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दिल्ली का कश्मीर की जनता से कोई संवाद ही नहीं हो रहा

कश्मीर में 2010 में जैसे हालात बने थे, अब परिस्थिति उससे ज्यादा कठिन और ज्यादा विकट हो गई है. ऐसा इसलिए हुआ है कि 2008-09 और 10 में जो घटनाएं हुई थीं, उससे न मनमोहन सरकार ने, न ही मोदी सरकार ने कोई सबक सीखा. सितंबर, 2010 में हमारी वार्ताकार  

‘वॉट्सऐप या मेल पर तलाक कैसे दे सकते हैं? क्या अल्लाह बैठकर वॉट्सऐप चेक कर रहे हैं कि किसने किसे क्या भेजा है?’

तकरीबन सारी दुनिया में, जिसमें मुस्लिम देश भी शामिल हैं, तीन तलाक का मौजूदा स्वरूप समाप्त हो चुका है. मेरा तो मानना है कि मुल्क में महिलाओं के लिए बराबर का अधिकार होना चाहिए. उनके लिए सक्रिय कानून होने चाहिए, जो एक स्तर पर हैं भी कि अगर आप चाहें  

‘मुताह एक तरह की कानूनी वेश्यावृत्ति है, जिस पर मुस्लिम समुदाय को बात करने में भी शर्म आती है…’

तीन तलाक के खिलाफ अभियान से मुस्लिम समुदाय के लोगों या मौलवियों को आहत नहीं होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से आज के दौर में तीन तलाक हो रहा है, वह पूरी तरह इस्लाम के खिलाफ है. इससे इस्लाम के जो पांच सिद्धांत हैं, जो हिदायत है, उसमें कोई तब्दीली  

बीमारी की तरह फैल रहा है सोशल मीडिया का दुरुपयोग : ओम थानवी

जब नई तकनीकें आती हैं, तो वे अपने साथ वरदान भी लेकर आती हैं और अभिशाप भी. आपको उसके फायदे नजर आते हैं और नुकसान भी. यहां तक कि लोकतंत्र के भी अपने फायदे और नुकसान हैं और तानाशाही के भी अपने फायदे-नुकसान हैं. ये होता है कि तानाशाही में  

लोग पत्रकारों को गाली दे रहे हैं, अगर समाज इसे मान्यता देता है तो मैं उसे माला पहनाना चाहता हूं: रवीश

मेरा तो मानना है कि ये संगठित तरीका है और ये हर स्तर पर हो रहा है. देश में पार्टी के कार्यकर्ता कहीं भी हो सकते हैं, वहां से ये शुरू हो जाते हैं. तरह-तरह के वाट्स ऐप ग्रुप बने हुए हैं. वहां से इन बातों को फैलाया जाता है.  

फर्जी एनकाउंटर का खेल जनता को स्वीकार नहीं करना चाहिए

सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय समाज में एनकाउंटर को स्वीकार्यता मिली हुई है. समाज इसे स्वीकार करता है. आप इसे एक उदाहरण से समझिए कि एक मशहूर कांड; भागलपुर का अंखफोड़वा कांड, जिस पर प्रकाश झा ने फिल्म भी बनाई थी वह बहुत ही जघन्य कांड था. बिहार  

भगत सिंह, शहादत और संघ

  बीते 23 मार्च को क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत की 85वीं वर्षगांठ थी, जिन्हें अंग्रेज सरकार ने लाहौर जेल में फांसी पर चढ़ाया था. अंग्रेज हुक्मरानों को लगा था कि क्रांतिकारियों को मार देने से उनके, भारत को एक आजाद धर्मनिरपेक्ष और समतावादी देश बनाने के  

‘लोगों को बरगलाने के लिए कहा जा रहा है कि भगत सिंह हमारे हैं’

लोगों को बरगलाने के लिए मुखौटे डालकर हर तरफ से यह कहा जा रहा है कि भगत सिंह हमारे हैं और हम भी उन्हीं के जैसे हैं. भगत सिंह के होने का मतलब वह है जो कुछ उन्होंने असेंबली में बम फेंकने के बाद कहा था. जो भगत सिंह के  

‘आपको लगता है कि हर वो आदमी दुश्मन है जो भारत माता की जय नहीं कहता, ऐसे तो ये देश पाकिस्तान बन जाएगा’

देश में आजकल एक खास किस्म का सिलसिला चल रहा है. मैं उसका शिकार बना. वो पहले से जाल बिछाए बैठे थे, मैं फंस गया. सबसे परेशान करने वाली बात कि पाकिस्तान हो या बांग्लादेश, वहां पर बहुत दमन रहा है. हमारे यहां आपातकाल को छोड़ दें तो शायरों या  

विरोधियों को राष्ट्रविरोधी घोषित करने की मुहिम

इस पूरी बहस के सहारे कोशिश की जा रही है कि भाजपा और आरएसएस के खिलाफ जो भी लोग हैं उन्हें राष्ट्रविरोधी घोषित किया जाए. ये मुहिम चला रहे हैं. हर जगह जनता में बंटवारे की कोशिश की जा रही है. अगर यह तर्क है कि देश को बचाने के