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सपनों की दौड़

ओलंपिक खेलों में 53 साल पहले की उस दौड़ में एक साथ चार लोगों ने विश्व कीर्तिमान तोड़ा. इसमें चौथे स्थान पर रहे मिल्खा सिंह भले ही भारत को ओलंपिक पदक न दिला पाए हों लेकिन उन्होंने देश को उसके खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायक कहानी दे दी. निशिता झा की रिपोर्ट.  

कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो

फिल्म समीक्षा फिल्म » घनचक्कर निर्देशक»  राज कुमार गुप्ता लेखक » परवेज शेख, राज कुमार गुप्ता कलाकार » विद्या बालन, इमरान हाशमी, राजेश शर्मा, नमित दास हमारी दुनिया की प्रॉब्लम है कि इसमें हंसी इतने स्वाभाविक ढंग से दाखिल नहीं होती, जैसे जीवन का हिस्सा हो. यही प्रॉब्लम घनचक्कर की भी है. यह कई  

यह फिल्म समीक्षा नहीं है

संदर्भ फिल्म - हिम्मतवाला  

‘कोई स्त्री को कमजोर कहता है तो मुझे आंटी का वह चेहरा याद आता है’

पटना की यह मेरी दूसरी यात्रा थी. तब मैं रांची के सेंट जेवियर्स कालेज में पढ़ता था. मुझे जानकारी मिली थी कि मशहूर आलोचक नामवर सिंह व्याख्यान देने पटना आने वाले हैं. उन दिनों साहित्य और नामवर सिंह मुझ पर नशे की तरह सवार थे. मैं नामवर सिंह को दूरदर्शन  

अनबूझ अनुवाद

‘प्रकाशक प्रति शब्द 10 या 15 पैसे देता है. इसके बाद आप उम्मीद करें कि बढ़िया अनुवाद हो जाए. क्या यह संभव है? ‘विश्व क्लासिकल साहित्य शृंखला (राजकमल प्रकाशन) के संपादक सत्यम के ये शब्द उस बीमारी की एक वजह बताते हैं जिसकी जकड़ में हिंदी अनुवाद की दुनिया आजकल  

हमारे लोकतंत्र की सेहत दुरुस्त है

पांच राज्यों के चुनावी नतीजों की धूल अब बैठ चुकी है. अब यह देखने का समय है कि इन चुनावों ने हमारे लोकतंत्र के रक्तचाप पर क्या असर डाला है.  उत्तर प्रदेश में यह लगातार दूसरी बार है जब वोटरों ने किसी एक दल को साफ बहुमत दिया है. 2007