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गाद, गंगा और फरक्का बांध

बीते 16 जुलाई की बात है. नई दिल्ली में अंतरराज्यीय परिषद की बैठक थी. सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तमाम मुद्दों को उठाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरक्का बैराज परियोजना पर भी सवाल उठा  

कसाई की दुकान पर बकरा नहीं पाला जा सकता : मुनव्वर राना

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश- तीनों मुल्कों के एकीकरण की बात बार-बार उठती है. एकीकरण पर आपका क्या नजरिया है? देखिए, मुल्क भी घर की तरह होते हैं. जब घर में एक बार दीवारें उठ जाती हैं तो टूटती नहीं हैं. इसलिए ये नामुमकिन है कि तीनों मुल्क एक हो जाएंगे.  

अखंड भारत की बात संघ की मूर्खता का प्रमाण

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण की तो चर्चा ही नहीं की जानी चाहिए. मेरे ख्याल से ऐसा कुछ बोलने के लिए अपना मुंह ही नहीं खोलना चाहिए. इन देशों का अब तक दो मर्तबा विभाजन हो चुका है. एक 1947 में जब पाकिस्तान बना और एक बार 1971 में  

‘लग रहा था कि विदेश नीति में कुछ चमत्कार-सा होने जा रहा है लेकिन सब कुछ मोर का नाच साबित हुआ’

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ​ही अद्भुत कार्य किया था. सारे पड़ोसी देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को निमंत्रण दिया था कि उनके शपथ ​लेने के समय भारत आएं. ऐसा संकेत उनके पहले भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने ​नहीं दिया था. उस अवसर की सबसे बड़ी खूबी यह थी  

दो साल की मोदी सरकार, अच्छे दिनों का इंतजार

तीस साल बाद केंद्र में प्रचंड बहुमत से आई मोदी सरकार अपने दो साल पूरे कर रही है. निजी तौर पर नरेंद्र मोदी ने सत्ता की दौड़ में अपने प्रतिद्वंद्वी गठबंधन यूपीए (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस) को काफी पीछे छोड़ते हुए एनडीए (नेशनल डेेमोक्रेटिक एलायंस) को जबरदस्त बढ़त दिलाई और प्रधानमंत्री  

अफीम की घुट्टी है राष्ट्रवाद

भाजपा सरकार एक तरफ आंबेडकर को अपना नायक बताने की कोशिश करती है और दूसरी तरफ दलित बुद्धिजीवियों समेत दलित समुदाय पर हमले भी कर रही है. बात एकदम साफ है. आंबेडकर का एक तरह से एप्रोप्रिएशन यानी अपनाने की प्रक्रिया तो बहुत पुरानी स्थिति है. यह एक ऐतिहासिक तथ्य  

‘सुषमा स्वराज कहीं बेहतर कर सकती थीं, लेकिन उनके पूरे काम पर प्रधानमंत्री कार्यालय का ग्रहण लगा हुआ है’

मोदी की विदेश नीति के बारे में आप क्या सोचते हैं? यह काफी निराशाजनक है! उन्हें विदेश नीति की समझ नहीं है. भारत दुनिया का कोई पुलिसमैन नहीं है और उसे वैसा होने की इच्छा भी नहीं रखनी चाहिए. आपको अच्छा संवाद आना चाहिए. आप एकतरफा बात नहीं कर सकते.  

हम किरायेदार हैं, मालिक नहीं

नेपाल में जो हुआ है वो हाल के दिनों की एक बड़ी त्रासदी है. यह ऐसी त्रासदी है जिसे हम रोक नहीं सकते थे. पृथ्वी ग्रह पर हम एक किरायेदार की तरह हैं लेकिन हमने खुद को मालिक समझ लिया है. हमने बहुत समय से किराया देना बंद कर दिया  

विकास या फिर विनाश की पटकथा

हम हर त्रासदी के बाद जगते हैं और फिर सो जाते हैं. यही हमारे काम करने का तरीका है. आज से दो साल पहले केदारनाथ में त्रासदी आई थी. वहां भी भारी संख्या में क्षति हुई थी. उस त्रासदी में जो भी क्षति हुई उसकी मुख्य वजह यह थी कि  

नेपाल में शांति होगी तभी भारत में शांति बनी रहेगी’

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और यूसीपीएन (माओवादी) के नेता बाबूराम भट्टराई मार्च के पहले सप्ताह में भारत यात्रा पर थे. अपनी इस यात्रा के निहितार्थों और नेपाल-भारत संबंध पर भट्टराई ने बेहद साफगोई के साथ तहलका से बातचीत की