बेलाग-लपेट Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
मोदी जी के पीएम बनने के बाद संघ के लोगों को चर्बी चढ़ गई है : जिग्नेश मेवाणी

हमारे समाज में गाय को आधार बनाकर छुआछूत की परंपरा पुरानी है. पर अब इसके बहाने दलितों को पीटा जा रहा है. देखिए, और कोई पशु माता नहीं है तो गाय ही माता क्यों है? यह सबसे अहम सवाल है. गाय को पवित्र बनाकर लंबे अरसे से एक राजनीति चल  

हम जिसकी पूजा करते हैं उसी को ये बूचड़खाने में काट देते हैं तो तनाव तो पैदा होगा ही : विनय कटियार

उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव के क्या कारण रहे और इस बार अलग क्या है? एक बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव का कारण कल्याण सिंह का पार्टी छोड़कर जाना था. इस कारण प्रदेश की पिछड़ी खासकर लोध जातियों ने पार्टी का साथ छोड़  

कैराना के मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है : हुकुम सिंह

आपने अपने क्षेत्र कैराना के बारे में यह मसला उठाया था कि वहां से पलायन हो रहा है. असलियत क्या है? आपको मौका लगे तो कैराना विजिट कर लीजिए. कैराना अब किसी भले आदमी के रहने लायक रहा नहीं. परिस्थिति जैसी उभर कर आ रही है, मौके पर उससे ज्यादा  

जाट आंदोलन के समय पुलिस ने उपद्रवियों को खुली छूट दे रखी थी : प्रकाश सिंह

हरियाणा में इस साल फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, लूटपाट व आगजनी की घटनाओं के दौरान पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन राज्य सरकार ने किया था.  

‘मेरा भाई रोहित दलितों के लिए लड़ा और उनके हक के लिए अपनी जान दी’

क्या रोहित ने हैदराबाद विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से मिली प्रताड़ना के बारे में कभी आप लोगों को बताया था? रोहित का स्वभाव दूसरों को दोष देने का नहीं था. दोष देने की जगह रोहित गलत के खिलाफ लड़ते थे. इस तरह की लड़ाई लड़ने के लिए रोहित काफी समझदार  

‘जांच रिपोर्ट निष्पक्ष है, मुझ पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं था’

ये बात सही है कि सरकार ने आयोग का गठन दो महीने के लिए किया था. लेकिन ये कहना गलत होगा कि आयोग को जांच करने में अधिक समय लगा. मुझे नहीं याद आता कि इतने कम समय में किसी दूसरे आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी हो. नाम लेना गलत  

‘अगर हिंसा करनी पड़ी तो वो भी करूंगा’

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) की शुरुआत के बारे में बताइए? संगठन की शुरुआत 2011 में लौहपुरुष सरदार पटेल की जयंती पर हुई थी. मैं इस संगठन को अहमदाबाद के विरामगाम और मंडल इलाके से सिर्फ पाटीदार समुदाय के लिए चला रहा था. समाज के संवेदनशील तबके, जिसमें  हिंसा की