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अखंड भारत के लिए आवश्यक है अखंड उदारता

अच्छे सपने देखना अच्छी बात है. मानव समाज सपनों से खाली नहीं हो सकता. सपने हमें जीने का हौसला देते हैं. लेकिन रात और दिन में देखे गए सपनों में बड़ा अंतर होता है. रात के सपने सिर्फ कल्पनालोक को आलोकित करते रहते हैं जबकि दिन में देखे गए सपने  

कसाई की दुकान पर बकरा नहीं पाला जा सकता : मुनव्वर राना

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश- तीनों मुल्कों के एकीकरण की बात बार-बार उठती है. एकीकरण पर आपका क्या नजरिया है? देखिए, मुल्क भी घर की तरह होते हैं. जब घर में एक बार दीवारें उठ जाती हैं तो टूटती नहीं हैं. इसलिए ये नामुमकिन है कि तीनों मुल्क एक हो जाएंगे.  

एकीकरण यूटोपिया है, जो संभव नहीं

हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश को एक कर देने का विचार एक यूटोपिया है जो कि संभव नहीं है. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अपना एजेंडा है जो आजादी के बहुत पहले से चल रहा है. वे मिथ और इतिहास को मिला देते हैं. इसकी वजह से ही वे इतिहास को  

दोनों मुल्क शुरुआत करें, निभ जाए तो अच्छा…

किसी भी तरह हिंदुस्तान और पाकिस्तान के जोड़ने का सिलसिला शुरू करना होगा. मैं यह मानकर नहीं चलता कि जब हिंदुस्तान-पाकिस्तान का बंटवारा एक बार हो चुका है तो वह हमेशा के लिए हुआ है. किसी भी भले आदमी को यह बात माननी नहीं चाहिए. हिंदुस्तान और पाकिस्तान की सरकारों  

अखंड भारत का नहीं, महासंघ का सपना देखें

बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान की आकस्मिक यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच जो सद्भावना का वातावरण बना, उस पर संभवतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता एवं वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव द्वारा दिए वक्तव्य से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. राम माधव  

पाक की संप्रभुता स्वीकार नहीं कर पाए हैं दक्षिणपंथी

पहली बात तो जिस एकीकरण के विचार की बात की जा रही है मैं उस पर ज्यादा जानकारी नहीं रखती. पहली बार मार्च 2006 में वर्ल्ड सोशल फोरम के आयोजन के दौरान कुछ भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मित्रों ने बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल फोरम (बीबीपीपीएफ) के विचार पर चर्चा की. फोरम में  

जनसंघ के प्रति मुस्लिम इसलिए पूर्वाग्रहग्रस्त हैं क्योंकि वह अखंड भारत की बात करता है

रविवार 23 मार्च, 2014 को मैं संसद के सेंट्रल हॉल में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी आंदोलन के प्रमुख सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया को पुष्पांजलि अर्पित करने गया था. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे कम से कम 25 बार जेल गए थे. 1970 में राज्यसभा सदस्य के रूप में  

भाषा और संस्कृति के जरिए दक्षिणी उपमहाद्वीप के इन तीन देशों को जोड़ा जा सकता है : तस्लीमा नसरीन

क्या आपको लगता है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश का मिलकर एक देश बन जाना संभव है? बहुत समय पहले जब यूरोप में सभ्यता तक नहीं पहुंची थी, वे एक-दूसरे के खिलाफ लड़ा करते थे पर आज वो एक हैं और बहुत अच्छे हाल में हैं. भारत, पाकिस्तान  

आम जनता की मांग नहीं है एकीकरण

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण की मांग में कोई गंभीरता नहीं है. आपने कहा कि लोहिया भी इस तरह की मांग करते थे लेकिन उनको मरे हुए भी 50 साल हो गए हैं. मैं भी राजनीतिक वातावरण देखता हूं. मुझे नहीं लगता कि यहां या पाकिस्तान में ऐसी कोई  

अखंड भारत की शुरुआत सांस्कृतिक भारत से होगी

तीनों देशों को मिलाकर अखंड भारत कहने की जगह हम इसको सांस्कृतिक भारत और बृहत्तर भारत कहेंगे. सांस्कृतिक भारत की जब हम बात करते हैं तो तीनों देशों में जो भी सांस्कृतिक प्रतीक हैं, जो कि तीनों देशों में हमें प्राप्त हैं, जैसे- नदियों के नाम हैं, प्रमुख नगरों के