‘शायद आने वाले पांच सालों में डेंगू का टीका तैयार हो जाए’

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वर्तमान में भारत में चिकित्सकीय परीक्षणों की स्थिति आप जानते हैं, ऐसे में इस टीके को जनता तक पहुंचाने में किस तरह की कठिनाइयां आ सकती हैं?

देखिए, इस तरह के परीक्षणों के लिए एक तेज, फुर्तीला और ऊर्जा से भरा चिकित्सकीय तंत्र होना चाहिए. एक प्रभावी व्यवस्था बनाने के लिए इस क्षेत्र को मिलने वाला अनुदान भी कई गुना बढ़ाना होगा, ताकि प्रभावशाली बुनियादी संरचना विकसित की जा सके. भारत के कई बड़े संस्थान जैसे नई दिल्ली का एम्स, वेल्लोर का क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, पुणे का नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी और नई दिल्ली को इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी हैं, जो डेंगू के विषाणु के संक्रमण का अध्ययन करने के लिए अमेरिका के एमोरी वैक्सीन सेंटर से जुड़े हैं. इस तरह के वैश्विक प्रयासों को अमेरिका के ही नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ से भी सहयोग मिल रहा है.

ये टीका कब तक बाजार में आ जाएगा?

डेंगू के खिलाफ विकसित हो रहे टीके की पहली पीढ़ी 1-2 साल में बाजार में आ जाएगी. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो अगले 5 सालों में इस टीके की अगली पीढ़ी भी बाजार में उपलब्ध हो सकती है.

एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी सनोफी पैस्टर अपना डेंगू रोधी टीका भारतीय बाजार में उतारने की योजना बना रही है. आपका इस पर क्या कहना है?

एक कठिन काम होने के बावजूद डेंगू के लिए सुरक्षित और सस्ता टीका विकसित करने के क्रम में समर्पित शोध प्रयासों के लिए हम सनोफी पैस्टर के शु्क्रगुजार हैं. यह डेंगू के टीके के विकासक्रम में सबसे आगे है और निकट भविष्य में इसकी पहली पीढ़ी उपलब्ध हो सकती है.

हालांकि इसके साथ ही इस टीके के संबंध में कुछ चिंता करने योग्य बातें भी हैं. जैसे- व्यक्तियों में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, क्या तीन खुराक, साल भर तक प्रतिरक्षा प्रदान करेगी, टाइप 2 के वायरस पर इसका कम प्रभाव, टीका लेने के 1-2 साल बाद पांच साल से कम उम्र के बच्चों की अस्पतालों में बढ़ती संख्या आदि. इसीलिए डब्लूएचओ और डेंगू के विशेषज्ञों का कहना है कि इसके साथ डेंगू वैक्सीन की अगली पीढ़ी विकसित करने का काम भी शुरू कर देना चाहिए.

आपके अनुसार आने वाले 5 सालों में विश्व और देश में डेंगू की क्या स्थिति होगी?

रोग नियंत्रित करने में मिली असफलता, अनियोजित शहरीकरण, ग्लोबल वार्मिंग, बेहिसाब बढ़ती आबादी, अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं आदि डेंगू के फैलने के बड़े और वैश्विक कारण हैं. ये खुशी की बात है कि डेंगू नियंत्रण को लेकर जागरूकता बढ़ी है और कई सरकारी व निजी संस्थान शोध में पर्याप्त सहयोग दे रहे हैं. कई संस्थानों की ओर से तेज हो रहीं शोध की कोशिशें और टीके का विकास करने में प्रयासरत लोगों की संख्या में बढ़ोतरी से एक प्रभावशाली टीका जल्द ही उपलब्ध हो जाएगा. इसके लिए उन लोगों का शुक्रिया जो इन शोध प्रयासों से जुड़े हैं. बहरहाल, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, ‘अफोर्डेबल हेल्थकेयर इंडिया स्कीम’ और दूसरे सहयोगियों की मदद से भारत भी जल्द ही अपना सस्ता, सुरक्षित और प्रभावशाली टीका बनाने में कामयाब हो सकता है.

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