मेरठ बलात्कार मामला: बवाल पर सवाल

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आश्चर्य की बात है कि पीडि़ता द्वारा खरखौदा थाने में दर्ज करवाई गई एफआईआर में मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज 29 जून की बलात्कार वाली और उसके बाद की किसी घटना का कोई जिक्र नहीं है. दूसरी तरफ जहां एफआईआर के मुताबिक कविता 23 जुलाई को गायब हुई थी वहीं 31 जुलाई को पीड़िता के पिता द्वारा पुलिस को दी गई गुमशुदा सूचना के मुताबिक कविता 29 जुलाई को गायब हुई थी.

लेकिन इस मामले की विचित्रता अभी भी खत्म नहीं होती. पुलिस द्वारा पीडि़ता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां उसने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपने बयान दिए. इस बयान में पीडि़ता 29 जून को अपने साथ बलात्कार होने और उसके बाद 23 जुलाई को आरोपियों के साथ जाकर ऑपरेशन की बात तो बताती है पर यह भी बताती है कि ऑपरेशन के बाद वह 27 जुलाई को घर वापस आ गई थी और आरोपियों ने उसे 29 जुलाई को दुबारा अगवा कर लिया था. इसके बाद वह तीन अगस्त को उनके चंगुल से बचकर भाग निकली थी.

मेरठ के एसएसपी ओंकार सिंह तहलका को बताते हैं कि तहकीकात में सामने आया है कि पीडि़ता की बीते एक माह में मेरठ के उलधन गांव के निवासी कलीम से 150 से अधिक बार बात हुई. पुलिस ने जब कलीम को पूछताछ के लिये हिरासत में लिया तो उसने बताया कि वह 23 जुलाई को पीड़िता को मेरठ मेडिकल कॉलेज में लेकर गया था जहां उसका ऑपरेशन किया गया. एसएसपी का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरे ने 23 जुलाई को पीडि़ता और कलीम की फुटेज दर्ज कर ली थी. सिंह के मुताबिक कविता 23 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे ऑपरेशन के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराई गई थी. वहां से वह 27 जुलाई की सुबह 10 बजे डिस्चार्ज हुई. साथ ही एसएसपी यह भी बताते हैं कि 23 जुलाई से पूर्व पीडि़ता कलीम के साथ मेरठ में ही एक महिला डॉक्टर के यहां इलाज के लिये आई थी जिसका सारा रिकॉर्ड भी पुलिस के पास है. पुलिस के मुताबिक कलीम और कविता सात जून और 29 जून को मेरठ के सोतीगंज स्थित होटल रंजीत में रुके थे.

मामले की जांच में लगे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर संवाददाता को बताते हैं कि पीडि़ता द्वारा दिए गए बयान उसकी कहानी को झूठा साबित कर रहे हैं. इस अधिकारी का कहना है कि अगर पीडि़ता के साथ 29 जून को बलात्कार हुआ था तो यह कैसे मुमकिन है कि 24 दिन के अंदर पीडि़ता को गर्भवती होने का पता चल गया और उसने गर्भपात भी करवा लिया. इस अधिकारी का यह भी कहना है कि मेडिकल में पीडि़ता ने लिखवाया है कि ऑपरेशन के बाद उसके टांके एक अगस्त को कटे हैं तो इस बात की संभावना है कि पीडि़ता मजिस्ट्रेट को दिए बयान के मुताबिक 27 को घर वापिस आकर 29 जुलाई को टांके कटवाने के लिये फिर चली गई हो.

इलाज के लिए गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती हुई पीडि़ता से जब इस संवाददाता ने बात की तो उसका कहना था ‘मुझे वह जगह याद नहीं है जहां मेरा ऑपरेशन हुआ था लेकिन एक बार मैं उस बिल्डिंग को देखूंगी तो पहचान लूंगी. मैं अस्पताल जाते समय बुरके में नहीं थी. मैंने अपने मुंह को दुपट्टे से छुपा रखा था.’ इसके अलावा पीडि़ता ने माना कि वह कलीम को पहले से जानती थी और उसके साथ ही ऑपरेशन करवाने अस्पताल गई थी. इसके बारे में पूछने पर उसका कहना था ‘मेरे ऊपर आरोपियों द्वारा ऑपरेशन करवाने का बहुत दबाव बनाया गया था और मैं उस समय बहुत डरी हुई थी.’

अस्पताल में मौजूद पीडि़ता के एक रिश्तेदार का कहना था कि उसके साथ 29 जून को बलात्कार तो हुआ था. 23 जुलाई को उसने घर पर अपनी छोटी बहन को फोन किया कि वह अपने कॉलेज की कुछ सहेलियों के साथ मथुरा टूर पर जा रही है और दो-तीन दिन में आ जाएगी. 27 जुलाई को वह अपने घर वापस आ गई और उसने आने के बाद अपनी छोटी बहन को बताया कि उसका अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ है. इसके बाद 29 जुलाई को आरोपी उसका अपहरण करके ले गए और तीन अगस्त को वह आरोपियों के चंगुल से छूटकर घर वापस आई. हालांकि मेरठ पुलिस द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि पीडि़ता कलीम के साथ ऑपरेशन करवाने गई थी, उसके परिजन उसे जबरदस्ती गाजियाबाद के अस्पताल से डिस्चार्ज करवाकर घर ले गए.

इस मामले के सभी पहलुओं को जानने वालों में से कुछ लोगों को यह, ऐसे प्रेम संबंध का मामला लगता है, जो सामाजिक दबाव में आए परिवार के दबाव में पुलिस का मामला बन गया. दूसरी तरफ परिवार से सहानुभूति रखने वाले लेकिन मामले को केवल बाहर-बाहर से जानने वालों में से कुछ का मानना है कि अपने साथ बुरा होने के बावजूद भी परिवार के डर की वजह से एक 20 साल की नादान लड़की ने इसे इतना जटिल बना दिया. वजह चाहे जो भी हो लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कविता इस मामले में पीड़िता ही है. फिर चाहे उसके साथ बलात्कार हुआ हो या नहीं.

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