चारों खाने चित्त

illustration_politicas
इलेस्ट्रेशन: एम. दिनेश

उत्तर प्रदेश की जन सभाओं में जब नरेंद्र मोदी बार-बार यह कहते थे कि ‘इस बार सबका सफाया करना है– ‘सबका’ यानी सपा, बसपा और कांग्रेस इन तीनों का सफाया’ तब शायद किसी को भी बात का गुमान नहीं था कि यह बात उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों में एकदम सही साबित होने जा रही है. मगर चुनाव नतीजों ने दिखा दिया कि उत्तर प्रदेश में दो परिवारों की ‘चमत्कार पूर्ण’ विजय को छोड़ कर वाकई सबका सफाया हो गया.

कांग्रेस तो फिर भी राष्ट्रीय पार्टी है. कुछ राज्यों में उसकी सरकारें भी हैं, लेकिन असली आफत तो सपा और बसपा की है. दोनों व्यक्ति आधारित पार्टियां हैं और दोनों अपने खास जातीय-धार्मिक और वर्गीय वोट बैंक के सहारे खड़ी हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत पाने के बाद जिस तरह बसपा ने मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देखा था ठीक वैसा ही सपना अखिलेश यादव की जीत के बाद सपा ने भी देखा था. मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने के लिए  सपा ने ‘मिशन 2014’ की घोषणा भी की थी. लेकिन शायद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी में ही कुछ ऐसा ऐब है कि उस पर बैठते ही सारे ‘मिशन’ गड़बड़ हो जाते हैं. मायावती की तरह अखिलेश सरकार भी गठन के बाद से ही लोगों की आकांक्षाओं से दूर होती चली गई. मुलायम के बार-बार के उलाहनों के बाद भी पार्टी के कारिंदों का डीएनए बदला नहीं और नतीजा मुलायम के प्रधानमंत्री बनने की जगह कुनबे के प्रधान बनने में ही सिमट कर रह गया. यूं तो मुलायम ने पार्टी से खुद को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए खुद ही आग्रह भी किया था और ठीक से काम न करने वालों को कड़े शब्दों में चेताया भी था लेकिन न उनकी चेतावनी काम आई न आग्रह.

सपा सत्ता की धमक में यह भूल गई कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी होती है. उसके नेताओं-कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का सार्वजनिक व्यवहार पार्टी को भारी पड़ गया. केंद्र सरकार की तरह ही लैपटाप, बेरोजगारी भत्ता या मुस्लिम छात्राओं के भत्ते आदि-आदि तरीकों से जनता के पैसे की बंदरबांट करके पार्टी इस दिवास्वप्न में खोई रही कि सूबे में हर ओर उसका गुणगान ही हो रहा है. सपा यह नहीं समझ पाई कि मुजफ्फरनगर दंगों और उसके आस-पास की घटनाओं ने अल्पसंख्यकों का भरोसा कमजोर किया है और जातीय रैलियों के जरिए वोट बटोरने की तरकीब भी बेकार हो रही है. नतीजा पूरे सफाए के रूप में सामने आया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here