हम जिसकी पूजा करते हैं उसी को ये बूचड़खाने में काट देते हैं तो तनाव तो पैदा होगा ही : विनय कटियार | Tehelka Hindi

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हम जिसकी पूजा करते हैं उसी को ये बूचड़खाने में काट देते हैं तो तनाव तो पैदा होगा ही : विनय कटियार

उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रदेश के सभी राजनीतिक दल इसके लिए अपने तरकश से तीर निकाल रहे हैं. ऐसे में उन पुराने मुद्दों पर भी जमकर चर्चा हो रही है जिसने पिछले दो-तीन दशक में प्रदेश की राजनीति को प्रभावित किया है. इसमें सबसे ज्यादा ​चर्चित अयोध्या विवाद रहा है. आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान यह मुद्दा कितना प्रभावी रहेगा और भाजपा के लिए राम मंदिर कितनी अहमियत रखता है इस पर बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सदस्य विनय कटियार से बातचीत. इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश में गत विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन, समान ना​गरिक आचार संहिता, केंद्र सरकार के दो सालों के कामकाज समेत ​तमाम विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी.

अमित सिंह 2016-07-31 , Issue 14 Volume 8

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उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव के क्या कारण रहे और इस बार अलग क्या है?

एक बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव का कारण कल्याण सिंह का पार्टी छोड़कर जाना था. इस कारण प्रदेश की पिछड़ी खासकर लोध जातियों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया. वहीं अगड़ी जातियों पर इसका बुरा असर पड़ा क्योंकि कल्याण सिंह प्रदेश के सर्वमान्य नेता थे. उनके जाने के बाद भाजपा में ऐसा कोई चेहरा बचा नहीं. रामप्रकाश और राजनाथ सिंह ने अच्छा काम किया लेकिन वे पार्टी के लोगों को एकजुट नहीं कर पाए. कल्याण सिंह अलग पार्टी बनाकर कुछ खास तो नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने भाजपा की हार को संभव बना दिया. इस बार यही बात नहीं है. पूरी पार्टी एकजुट है. सपा, बसपा का राज भी प्रदेश की जनता ने देख लिया है. अब लोगों को भाजपा का शासन याद आ रहा है. उस दौरान कानून-व्यवस्था के साथ-साथ प्रदेश का विकास भी हुआ था और कोई दंगा-फसाद भी नहीं हुआ. मायावती का जब शासन आया तो लूटखसोट बढ़ गई. जातियों के बीच वैमनस्य पैदा हुआ. प्रदेश का विकास रुक गया. इसके चलते सपा की सरकार आई लेकिन यहां भी वहीं हाल है. प्रदेश की कानून-व्यवस्था बदहाल है. गुंडागर्दी बढ़ गई है. विकास का हाल यह है कि केंद्र सरकार की योजनाओं को भी वे ढंग से लागू नहीं कर पा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने विद्युतीकरण से लेकर फसल बीमा तक की तमाम योजनाएं लागू की हैं.

केंद्र सरकार के दो सालों के कामकाज को आप कैसे देख रहे हैं?

इतने बड़े देश के लिए किसी भी सरकार के लिए दो साल का वक्त बहुत कम होता है. फिर भी केंद्र सरकार ने बहुत सारी योजनाएं शुरू की हैं. यह सूची बहुत लंबी है. सरकार बहुत ही बेहतर ढंग से काम कर रही है.

कांग्रेस के शासनकाल के दौरान भाजपा महंगाई को मुद्दा बनाती थी. अब भाजपा केंद्र की सत्ता में हैं पर दो साल बाद भी इसमें कमी नहीं आई है.

महंगाई में अगर कमी नहीं आई है तो यह बढ़ी भी नहीं है. समय-समय पर भले ही दाल की कीमतें बढ़ी हैं, इसके अलावा देश में इस तरह की कोई समस्या नहीं है. अब दाल विदेश से मंगाई जाती है तो इसकी कीमतें हमेशा से ही बढ़ती-घटती रही हैं. वैसे भी अगर गेहूं, सब्जियों या चीनी का दाम नहीं बढ़ेगा तो किसान भूखा नहीं मरने लगेगा? थोड़ी-सी महंगाई बढ़ने पर हम यहां शहरों में बैठकर हल्ला मचाने लगते हैं, लेकिन किसान मरने लगता है तो हमें कोई परेशानी नहीं होती है. खाद महंगी है तो गन्ना महंगा होना चाहिए. अगर किसानों को उनकी उपज का फायदा नहीं मिलेगा तो काम कैसे चलेगा? हमारी सरकार किसानों के हितों को लेकर काम कर रही है तो ऐसे में अगर महंगाई बढ़ रही है तो शहरों में बैठे लोग हल्ला मचाने लगते हैं. वैसे भी महंगाई बढ़ने के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं. दालों का भंडार केंद्र के पास भरा पड़ा है. अब राज्य सरकारें उठा नहीं रही हैं. दाल सस्ती करना राज्य सरकारों का काम है. अब इसमें केंद्र सरकार क्या करे.

भाजपा के लिए कश्मीर हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है. अब केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार है. क्या इस मुद्दे पर पार्टी के रुख में बदलाव आया है?

नहीं, इस मसले पर भाजपा के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है. कश्मीर में जो हमारा सहयोगी दल है वह अच्छा काम कर रहा है. महबूबा मुफ्ती बेहतर काम कर रही हैं. उनके पिता जी ने भी अच्छा काम किया था. प्रदेश में पहली बार भाजपा सरकार में शामिल हुई है. मैं समझता हूं वहां कुल मिलाकर बढ़िया काम हो रहा है. सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ा है. विकास को नई दिशा मिली है. आतंकियों को पकड़कर जेल के अंदर डाला गया है. उनके साथ नरमी नहीं बरती गई है. अब जहां भाजपा के स्टैंड की बात है तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से पूछा है कि समान नागरिक कानून बनाने के लिए आप क्या कर रहे हो तो पूर्व कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने एक टीम बनाने का काम शुरू कर दिया है. लोगों को चिट्ठी-पत्री भी लिखी जा रही है और देश के अंदर इस तरह का एक कानून बनना भी चाहिए. देश में एक संविधान, एक राष्ट्र, एक प्रतीक और एक कानून होना चाहिए. अब ये न हो कि किसी को तीन-तीन शादियां करने की अनुमति हो. किसी के पांच-पांच बच्चे हों. एक विशेष बात, अगर इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में देश का विभाजन हो जाएगा. हमारे भारत की पहचान खत्म हो जाएगी. एकता-अखंडता की पहचान खत्म हो जाएगी. आज लोग भले ही इसको मजाक समझें लेकिन ऐसा जरूर होगा. ईरान हमारे देश से चला गया, अफगानिस्तान हमारे देश से चला गया. पाकिस्तान, बांग्लादेश हमसे अलग हो गए. ये देश हमसे शरीयत कानून के चलते अलग हुए और इसीलिए लोग सुधारों का विरोध करते हैं. तीन तलाक और तीन बीवियों की पैरवी करते हैं. अब ये लोग चाहे जितना निकाह और तलाक करें कोई फर्क नहीं पड़ता है. तीन, चार, पांच निकाह करते हैं. छह, सात, आठ बच्चे पैदा करते हैं. इसके चलते देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है. इस पर रोक के लिए कानून बनना चाहिए. शरीयत कानून या हिंदू कानून नहीं होना चाहिए. बल्कि देश के अंदर एक व्यावहारिक कानून बनाने की जरूरत है. इसके लिए समान नागरिक कानून बनना चाहिए ताकि देश की एकता-अखंडता सुरक्षित रहे. देश की जनसंख्या सीमित रहे. इसके लिए चीन की तरह कानून बनाने की जरूरत है. वहां शरीयत का नहीं, राष्ट्र का कानून चलता है.

क्या आपका यह कहना है कि अगर मुसलमानों की आबादी बढ़ जाएगी तो देश के विभाजित होने का खतरा है?

नहीं, हम ऐसा बिल्कुल भी नहीं कह रहे हैं. हम तो इतिहास बता रहे हैं. आखिर ईरान क्यों बाहर चला गया? वह तो शिया बहुल था. अफगानिस्तान क्यों अलग हो गया? बाबर को तो वहीं दफनाया गया था. पाकिस्तान तो देश के स्वतंत्र होने के एक दिन पहले ही हमसे चला गया. ये आबादी के कारण हमसे दूर गए. आबादी के चलते ही बंटवारा हुआ. आज एक हिंदू परिवार में एक-दो या ज्यादा से ज्यादा तीन बच्चे होते हैं, लेकिन मुसलमानों में तो तीन बेगम ही रखते हैं. कम से कम पंद्रह से बीस बच्चे होते हैं. ऐसे में कहां तीन बच्चे और कहां पंद्रह बच्चे. वो तो कहेंगे ही कि आबादी के हिसाब से देश का बंटवारा करो. ये किसी भी प्रकार से मान्य नहीं है. परिवार नियोजन देश में लागू होना चाहिए. सभी के ऊपर लागू होना चाहिए. शरीयत कानून देश के ऊपर नहीं है. देश के संविधान के ऊपर नहीं है.

केंद्र में सरकार बनने के बाद पाकिस्तान को लेकर भाजपा का रुख क्या है?

पाकिस्तान को लेकर भाजपा के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन पड़ोसी देश से हमारा संबंध बेहतर होना चाहिए. दुर्भाग्य से पाकिस्तान का जितना कड़ा रुख आतंकवादियों के खिलाफ होना चाहिए वो वहां दिखाई नहीं दे रहा है. इसी का दुष्परिणाम यह है कि आतंकी आए दिन सीमापार से घुसपैठ करते रहते हैं. पाकिस्तान को चाहिए अपनी सीमा का बंदोबस्त बेहतर करे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. वहा मिलिट्री का शासन रहता है. पाकिस्तान का प्रधानमंत्री भी बाध्य हो जाता है. लेकिन इससे काम नहीं चलेगा. हमने तो खुली छूट दे दी है जो भी आतंकी आए उसे मारो. हमारे सैनिक बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं. ये काम चलता रहेगा.

विपक्ष में होने के दौरान पार्टी का कहना था कि जब तक आतंकी गतिविधि जारी रहेगी तब तक पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी.

नहीं, हम बातचीत भी करेंगे और आतंकवादियों को भी मारेंगे. उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा.

आंबेडकर इन दिनों भाजपा और संघ के प्रिय हो गए हैं. क्या ऐसा चुनावी राजनीति के चलते हो रहा है?

आंबेडकर कट्टर हिंदूवादी रहे हैं. यह हम नहीं कह रहे हैं यह आंबेडकर ने स्वयं लिखा है. संपूर्ण वाङ्मय के 16वें खंड में उन्होंने इसके बारे में विस्तार से लिखा है. हिंदू समाज में उनका अपमान हो रहा था. इसे लेकर उन्होंने उस पर चोट की. वे हिंदू धर्म को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे. वे चाहते तो इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार कर लेते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इस कारण से उनके विचार भाजपा की विचारधारा से मेल खाते हैं. आंबेडकर ने देश निर्माण में बहुत योगदान दिया है.

मोदी सरकार के दो सालों के दरमियान पार्टी से जुड़े नेताओं ने जमकर भड़काऊ बयान दिए हैं.

नहीं, इस दौरान ऐसा कुछ खास नहीं रहा है. साक्षी महाराज या योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ सच बात बोली है, भड़काऊ बयान नहीं दिया है. विनय कटियार आजकल चुप बैठे हैं बोल नहीं रहे हैं. नहीं तो वह भी वही कहते जो इन लोगों ने कहा है.

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि इन बयानों से देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा है. डर का एक माहौल बना है.

कहीं भी सांप्रदायिक तनाव नहीं बढ़ा है. अब योगी आदित्यनाथ के बयान से कौन-सा सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया? अब हम जिस मां की पूजा करते हैं उसी को ये बूचड़खाने में ले जाकर काट देते हैं. उसका सेवन करते हैं तो स्वाभाविक है तनाव तो पैदा होगा ही.

हाल ही में आपने बयान दिया कि पाक उच्चायुक्त भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं. क्या आधार है इसका?

देखिए, पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित जब से आए हैं वे भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं. वे आतंकवादियों के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं. पाकिस्तान का एजेंट होना बुरा नहीं है, लेकिन अलगाववादियों और आतंकियों का एजेंट बन जाना बुरी बात है. अलगाववादियों को हर मौके पर दिल्ली बुलाना, उन्हें फंडिंग कराना गलत है. बासित को यहां रहने का हक नहीं है. इसके लिए मैं विदेश मंत्रालय को पत्र लिख रहा हूं. इसे लेकर कार्रवाई होनी चाहिए.

Photo : Tehelka Archives

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राम मंदिर भाजपा के लिए मुद्दा रहा है. केंद्र में सरकार के दो साल होने पर भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है.

राम मंदिर भाजपा के लिए कभी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है. राम मंदिर भाजपा के लिए आस्था का मुद्दा रहा है. देश में हमेशा कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं तो कम्युनिस्ट विचारधारा के कुछ लोग इसे चुनाव से जोड़ देते हैं. जब तक राम मंदिर नहीं बन जाएगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा. इसमें चुनाव कोई मुद्दा नहीं है.

अभी भाजपा सरकार में हैं तो वह कुछ प्रयास क्यों नहीं कर रही है?

देखिए, इसमें सरकार में होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है. हाई कोर्ट में हमारी जीत हो चुकी है. उसने यह मानते हुए कि अयोध्या में राम मंदिर था जमीन के तीन टुकड़े कर दिए हैं. दो हिंदू समाज को दिए और एक मुस्लिम समाज को दे दिया है. अब सुप्रीम कोर्ट में हमारी लड़ाई यही है कि यदि वह राम की जन्मभूमि है तो वहां विदेशी हमलावर बाबर क्या करेगा? विदेशी हमलावर का राम जन्मभूमि में स्मारक बने यह हमें कतई स्वीकार नहीं है. इसके लिए हमें जो भी लड़ाई लड़नी पड़ेगी हम लड़ेंगे.

मामले से जुड़े पक्षकारों का आरोप है कि संघ और विनय कटियार राजनीतिक फायदे के लिए इस मामले का हल नहीं निकलने दे रहे हैं?

हम इस मामले को कभी जिंदा नहीं रखना चाहते हैं. राम हमारे आराध्य हैं. वह चुनावी मुद्दा नहीं है.

हिंदूवादी नेताओं पर आरोप लगता है कि वे विकास के बजाय धर्म के नाम पर लोगों को बरगलाते हैं.

राम मंदिर आस्था का मामला है वह चलता रहेगा. लेकिन हमने कब कहा कि विकास को बंद कर दें. हम तो सबके विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं. उत्तर प्रदेश में सरकार थी तो विकास कार्य किया. केंद्र में सरकार है तो हम विकास कर रहे हैं.

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 8 Issue 14, Dated 31 July 2016)

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