाब विधानसभा चुनावों में साल भर से भी कम का समय रह गया है. राज्य भर में फैली सत्ता विरोधी लहर और सरकार के प्रति गुस्से के बीच से निकलने के लिए सतलुज-यमुना लिंक कैनाल (मालिकाना हकों का स्थानांतरण) विधेयक, 2016 को पारित करना सरकार के लिए जनता के खोए  

पंजाब में उम्मीदों भरी ‘आप’

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसमें सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा गठबंधन के साथ मुख्य विपक्षी कांग्रेस और लोकसभा चुनावों में अपने सफल प्रदर्शन से सबको आश्चर्यचकित कर देने वाली आम आदमी पार्टी (आप) भी शामिल हैं. हालांकि पिछले विधानसभा चुनावों से इस बार  

विद्यार्थी और राजनीति

इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान (विद्यार्थी) राजनीतिक या पॉलिटिकल कामों में हिस्सा न लें. पंजाब सरकार की राय बिल्कुल ही न्यारी है. विद्यार्थी से कॉलेज में दाखिल होने से पहले इस आशय की शर्त पर हस्ताक्षर करवाए जाते हैं कि वे  

जिनको हाशिये पर भी जगह नहीं

चार साल पहले मिर्चपुर से दर-बदर कर दिए गए लगभग 120 दलित परिवार लोकतंत्र के हालिया उत्सव का भी हिस्सा नहीं बन सके. आखिर किसी भी राजनीतिक दल की चिताओं में ये पीड़ित क्यों शामिल नहीं हैं?  

‘ नेताओं ने प्रशासन को पंगु बना दिया है’

एचएस फुल्का 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने वाले शख्स के तौर पर जाने जाते हैं. लेकिन उनका परिचय सिर्फ इतना नहीं है. वे कई साल से पंजाब में किसानों के हक के लिए और नशे की समस्या के खिलाफ भी लड़ते रहे हैं