‘शासन करने की बेहतर क्षमता का लिंग से क्या संबंध’

0
164
Shabnam-Mausi
शबनम मौसी

 

वर्तमान में किन्नर समाज की क्या स्थिति है?

किन्नर समाज की स्थिति में पहले की अपेक्षा थोड़ा सुधार हुआ है. किन्नर समाज की अब तक की यात्रा काफी संघर्षपूर्ण रही है. पहले तो सरकारों ने उनके अस्तित्व को ही नकार दिया था. अब जाकर उन्हें देश का नागरिक मानते हुए वोट डालने का अधिकार दिया गया है. पिछले कुछ सालों में इस समाज की स्थिति में काफी सकारात्मक परिवर्तन हुआ है, लेकिन अब भी दिल्ली बहुत दूर है.

आज किन्नर समाज किन चुनौतियों से जूझ रहा है?

देखिए, सबसे बड़ी समस्या ये है कि लोग किन्नरों को इंसान के तौर पर स्वीकार नहीं करते हैं. शासन से लेकर प्रशासन तक इस बात को आज तक स्वीकार नहीं कर पा रहा है कि किन्नर इसी समाज के अंग हैं. समाज को सबसे पहले किन्नरों के अस्तित्व को स्वीकार करना पड़ेगा. उन्हें ये समझना पड़ेगा कि किन्नरों की उत्पत्ति भी पुरुष-स्त्री के योग से हुई है, वो कहीं आकाश से नहीं टपके हैं. उसके बाद फिर उनकी स्थिति को लेकर बात होगी. सोचिए, यह अमानवीयता की पराकाष्ठा नहीं तो क्या है कि सरकार के पास पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, विकलांग आदि हर वर्ग, जाति और धर्म के लोगों के विकास हेतु कार्यक्रम हैं, लेकिन भारतीय समाज में हाशिये पर रहने वाले वर्ग के लिए न तो कोई योजना है और न ही ऐसा कुछ करने की उनके मन में कोई इच्छा. किसी को किन्नरों से मतलब नहीं है. वो कैसे जीते हैं और कैसे अपना गुजारा करते हैं. इस देश में चोर-लुटेरों को लोन मिल जाएगा लेकिन किन्नर को नहीं मिलता. भले ही वह किन्नर लोन तय समय पर जमा करने की क्षमता रखता हो, लेकिन बैंक अधिकारी उन्हें भगा देते हैं. इसे क्या कहेंगे आप. सर्वप्रथम मानसिकता में बदलाव होना जरूरी है.

आप राजनीति में कैसे और क्यों आईं?

देखिए, बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के स्थिति में बदलाव होना संभव नहीं है. मैंने अपने समाज को करीब से देखा है. अपने वर्ग की पीड़ा ने मुझे राजनीति में कूदने पर मजबूर किया. इसके अलावा लोगों का धीरे-धीरे राजनेताओं पर से विश्वास उठता जा रहा है. मैंने यह महसूस किया कि अगर मैं चुनाव में खड़ी हुई तो लोगों का समर्थन मुझे मिलेगा. मेरा अनुमान सच हुआ और लोगों ने मुझे विधायक बना दिया. लोग आज के नेताओं से त्रस्त हो चुके हैं. पूरी राजनीति परिवारवाद और स्वार्थ केंद्रित हो गई है. ऐसे में जब कोई किन्नर सामने आता है, जिसके बारे में लोगों को अच्छी तरह पता है कि न तो उसका कोई परिवार है और न ही कोई और स्वार्थ इसीलिए उसके भ्रष्ट होने की संभावना न्यूनतम है.

विधायकी का अनुभव कैसा रहा?

ठीक.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here