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सांसत में ‘सुशासन बाबू’

वशिष्ठ नारायण सिंह बिहार में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद हैं. उन्हें वशिष्ठ बाबू या दादा कहकर पुकारा जाता है. वे लालू यादव के प्रिय हैं और नीतीश कुमार के भी विश्वासपात्र हैं. वे धाराप्रवाह बोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन 30 दिसंबर को वे अचानक बोलते-बोलते  

लाल पानी पर लगाम

करीब दो साल पहले की बात है. लालू प्रसाद यादव ‘तहलका’ से बातचीत कर रहे थे. इस दौरान शराब पर बात होने लगती है. लालू कहते हैं, ‘देखिए नीतीश को, उसका लोग शराबबंदी की बात को हवा में उड़ाता है. गरीबों का ‘लाल पानी’ बंद करवा देगा. बताइए गरीबों का  

बिहार में दलित राजनीति को नेतृत्व की दरकार

रमाशंकर आर्य पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. वे दलित मसलों के जानकार हैं. बिहार के चुनाव परिणाम से खुश दिखते हैं. उनकी खुशी का राज भाजपा की हार में छिपा है. कहते हैं, ‘चलिए यह अच्छा हुआ कि रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी की हार हुई. यह उनके लिए  

विकास पर भारी जुबानी बिसात

बिहार में इस बार का चुनाव कई मायने में दिलचस्प है. 2010 से 2015 के बीच जो विधानसभा के सदस्य रहे, उनमें से सारे सत्ता और विपक्ष दोनों का मजा ले चुके हैं. जदयू सत्ता में भी रही है और एक दिन के लिए विपक्ष में भी, जब जीतन राम  

‘सामाजिक न्याय के नाम पर लालू ने लोगों को ठगने का काम किया’

वाम दल अलग-अलग चुनाव लड़ने के अभ्यस्त हैं, अब एक होकर लड़ने को कैसे तैयार हो गए? हम सांप्रदायिक ताकतों को रोकना चाहते हैं. देश को खतरा साफ दिख रहा है. नरेंद्र मोदी की सरकार सीधे-सीधे आरएसएस के अंग की तरह काम कर रहा है. इसी खतरे से देश को  

वामदल में कितना बल

सात सितंबर को पटना लाल रंग में रंग हुआ था. हरे और भगवा रंग के बीच सत्ता की राजनीति पर वर्चस्व के लिए छिड़ी जंग के दौरान यह लाल खेमों के हस्तक्षेप का दिन था. यह इसलिए भी खास था, क्योंकि इस दिन भारत के अलग-अलग हिस्से में सक्रिय छह  

‘मोदी बिहार का जितना दौरा करेंगे, उतना फायदा हमें मिलेगा’

जनता दल (यूनाइटेड) नेता और राज्यसभा सांसद शरद यादव संसद में किसी विषय पर चल रही बहस को रहस्यमयी तरीके से भटकाने के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में जब संसद में बीमा विधेयक पर बहस चल रही थी, तब अचानक शरद यादव ने लीक से हटकर गोरी त्वचा  

नीतीश-लालू को झटका, पर भाजपा की बल्ले-बल्ले नहीं

बिहार विधान परिषद चुनाव में जो परिणाम आए हैं, क्या वे आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित कर पाएंगे?  

भंवर में भाजपा

बात पिछले महीने की है. पटना के गांधी मैदान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में विराट कार्यकर्ता सम्मेलन होने के अगले दिन की. पटना के भाजपा कार्यालय में हर दिन की तरह जमावड़ा लगा था. उस रोज के  

बिहार: छह महीने छप्पन मुसीबतें

जीतन राम मांझी को लेकर बिहार की राजनीति में पैदा हुए भूचाल का दौर थम चुका है. नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो चुके हैं, लेकिन प्रबल संभावना है कि आनेवाले दिनों में उठापटक के कई नए दौर शुरू होंगे