दिल्ली विश्वविद्यालय Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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‘23 साल का वह क्रांतिकारी इतना बड़ा हो गया है कि उस पर कोई पगड़ी फिट नहीं हो सकती’

भगत सिंह पर दावेदारी कोई नई बात नहीं है. यह काफी समय से जारी है. खास तौर पर जब से भगत सिंह की जन्म शताब्दी आई. जन्म शताब्दी वर्ष यानी 2007 में, पूरे वर्ष भगत सिंह के सिर पर पगड़ी पहनाने का प्रयास हुआ. पहले कभी-कभार हुआ करता था, फिर  

‘नायक नहीं आंदोलन महत्वपूर्ण है’

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाहर और भीतर पिछले दिनों जो कुछ हुआ वह एक राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना और चैनलों से लेकर अखबारों और सोशल मीडिया के साथ-साथ इंटरनेट पर उपलब्ध ई-पत्रिकाओं में भी उसकी भरपूर धमक रही. अंतरिम जमानत पर रिहाई के बाद जेएनयू के छात्रों  

‘मुझे बस यही समझ में आया कि मेरे जैसों की मुक्ति किताबों के माध्यम से ही संभव है’

बोकारो में पापा की पोस्ट ऑफिस में नौकरी से घर का गुजारा किसी तरह चल जाता था. उन दिनों काॅलेज की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाने का जिक्र करने पर माली हालत की वजह से पापा ने साफ मना कर दिया था. मैंने सुना था कि दिल्ली में लोग ट्यूशन  

‘कांग्रेस ने छात्रसंघों का अपराधीकरण किया’

छात्र राजनीति के लगभग खात्मे की कोई एक वजह नहीं है. ऐसी बड़ी सामाजिक-राजनीतिक परिघटना के अनेक कारण होते हैं. 70 के दशक के बाद बदलाव का बड़ा बिंदु है आपातकाल. उस दौरान दो चीजें हुईं. एक तो आपातकाल के खिलाफ बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ. जिसमें समाजवादी छात्र संगठन,  

शिक्षा बचाने का संघर्ष

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नॉन नेट फेलोशिप खत्म करने का निर्णय लेने के बाद देश के कई विश्वविद्यालयों में शुरू हुआ आंदोलन खत्म होने की जगह बढ़ता जा रहा है. हालांकि, बाद में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फेलोशिप खत्म न करने की बात कही, लेकिन छात्र-छात्राओं ने फेलोशिप  

यूजीसी का स्वप्न, छात्रों का दुःस्वप्न

वे छात्र जो मतदान करके सरकार चुन सकते हैं, उच्च स्तरीय शोध पत्र लिख सकते हैं, वे शैक्षिक टूर पर जाने जैसे निर्णय खुद नहीं ले सकते. इसके लिए उन्हें अभिभावक के अनुमति लेना अनिवार्य है. इसके अलावा उन्हें खुफिया निगरानी में रखा जाना चाहिए ताकि उनके लिए ‘सुधारात्मक कदम’  

‘मुझे माओवादी आंदोलन के शहरी चेहरे के रूप में पेश करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है’

लगभग 90 प्रतिशत विकलांग साईबाबा को नागपुर जेल के बदनाम ‘अंडा सेल’ में रखा गया. इस दौरान उचित देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के बिना साईबाबा की तबीयत कई बार बिगड़ी. साईबाबा ने अपनी गिरफ्तारी और पुलिस प्रताड़ना के बारे में दीप्ति श्रीराम से बात की  

‘मैं चिकित्सा की प्रयोगशाला का शिकार हुआ’

मुकेश रावत लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं  

दिल्ली विश्वविद्यालय विवाद: उच्च शिक्षा, उच्चतर सत्यानाश

दिल्ली विश्वविद्यालय ने जिस तरह से अपने यहां चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू किया था उसका परिणाम ऐसा ही होना था. लेकिन इसे इस तरह भी नहीं होना चाहिए था.