पंजाब में उम्मीदों भरी ‘आप’

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पंजाब में हो रही आम आदमी पार्टी की सभाओं में भरी भीड़ जुट रही है

पंजाब कांग्रेस में अमरिंदर सिंह, राजिंदर कौर भट्टल, प्रताप बाजवा, सुनील जाखड़ जैसे कई धड़े हैं. इन्हें साथ में लाना कांग्रेस के लिए कठिन होगा. इसके अलावा दिल्ली में के प्रदर्शन का पंजाब में असर बताया जा रहा है. केजरीवाल सरकार दिल्ली में जो भी अच्छे काम कर रही है, पार्टी कार्यकर्ता पंजाब में उसका प्रचार-प्रसार करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पंजाब का दिल्ली से नजदीक होना और दिल्ली में बड़ी संख्या में पंजाबियों का रहना भी पार्टी के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है. इसके अलावा कनाडा समेत दूसरे देशों में रहने वाले पंजाबियों को भी आम आदमी पार्टी अपनी तरफ खींचने में सफल होने का दावा कर रही है. ये लोग न सिर्फ राजनीतिक दलों को चंदा देते हैं बल्कि जमीनी स्तर पर उनके पक्ष में माहौल तैयार करने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.

पंजाब में आम आदमी पार्टी जिस तरह से दलित वोट बैंक को अपनी तरफ करने में जुटी है वह बसपा के लिए चिंताजनक बात है. इसके नेता अरविंद केजरीवाल ने इसी रणनीति के चलते पंजाब रैली की शुरुआत के पहले बनारस में रविदास जयंती मनाई.

 पंजाब विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र विभाग के प्रोफेसर आशुतोष कुमार कहते हैं, ‘पंजाब विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को जबर्दस्त फायदा मिलने की उम्मीद है. राज्य में कांग्रेस की बहुत अच्छी छवि न होने का भी फायदा आम आदमी पार्टी को मिलेगा. अमरिंदर सिंह के बहुत अच्छे शासन की याद लोगों के जेहन में नहीं है. पंजाब में ड्रग्स की समस्या लंबे समय से है. इसमें अकाली और कांग्रेस दोनों के लोग शामिल हैं. यह आम आदमी पार्टी के लिए फायदेमंद है. राज्य में सत्ता विरोधी लहर का बहुत ज्यादा असर है. इसका सीधा लाभ आम आदमी पार्टी को मिलने वाला है. इसका कारण यह है कि राज्य में कभी आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं बनी है, इसलिए लोगों को उससे कुछ बेहतर की उम्मीद है. लोग भाजपा-अकाली व कांग्रेस दोनों के शासन को समझ चुके हैं. दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी की छवि एक साल में बहुत खराब नहीं हुई है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी अकाली दल के कोर वोट बैंक में भी निशाना साध रही है. वह तरनतारन समेत दूसरे अकाली गढ़ों में सेंध लगा रही है. यह हमें माघी मेले के दौरान आम आदमी पार्टी की रैली में देखने को भी मिला. पंजाब में लोग आम आदमी पार्टी के नाम पर वोट करेंगे. मेरे ख्याल से पंजाब के लिए अलग से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने की भी जरूरत नहीं है. पार्टी को बस अपनी ईमानदार छवि बनाए रखने की जरूरत है.’

इसके अलावा पार्टी के चुनाव प्रचार का तरीका उसे फायदा पहुंचाने वाला साबित हो सकता है. पंजाब की जनसंख्या 2.5 करोड़ से ऊपर है. लेकिन डेढ़ करोड़ लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं. यहां आम आदमी पार्टी तेजी से अपना पैर पसार रही है. इसके लिए पार्टी डोर-टू-डोर चुनाव प्रचार और सोशल मीडिया को जरिया बना रही है. पार्टी ने साफ कर दिया है कि राज्य में 23,000 बूथों का निर्माण किया जाएगा, जहां हर बूथ पर 10-15 सदस्यों की टीम पानी, दवाओं, किसानों की आत्महत्या और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को सुनेगी और समाधान की दिशा में काम करेगी. गौरतलब है कि पार्टी ने ऐसी ही रणनीति बनाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी.

‘पंजाब में दिल्ली की तर्ज पर ही चुनावी अभियान चल रहा है. हालांकि हम गांवों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. राज्य में आम आदमी पार्टी के 14-15 विंग हैं. इसमें युवा, महिला, किसान, व्यापारी आदि विंग शामिल हैं. हमारा लक्ष्य है कि हर बूथ पर पार्टी के कम से कम 15 कार्यकर्ता काम करें’

आम आदमी पार्टी की पटियाला की कार्यकारिणी में शामिल जरनैल सिंह कहते हैं, ‘पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जोर-शोर से जुटी हुई है. इसके लिए परिवार जोड़ो अभियान शुरू किया गया था. अब यह अंतिम चरण में है. यहां दिल्ली की तर्ज पर ही चुनावी अभियान चल रहा है. हालांकि हम यहां गांवों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. राज्य में आम आदमी पार्टी के 14-15 विंग हैं. इसमें युवा, महिला, किसान, व्यापारी आदि विंग शामिल हैं. हमारा लक्ष्य है कि हर बूथ पर पार्टी के कम से कम 15 कार्यकर्ता काम करें.’

वहीं मोगा जिले में सक्रिय आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हरविंदर सिंह कहते हैं, ‘पंजाब में मुख्य समस्या नशाखोरी की है. यहां जो जितना अमीर वह उतना बड़ा नशाखोर है. हमारी पार्टी ने इसी को निशाना बनाया है. कांग्रेस और अकाली-भाजपा का शासन जनता ने देख लिया है. वे इस पर रोक लगाने में विफल रहे हैं. दूसरी बड़ी समस्या किसानों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर है. दिल्ली में हमारी सरकार ने किसानों को बढ़िया मुआवजा दिया है. हम इस बात को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं. पंजाब खेती-किसानी करने वाला राज्य है. हमारा मानना है कि हमें इसका फायदा जरूर मिलेगा.’ 

 राजनीतिक जानकारों की मानें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस हो सकती है. बिहार में बेहतर प्रदर्शन के बाद से कांग्रेसियों के हौसले बुलंद हैं. पंजाब में मनप्रीत बादल की पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) के कांग्रेस में विलय के बाद वह ज्यादा मजबूत बनकर उभर रही है. इसके अलावा आप में फैला असंतोष भी उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है. पार्टी ने अपने कुल चार में से दो सांसदों को निलंबित कर दिया है. इससे पहले प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. उन्होंने शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए थे. इसके अलावा पूर्व आप नेता योगेंद्र यादव भी पार्टी के खिलाफ अभियान चलाकर मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. पंजाब में आम आदमी पार्टी के पास संगठनात्मक ढांचे के नाम पर कुछ भी नहीं है. इसे जल्द से जल्द मजबूत किए जाने की जरूरत है. पंजाब में पार्टी के पास अभी तक मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में कोई नाम सामने नहीं आया है. इसका भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार बनाम बाहरी के चलते भाजपा को जबर्दस्त नुकसान उठाना पड़ा था.

आशुतोष कुमार कहते हैं, ‘चुनावों में बड़ी सफलता हासिल करने के लिए आम आदमी पार्टी को संगठन बनाना पड़ेगा. इस लिहाज से अभी पार्टी दूसरे दलों से कमजोर है. साथ ही उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरतने की जरूरत है. खासकर दलबदलुओं को लेकर. इसमें से वे कुछ को टिकट दे सकते हैं, लेकिन वे अगर सभी को टिकट देने लगेंगे तो इससे पार्टी की छवि खराब हो जाएगी. इसके अलावा अगर वे एनआरआई प्रत्याशियों को मौका देते हैं तो भी उनकी साफ-सुथरी छवि का ध्यान रखना होगा. साथ ही उन्हें पेशेवर राजनेताओं के बजाय मिडिल क्लास, पढ़े-लिखे लोगों को मौका देना चाहिए.’ वहीं दूसरी ओर गुरु नानकदेव विश्वविद्यालय, अमृतसर के इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुखवंत सिंह कहते हैं, ‘पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी फायदे में रहेगी, लेकिन वह बड़ी ताकत बनकर उभरेगी यह कहना जल्दबाजी होगा. मेरे ख्याल से अभी तक मुख्य मुकाबला अकाली-भाजपा और कांग्रेस में ही है. आम आदमी पार्टी को संगठन, टिकट बंटवारे समेत दूसरी बातों पर भी काम करने की जरूरत है.’

कुछ ऐसी ही बात अमृतसर के रहने वाले और अन्ना आंदोलन से जुड़े रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुखविंदर सिंह मत्तेवाल करते हैं. वे कहते हैं, ‘जमीनी स्तर पर अभी आम आदमी पार्टी कुछ बेहतर करते हुए नहीं दिख रही है. हालांकि अकाली-भाजपा की सरकार और कांग्रेस को लेकर लोगों में जबर्दस्त नाराजगी है. इसका फायदा आप को मिल सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो पंजाब में नाराज वोटरों को आम आदमी पार्टी के रूप में एक ठिकाना मिल सकता है. पर यह कहना मुश्किल है कि वह राज्य में सरकार बनाएगी क्योंकि अभी पूरे राज्य में बड़ी संख्या में उसका कैडर मौजूद नहीं है. इसके अलावा पंजाब चुनावों में डेरे भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं. अकाली-भाजपा और कांग्रेस से अलग आम आदमी पार्टी उन्हें कैसे लुभाएगी, यह भी देखने वाली बात होगी. फिलहाल तो उनके कार्यकर्ता उत्साहित नजर आ रहे हैं.’

हालांकि पंजाब में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के नेता मानते हैं कि उन्हें सबसे बड़ा खतरा आप से है. बहुजन समाज पार्टी के कमजोर होने और मनप्रीत बादल की पार्टी के कांग्रेस में विलय होने के बाद से यह खतरा बढ़ गया है. राज्य में आम आदमी पार्टी जिस तरह से तैयारियों में जुटी है और उसके नेता केजरीवाल जिस तरह की आक्रामकता दिखा रहे हैं उससे आप को फायदा मिलता नजर आ रहा है. पार्टी राज्य में अकाली-भाजपा और कांग्रेस से असंतुष्टों की एकमात्र जगह बनती जा रही है.