‘मोदी बिहार का जितना दौरा करेंगे, उतना फायदा हमें मिलेगा’

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पिछले दिनों बिहार विधान परिषद चुनावों में पार्टी के लचर प्रदर्शन को लेकर शरद यादव ज्यादा चिंतित नहीं हैं. उनका मानना है कि चुनावों में धन का दुरुपयोग लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है और इससे हुए नुकसान की भरपाई मुश्किल है. वे बताते हैं, ‘उन चुनावों से हमारा ज्यादा लेना-देना नहीं था. हमने कभी भी ऐसे चुनावों में दिलचस्पी नहीं ली है. भाजपा ने वोट के लिए पैसे दिए. उन्होंने पैसा बांटकर चुनाव में जीत हासिल की.’

यादव के अनुसार, आज की तारीख में चुनाव केवल पैसों से नहीं बल्कि जाति के आधार पर भी लड़ा जा रहा है. जदयू अध्यक्ष का कहना है, ‘चुनाव हर चीज को मिलाकर लड़ा जाता है. सामाजिक गैर-बराबरी और आर्थिक गैर-बराबरी की समस्या बरकरार है. यह सब सालों से चलता आ रहा है. जो लोग जाति आधारित राजनीति करते हैं, वे हर तरह के फायदे में हैं. वे हाशिये के लोगों, शोषितों और वंचितों के बारे में कभी बात नहीं करते हैं. हमारी पार्टी सभी के बारे में बात करती हैं लेकिन वे केवल हिंदू और मुस्लिमों के बारे में बात करते हैं.’

शरद यादव का कहना है कि वोट बैंक का किसी पार्टी से नाता नहीं होता है. ‘2014 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को सफलता इसलिए मिली क्योंकि सपा और बसपा के बीच दरार थी. अगर ऐसा नहीं होता तो आम चुनावों के नतीजे कुछ अलग ही होते.’

भाजपा को शिकस्त देने के सवाल पर वे कहते हैं, ‘ये संभव है कि मोदी लहर हो लेकिन बिहार में इन बातों का असर नहीं पड़ेगा. एक बात तो तय है कि केवल वाक-चातुर्य से देश नहीं चल सकता. 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान किए गए वायदे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं. भाजपा के नेता भाषण देते समय सिर्फ अटल बिहारी वाजपेयी की नकल कर रहे हैं. हमारे पास जय प्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं की विरासत है लेकिन हम किसी की नकल नहीं करते.’

नरेंद्र मोदी के बारे में उनका कहना है, ‘मोदी जितना ज्यादा बिहार के दौरे पर जाएंगे, उसका उतना फायदा हम लोगों को मिलेगा.’

नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के गठजोड़ की वजह से बिहार में भाजपा को चुनौती तो मिलेगी. देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान शरद यादव की उम्मीदें पूरी होंगी या फिर आम चुनावों की तरह मोदी लहर का ही जादू चलेगा.

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