अलविदा कॉमरेड

बीते एक साल के दौरान ‘तहलका’ ने कई उतार-चढ़ाव देखे. हमने न्यूनतम संसाधनों के साथ काम किया और खुद को हर बार साबित किया. आप संगठन और हमलोगों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे. आपकी बालसुलभ उत्सुकता और चुनौतियों से पार पाने के लिए अगली पंक्ति में झट से खड़े हो जाना, हमलोगों के लिए हमेशा प्रेरणादायी रहा.

और हां, आपकी रंगीन जिंदगी जिसको आपने नेतृत्व दिया, उसका जिक्र करना कैसे भला कोई भूल सकता है. हमारे दोस्त और ‘तहलका’ के हमारे पूर्व साथी हरीश नांबियार ने आपके चरित्र को क्या खूब पहचाना है. उनके शब्दों में, ‘प्रद्योत लाल की व्यवस्थता उल्लेखनीय थी. वे शिक्षित सर्वहारा और विद्वान पत्रकार थे. मितव्ययी थे. क्रिकेट और दिलीप कुमार को लेकर वे जुनूनी थे. मैं उनकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं. आप संगीत, क्रिकेट, देव आनंद, दिलीप कुमार, टाइगर पटौदी (कभी खत्म न होने वाली सूची) के दीवाने हो सकते हैं.’

अक्सर ऐसा होता था कि काम का दबाव होता और प्रेस की डेडलाइन होती और इस बीच आप अपनी पसंदीदा पुरानी फिल्मों के बारे में बातचीत करने लग जाते. आप फिल्मों से जुड़ी चीजों को कैसे याद रखते थे, इसकी बारीकियों के बारे में आप हमें बताते रहते थे. ऐसा आप ही कर सकते थे और हम मंत्रमुग्ध होकर सुना करते थे.

कॉमरेड और एक बात यह कि आपके उत्साही पाठक आपसे बहुत जुड़ाव महसूस करते थे. आपके द्वारा प्रयोग किए जानेवाले शब्द आनंदित करते थे और आपके द्वारा इस्तेमाल में लाए जानेवाले मुहावरों की वजह से पंक्तियां गाने लग जाती थीं. लेकिन आपके अधिकांश प्रशंसक इस बात को नहीं जानते होंगे क्योंकि वे आपके साथ न्यूजरूम में नहीं होते थे, इसलिए मैं उसका जिक्र करने की स्वतंत्रता यहां ले सकता हूं. कभी ऐसे समय में जब कोई ऐसी परिस्थिति उत्पन्न होती और शब्द नहीं सूझ रहे होते और शोध का समय नहीं होता तब आप आगे आकर मोर्चा लेते.

मेरी आपसे एक मात्र शिकायत यह है कि आपने अपनी उदासी को अपने दिल में ही दबाए रखा. आपके लिए कुछ अधूरा रह गया था जिसे न हासिल करना आपको सालता रहा. कई बार आपसे जीवंत बातचीत के दौरान भी उस दर्द की झलक मिल जाती थी, जिसे आपने दिल में दबा रखा था. आपने जितना किया, आप उससे कहीं ज्यादा करना चाहते थे. हम जब आखिरी बार मिले थे तब मैंने आपसे कहा था कि आप अपनी जीवनी क्यों नहीं लिखते हैं? आपने जवाब में कहा था, ‘अगर मैं ऐसा करना चाहूं तो मुझे कुछ समय के लिए मीडिया की मुख्यधारा से दूर रहना पड़ेगा. मैं नहीं चाहता कि लोग मुझे भूल जाएं.’

कॉमरेड, क्या आप तब सचमुच गंभीर थे जब आप यह कह रहे थे कि लोग शायद आपको भूल जाएंगे? मुझे यकीन है कि यह आपकी तरफ से अंतिम चुटकुला था.

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