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संघ और भाजपा का राष्ट्रवादी पाखंड

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकताओं ने हैदराबाद और जेएनयू में ‘मुखबिर’ की तरह सक्रियता दिखाई. देश जानना चाहता है कि हरियाणा में 9 दिनों के उपद्रव के दौरान वे कहां थे? वे वहां जातीय झगड़े की आग को बुझाते हुए नहीं दिखे. क्या वे वहां भीड़ का हिस्सा थे?   

हमारे पति, भाई, बेटे, बॉयफ्रेंड और सहकर्मी हमारे जीवन का हिस्सा हैं और पॉर्न उनके जीवन का, दूसरी तरफ ‘देसी बॉयज’ भी हैं, स्वीकार कीजिए

सनी लियोन परिघटना का फायदा अगर उनसे ज्यादा किसी को हुआ है तो वो है भारतीय मीडिया. जो नैतिकता, आत्मसंयम और ‘चारित्रिक विकास’ बेचने वाली दुकानों से भी कमाता है, साथ ही इन्हीं मूल्यों की कमर तोड़ने वाली अराजक मनोरंजन की दुनिया से और भी ज्यादा कमाई करता है. भारतीय  

खेसारी दाल : मिलावटी कारोबार को आबाद करने का औजार

  पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का एक बयान टीवी पर देखा-सुना. उन्होंने कहा कि खेसारी की दाल बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है. साथ में उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि वे उसका सेवन 15 सालों से कर रहे हैं और सेहतमंद हैं. पासवान को सुनते-देखते हुए मैं  

‘आपको सरकारी ठेका दिलवा देंगे, धरना खत्म कर दीजिए’

कौन सुभाष कुमार मित्तल कब 8 जुलाई 2015 से कहां उपायुक्त कार्यालय, जमशेदपुर, झारखंड क्यों जमशेदपुर प्रखंड के उत्तरी पूर्वी बागबेड़ा पंचायत क्षेत्र में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कराया गया था. सूचनाधिकार कार्यकर्ता सुभाष कुमार मित्तल ने सूचना के अधिकार के तहत इस संबंध में संबंधित  

‘हमें हथियार बनाना आता है फिर भी नौकरी नहीं मिली’

कौन: ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के हजारों पूर्व प्रशिक्षु कब: दिसंबर, 2015 से कहां: जंतर मंतर, दिल्ली  क्यों ‘मैंने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में प्रशिक्षण देश सेवा के लिए लिया था. मेरा मानना है कि सेना के लिए हथियार बनाने वाली इन फैक्ट्रियों का महत्व सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों जितना ही है.’ ये कहना है नवनिर्मित  

‘समाज व संगठनों का भी पतन हुआ, छात्र राजनीति इससे अलग नहीं’

यह सही है कि छात्र राजनीति की पहली प्राथमिकता अध्ययन है, लेकिन जो सामाजिक-राजनीतिक समस्याएं हैं, उन पर भी निगाह रखनी चाहिए और सभी विचारधाराओं से परिचित होना चाहिए. छात्रों के अपने कर्तव्य और अधिकार हैं. राष्ट्र या समाज के समक्ष कोई गंभीर समस्या आने पर छात्रों को देश सेवा  

संघ के गले में अटक जाएंगे आम्बेडकर

राष्ट्र निर्माता के रूप में बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर की विधिवत स्थापना का कार्य 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की राजपत्र में की गई घोषणा के साथ संपन्न हुआ. संविधान दिवस संबंधी भारत सरकार के गजट में सिर्फ एक ही शख्सियत का नाम है और वह नाम स्वाभाविक रूप  

‘जब न्याय मिलेगा तभी भाइयों के शव दफनाएंगे’

कौन: मणिपुर के आदिवासी कब: नवंबर, 2015 से कहां: जंतर मंतर, दिल्ली क्यों जंतर मंतर पर बने एक अस्थायी टेंट के पास खड़े सैम नगैहते चिल्लाते हैं, ‘हमें गरीब आदिवासियों के लिए न्याय चाहिए.’ सैम ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहे है. उनके साथ मणिपुर से आए कई सामाजिक कार्यकर्ता दिल्ली  

‘प्रधानमंत्री जितने का चश्मा पहनते हैं, उतने में तो कितने बच्चों का पेट पल सकता है’

बच्चों की सुरक्षा और परवरिश के लिए सरकार जो कुछ भी कर रही है, वह बिल्कुल पर्याप्त नहीं है. क्योंकि पूरे देश बच्चों की हालत बहुत खराब है. बच्चों के लिए इस बार का बजट बेहद खराब रहा. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का बजट घटाकर आधा कर दिया गया.  

कल कोई 14 साल का बच्चा अपराध करता है तो क्या कानून में फिर से बदलाव करेंगे?

दिल्ली में पिछले दिनों एक ढाई साल की बच्ची के साथ बलात्कार की घटना, जिसमें 16-17 के दो युवकों के शामिल होने का आरोप है, के बाद फिर से यह मांग जोर पकड़ने लगी थी कि किशोर न्याय अधिनियम में जघन्य अपराधों में लिप्त किशोर की उम्र 18 से घटाकर